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    28वीं बार उत्तराखंड आ रहे PM मोदी:दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का करेंगे उद्घाटन, पूर्व CM ने अंबेडकर के नाम पर रखने की मांग उठाई

    10 hours ago

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 28वीं बार उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं। इस बार वे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे, जिससे देहरादून से दिल्ली सिर्फ 2.5-3 घंटे में पहुंच सकेंगे। एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले पीएम इस पर बने एशिया के सबसे लंबे वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद पीएम मां डाट काली मंदिर में दर्शन-पूजा करेंगे और फिर वह देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस एक्सप्रेसवे को लेकर नई मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि इसका नाम बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा जाना चाहिए। उन्होंने एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में लिखा- एक्सप्रेसवे से देहरादून में जाम बढ़ेगा और पहाड़ की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, लेकिन अगर इसका नाम अंबेडकर के नाम पर रखा जाता है तो लोग इन परेशानियों को सहने के लिए तैयार हैं। अब जानिए क्या है पीएम का पूरा कार्यक्रम… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह करीब 11:15 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे। यहां वह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बने वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करेंगे, जो चीन से भी लंबा वॉइल्ड लाइफ कॉरिडोर है। जिसके बाद करीब 11:40 बजे वह उत्तराखंड-यूपी बॉर्डर स्थित मां डाट काली मंदिर पहुंचेंगे, जहां दर्शन-पूजा करेंगे। इसके बाद वह देहरादून के लिए रवाना होंगे और आशारोड़ी से उनका रोड शो शुरू होगा, जो शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा। इसके बाद करीब 12:30 बजे प्रधानमंत्री महिंद्रा ग्राउंड पहुंचेंगे, जहां वह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे और दलित राजनीति दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, इसलिए यहां की राजनीति भी इससे जुड़ गई है। इस इलाके में दलित आबादी 20 प्रतिशत से ज्यादा है और 2027 के चुनाव को लेकर सभी पार्टियां इन्हें साधने में लगी हैं। बसपा का असर कम होने के बाद भाजपा गैर-जाटव दलितों पर फोकस कर रही है, जबकि सपा और दूसरे संगठन भी अपनी पकड़ बनाने में जुटे हैं। ऐसे में भीमराव अंबेडकर के नाम पर एक्सप्रेसवे रखने की कांग्रेस की मांग को दलित वोट से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तराखंड में एक्सप्रेसवे और वोट का गणित यह एक्सप्रेसवे सीधे देहरादून से जुड़ता है, इसलिए उत्तराखंड की राजनीति में भी इसका असर माना जा रहा है। राज्य में दलित आबादी करीब 18.76 प्रतिशत है और करीब 22 सीटों पर उनका वोट नतीजे तय करता है। हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून जैसे इलाकों में इसका असर ज्यादा रहता है, जहां यह एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी को बदलने वाला है। ऐसे में भीमराव अंबेडकर के नाम पर इसे रखने की मांग को सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब पढ़िए एक्सप्रेसवे में क्या खास… 14 वे-साइड फैसिलिटी, बिना रुके सफर के लिए पूरी तैयारी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए 14 वे-साइड फैसिलिटी (रेस्ट एरिया) विकसित की गई हैं। यहां पार्किंग, फूड कोर्ट, टॉयलेट और बेसिक सर्विस जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे लंबी दूरी के सफर में बार-बार रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरे कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रा बिना रुकावट पूरी हो सके। इसके लिए 7 इंटरचेंज बनाए गए हैं, जहां से वाहन आसानी से अलग-अलग शहरों और सड़कों से जुड़ सकेंगे। 18.6 किमी एलिवेटेड रोड समेत मजबूत इंजीनियरिंग ढांचा इस एक्सप्रेसवे में 18.6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जिससे भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में ट्रैफिक सीधे ऊपर से गुजर सके। इसके अलावा पूरे रूट में 19 बड़े अंडरपास, 57 छोटे अंडरपास और 4 मेजर ब्रिज बनाए गए हैं। यह स्ट्रक्चर न सिर्फ ट्रैफिक को स्मूद बनाता है, बल्कि स्थानीय कनेक्टिविटी भी बनाए रखता है। लोकल लोगों के लिए सर्विस रोड और सुरक्षित ट्रैफिक सिस्टम स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे के साथ सर्विस रोड बनाई गई है। यहां सुरक्षित यू-टर्न, क्रैश बैरियर और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। साथ ही एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है, जिससे