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    80 दिन में पुलिस मौत की FIR नहीं लिख सकी:बेटे को खोने वाला पिता बोला- 700 किमी आकर रोज गाजियाबाद के चक्कर काटता रहूं

    2 hours ago

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    गाजियाबाद के पुलिस थानों में जनता की किस तरह से सुनवाई होती है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। एक युवक की सड़क हादसे में 80 दिन पहले मौत हुई, युवक यूपी के सुल्तानपुर जिले का रहने वाला था। युवक का पिता 700 किमी दूर आकर थाने के चक्कर काट रहा है। लेकिन पुलिस ने कार्रवाई तो FIR तक दर्ज नहीं की। यहां तक की थाने के मुंशी और दरोगा टरका देते हैं कि आप केस दर्ज मत कराइए। आपको क्लेम पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मिल जाएगा। पहले जानिए क्या है पूरा मामला यूपी के सुल्तानपुर जिले के धम्मौर थाना क्षेत्र के कचानाया गांव निवासी आशीष तिवारी (28 साल) पुत्र रामजी तिवारी गाजियाबाद के लोहामंडी में ट्रैक्टर चलाता था। युवक की शादी तय हो गई थी, मार्च माह में शादी होनी थी। 5 जनवरी 2026 की देर रात करीब 2 बजे कोतवाली थाना क्षेत्र में सिल्वर सिटी सिनेमा के पास ट्रैक्टर पलटने से से आशीष की मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और शव अगले दिन परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने दर्ज नहीं की एफआईआर आशीष तिवारी के पिता रामजी तिवारी का कहना है कि मैंने गाजियाबाद के कोतवाली थाने में तहरीर दी थी, कि मेरे बेटे की मौत का केस दर्ज किया जाए। लेकिन लिखित में तहरीर देने के बाद मेरे बेटे का केस दर्ज नहीं किया गया। रात में डिवाइडर से टकराकर आयशर टैक्टर पलटा। मैं 700 किमी आकर गाजियाबाद में पुलिस के चक्कर काट रहा हूं। लेकिन मेरी एफआईआर दर्जन नहीं की। थाने में मुंशी और दरोगा कहते हैं कि तुम केस दर्ज मत कराओ। आपके बेटे को जो बीमा मिलेगा वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मिल जाएगा। मेरा बेटा चला गया, मैं ही परेशान पीड़ित पिता ने कहा कि मेरे तीन बेटे में से सबसे बड़े बेटे की मौत हो चुकी है। मैं लगातार हार थक चुका हूं। हादसा हुआ है, पुलिस ही घायल बेटे को सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची थी। उसके बाद भी केस दर्ज नहीं किया गया। मेरा सब कुछ चला गया। 2 हजार रुपये खर्च करके सुल्तानपुर से गाजियाबाद आता हूं, मैं मजदूर आदमी और यहां से मैं रो रोज थाने में आऊं। हादसे को 80 दिन हो गए हो गए। अभी तक पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। कोतवाली SHO सचिन कुमार का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर पीड़ित की पूरी मदद की जाएगी।
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