Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह

    3 hours ago

    1

    0

    ईरान जंग के एक महीने पूरे होने के बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। अपने 19 मिनट के भाषण में उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान अब कुछ नहीं कर पा रहा है। ट्रम्प ही नहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कुछ ऐसे ही दावे किए। लेकिन अब हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में अमेरिका के दो सैन्य विमान और दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर, जो सर्च ऑपरेशन में लगे थे, ईरान के हमले का शिकार हुए। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 साल से ज्यादा समय में पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिराए गए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था। ईरान युद्ध में अमेरिका के 7 विमान तबाह 2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी 6 क्रू मेंबर सुरक्षित निकले। 12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत। 27 मार्च:सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर E-3 सेंट्री नष्ट हुआ, एक टैंकर विमान भी नुकसान हुआ। 3 अप्रैल- F-15 और A-10 नष्ट हुए, पहली बार दुश्मन की फायरिंग में अमेरिकी विमान गिरे। 24 घंटे में 2 अमेरिकी जेट्स गिराए, 2 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पर अटैक ईरानी मीडिया के मुताबिक सबसे पहले अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया। यह ईरान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में उड़ान भर रहा था। F-15E फाइटर जेट के क्रू को ढूंढने के लिए अमेरिकी विमान A-10 अटैक एयरक्राफ्ट पहुंचा तो उस पर भी हमला हुआ। A-10 हमले के बाद कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां पायलट ने सुरक्षित तरीके से इजेक्ट किया। पायलट सुरक्षित है, हालांकि विमान कुवैत में क्रैश हो गया। CBS के अनुसार, F-15E में दो क्रू सदस्य थे। इनमें से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरा अब भी लापता है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि पैराशूट के जरिए बाहर निकला यह क्रू सदस्य देश के दक्षिणी हिस्से में उतरा हो सकता है। वहीं, F-15E फाइटर जेट के रेस्क्यू के लिए 2 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए थे। उन पर भी हमला हुआ। हालांकि इन पर मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ईरान की रणनीति नहीं समझ पा रहा अमेरिका एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को ईरान के आसमान में बढ़त जरूर है, लेकिन पूरी तरह कंट्रोल नहीं है। ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि कमजोर एयर डिफेंस होने के बावजूद ईरान ने इतने एडवांस अमेरिकी विमानों को कैसे निशाना बनाया? इसका जवाब है ईरान की ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ यानी अलग तरीके से युद्ध लड़ने की रणनीति। ईरान जानता है कि सीधे युद्ध में अमेरिका से मुकाबला करना मुश्किल है, इसलिए कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपना रहा है। वह अक्सर अमेरिका पर चौंकाने वाले हमले कर रहा है। यही वजह है कि जंग शुरू होने के 35 दिन बाद भी अमेरिका अभी भी ईरान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिकी विमानों और हेलिकॉप्टर पर हमले के पीछे मजिद एयर डिफेंस सिस्टम या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल (शोल्डर-फायर मिसाइल) हो सकते हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी विमान नीचे ऊंचाई पर उड़ रहे थे, इसलिए वे इन मिसाइलों की रेंज में आ गए। मजीद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है मजिद सिस्टम ईरान ने 2021 के आसपास इस्तेमाल करना शुरू किया था। इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। मजीद रडार सिग्नल नहीं देता, इसलिए विमान इसे पहले से पकड़ नहीं पाते। इसकी मार करने की दूरी करीब 8 किलोमीटर और ऊंचाई 6 किलोमीटर तक है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। यह एक साथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है और इसमें एक साथ 8 मिसाइल तैयार रहती हैं। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मोबाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल एक्सपर्ट्स का कहना है अमेरिकी हमले में नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदली है। पहले वह स्थिर एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता था, लेकिन अब उसने मोबाइल सिस्टम अपनाए हैं। अब उसके कई मिसाइल लॉन्चर भूमिगत ठिकानों, सुरंगों और कठिन इलाकों में छिपे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद उसके करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा, मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदल सकते हैं। इसे ‘फायर करो और तुरंत हट जाओ’ रणनीति कहा जाता है, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान चीन के HQ-9B जैसे उन्नत मिसाइल सिस्टम का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों तकनीक होती हैं। ---------------------------------- ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    दोस्त से मिलने गया था युवक, बदमाशों ने गोलियों से किया छलनी, मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे सैकड़ों ग्रामीण
    Next Article
    बुर्के में लूट- आरोपी लड़की की पहली तस्वीर:पुलिस का दावा- अयोध्या में ज्वेलरी लूटकर बॉयफ्रेंड के साथ भागना चाहती थी

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment