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    65 लाख का रहस्य 38 दिन बाद भी बरकरार:ना पुलिस ने FIR दर्ज की... ना ही डाक विभाग की इंटरनल इनक्वायरी पूरी हुई

    6 hours ago

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    प्रयागराज के एनसीआर सूबेदारगंज डाकघर से 65 लाख रुपये गायब होने और पोस्टमास्टर जगदंबा प्रसाद श्रीवास्तव की आत्महत्या के मामले में 38 दिन बीत जाने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी बड़ी रकम गायब होने के बावजूद अब तक धूमनगंज थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है, जबकि डाक विभाग की विभागीय जांच भी अभी अधूरी है। पोस्टमास्टर की मौत के बाद सामने आए इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और डाक विभाग दोनों जांच का दावा कर रहे हैं, लेकिन 65 लाख रुपये आखिर कहां गए, इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है। तहरीर दी, लेकिन एफआईआर आज तक नहीं डाक विभाग ने रकम गायब होने के मामले में धूमनगंज थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। विभाग का कहना है कि पोस्टमास्टर की जिम्मेदारी कैश हेड पोस्ट ऑफिस में जमा कराने की थी, लेकिन रकम जमा नहीं हुई। इसके बावजूद 38 दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि उच्चाधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। दूसरी ओर डाक विभाग का कहना है कि उसने अपनी ओर से आवश्यक कार्रवाई कर दी है। विभागीय जांच भी अधूरी मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय समिति अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दे सकी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि 65 लाख रुपये किस स्तर पर गायब हुए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है, लेकिन रिपोर्ट लंबित होने से पूरे मामले पर रहस्य बना हुआ है। पोस्टमास्टर की आत्महत्या के बाद खुला था मामला 19 मई को पोस्टमास्टर जगदंबा प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से मिले कथित सुसाइड नोट में उन्होंने खजांची सुरेंद्र कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद उनके बेटे प्रखर श्रीवास्तव की तहरीर पर एयरपोर्ट थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी मामले में पुलिस आरोपी खजांची सुरेंद्र कुमार को बयान दर्ज कराने का नोटिस भी जारी कर चुकी है। शुरुआती जांच में क्या सामने आया डाक विभाग की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, शनिवार रात करीब 8:30 बजे सूबेदारगंज डाकघर से हेड पोस्ट ऑफिस के लिए रेमिटेंस भेजा गया था। उस समय कार्यालय बंद हो चुका था, इसलिए कैश जमा नहीं हो सका। सोमवार को खजांची ने पोस्टमास्टर से संपर्क किया। बताया गया कि पोस्टमास्टर ने पहले अंतिम संस्कार में होने की बात कही और बाद में खुद कैश लेकर आने का आश्वासन दिया, लेकिन रकम कभी जमा नहीं हुई। FIR पर अटका मामला प्रयागराज मंडल के अधीक्षक सुशील तिवारी के अनुसार विभाग की ओर से एफआईआर के लिए तहरीर दी जा चुकी है। दूसरी ओर धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय का कहना है कि मामले में उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है और अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिम्मेदारी किसकी, जवाब किसी के पास नहीं करीब छह सप्ताह बीतने के बाद भी 65 लाख रुपये का कोई सुराग नहीं मिला है। एक तरफ डाक विभाग विभागीय जांच का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस एफआईआर दर्ज करने के लिए अनुमति का इंतजार कर रही है। ऐसे में प्रकरण को लेकर बरती जा रही हीलाहवाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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