ट्रैफिक की निगरानी, कंट्रोल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स बेहतर तरीके से हो सके। दिल्ली-देहरादून सफर 6 घंटे से घटकर 2.5 घंटे रह जाएगा दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा अब पहले से कहीं तेज होने जा रही है। मौजूदा पारंपरिक रूट (दिल्ली-मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की-देहरादून / NH-58, NH-334) से यह दूरी करीब 235 किमी है, जिसे तय करने में ट्रैफिक जाम, शहरों के भीतर से गुजरने और मिक्स लेन के कारण आमतौर पर 6 घंटे लग जाते हैं, खासकर वीकेंड और सीजन में समय और बढ़ जाता है। नए एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 212 किमी रह जाएगी, यानी करीब 23 किमी की सीधी बचत होगी। इन जिलों और राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से एनसीआर, पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी तेज होगी। पूर्वी दिल्ली (अक्षरधाम, सोनिया विहार) को हाई-स्पीड कनेक्शन मिलेगा, जिससे रोजगार और रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा। पश्चिमी यूपी के बागपत, शामली, मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिले सीधे एक्सप्रेस-वे से जुड़ेंगे, जिससे यात्रा समय घटेगा और गन्ना, एग्रो इंडस्ट्री व लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा होगा। उत्तराखंड में देहरादून को सीधा 6-लेन कनेक्शन मिलेगा, जबकि हरिद्वार, रुड़की और ऋषिकेश स्पर के जरिए जुड़कर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। हाथियों के लिए 12KM एलिवेटेड रास्ता, शोर-रोशनी भी कंट्रोल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर तैयार किया गया है, जो राजाजी नेशनल पार्क और शिवालिक वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जिसके नीचे से हाथी समेत जंगली जानवर बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे। वन्यजीवों पर असर कम करने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। शोर को नियंत्रित करने के लिए नॉइज बैरियर लगाए गए हैं, जबकि रात में तेज रोशनी से बचाने के लिए लाइट कंट्रोल सिस्टम भी लगाया गया है, ताकि जानवरों को प्राकृतिक जंगल जैसा माहौल मिल सके। अब 3 पॉइंट्स में कॉरिडोर के बारे में जानिए पर्यटन और कारोबार दोनों को मिलेगा बड़ा बूस्ट दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से यात्रा समय 2.5 घंटे रह जाएगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर से मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, धनोल्टी और चकराता जैसे पर्यटन स्थलों पर वीकेंड ट्रिप्स में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। हरिद्वार-ऋषिकेश स्पर के जरिए धार्मिक पर्यटन कुंभ, चारधाम और गंगा स्नान तक पहुंच भी तेज और आसान होगी, जिससे होटल, ट्रैवल और लोकल ट्रांसपोर्ट का कारोबार बढ़ेगा। वहीं, व्यापार के लिहाज से यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-एनसीआर के इंडस्ट्रियल क्लस्टर को पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे- रुड़की, हरिद्वार, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से सीधे जोड़ेगा। इससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो पार्ट्स व कृषि उत्पादों में निवेश के नए मौके बनेंगे। कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ सफर छोटा नहीं करेगा, बल्कि पर्यटन, कारोबार और निवेश के नए रास्ते खोलकर उत्तर भारत का बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर किलोमीटर का 3 रुपए टोल देना होगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर टोल की दरें भी सामने आ गई हैं। कार के लिए करीब 3 रुपए/किलोमीटर टोल तय है। इसे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप अपनी कार से दिल्ली से देहरादून जा रहे हैं। जाते वक्त आपको 675 रुपए टोल देना होगा। अगर आप 24 घंटे में ही वापसी करते हैं, तो आपको 675 नहीं, 335 रुपए ही देने होंगे। मिनी बस जैसी लाइट कमर्शियल गाड़ियों के लिए एक तरफ का टोल करीब 1100 रुपए है। बड़ी बस और ट्रक के लिए ये 2275 रुपए रखा गया है। इससे ज्यादा भारी वाहनों का टोल करीब 4 हजार रुपए हो जाता है। जिन लोगों को बाकी एक्सप्रेस-वे पर टोल में छूट मिलती है, वही छूट यहां भी लागू होगी। 2015 से शुरू हुआ दौरों का सिलसिला प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार 11 सितंबर 2015 को उत्तराखंड आए थे। ऋषिकेश में स्वामी दयानंद गिरी से मुलाकात के साथ उनके दौरों की शुरुआत हुई। उत्तराखंड से पीएम मोदी का धार्मिक जुड़ाव भी मजबूत रहा है। वे प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक केदारनाथ, बदरीनाथ, मुखबा और आदि कैलाश जैसे प्रमुख स्थलों के दर्शन कर चुके हैं।
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