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    200 ग्राम चांदी से बने विश्वनाथ धाम की जानिए खासियत:PM को काशी में विधायकों ने दिया गिफ्ट, आर्टिजंस बोले- 12 घंटे में 20 ऑर्डर मिल गए

    3 hours ago

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    काशी विश्वनाथ धाम की रिप्लिका को बुधवार को PM मोदी को विधायकों ने गिफ्ट किया। इस कलाकृति में 200 ग्राम चांदी लगी है। इसमें गोल्ड पॉलिश भी की गई है। जिसमें दोनों शिखर, त्रिशूल और नंदी जी की आकृति भी है। इसे एक सप्ताह में पांच आर्टिजंस ने तैयार किया है। इसे बनाने में एक सप्ताह का समय लगा है, जिसकी कीमत 75 से 80 हजार रुपए है। दैनिक भास्कर ने गुलाबी मीनाकारी से बने विश्वनाथ धाम की रिप्लिका बनाने वाले मास्टर आर्टिजन कुंज बिहारी से बात की। उन्होंने कहा- जैसे ही यह मीनाकारी का विश्वनाथ धाम तोहफे में दिया गया। मेरे पास दिल्ली और अन्य शहरों के व्यापारियों के फोन आने शुरू हो गए हैं। करीब 12 घंटे में 20 पीस का ऑर्डर मिल चुका है। प्रधानमंत्री को इसके पहले राम मंदिर मीनाकारी का भेंट किया गया था, जिसका दीपावली पर करोड़ों का कारोबार हुआ था। पढ़िए रिपोर्ट… देखिए विश्वनाथ धाम की रिप्लिका से जुड़ी 4 तस्वीरें … एक सप्ताह में 5 लोगों ने तैयार किया वाराणसी के कोतवाली थानाक्षेत्र के दूध गली इलाके के रहने वाले कुंज बिहारी ने काशी में गुलाबी मीनाकारी को संजो कर रखा है। समय-समय पर इनके प्रोडक्ट्स को पीएम, सीएम और अन्य लोग मेहमानों को स्वागत के लिए देते हैं। गुलाबी मीनाकारी का एक खास प्रोडक्ट श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की रिप्लिका वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी गई। प्रधानमंत्री को दी गई इस रिप्लिका के बारे में कुंज बिहारी ने बताया कि 5 लोगों की टीम ने इसे एक सप्ताह में तैयार किया है। अधिकारियों के निर्देश मिलने पर तैयार किया नेशनल अवार्डी और गुलाबी मीनाकारी के मास्टर आर्टिजन कुंज बिहार ने बताया - हमें एक 10 दिन पहले अधिकारियों से बाबा विश्वनाथ धाम की एक रिप्लिका बनाने का निर्देश मिला था। यह किसे दिया जाना है। यह मुझे नहीं पता था। इसके बाद मैं और 4 युवा महिला आर्टिजंस ने गुलाबी मीनाकारी के काम से विश्वनाथ धाम की आकृति एक सप्ताह में तैयार की। जिसमें मंदिर के दोनों शिखर, त्रिशूल, और नंदी जी की आकृति बनाई गई है। सबने किए अलग-अलग काम कुंज बिहारी ने बताया - गुलाबी मीनाकारी में अलग-अलग स्टेप्स होते हैं। जैसे- कोई डिजाइन बनाने में, कोई उसे गढ़ने में, कोई उस पर मीनाकारी करने में एक्सपर्ट होता है। ऐसे में पांच लोगों की टीम ने इसे अलग-अलग स्टेप्स में तैयार किया। बहुत हर्ष की बात है कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काशी के तीन मंत्रियों ने श्री काशी विश्वनाथ धाम में ही दिया। 200 ग्राम चांदी से बना है धाम कुंज बिहारी ने बताया - गुलाबी मीनाकारी का काम चांदी के स्ट्रक्चर पर होता है। चांदी ठंडी होती है। इसलिए इस पर मीना टिक जाता है और उसमे शाइनिंग भी आ जाती है। यह विश्वनाथ धाम की रिप्लिका 200 ग्राम चांदी से बनाई गई है। साथ ही इसके शिखर पर गोल्ड पॉलिश की गई है। इस पूरे विश्वनाथ धाम की कीमत 75 से 80 हजार के बीच में है। 12 घंटे में मिले 20 ऑर्डर कुंज बिहारी ने बताया प्रधानमंत्री को जैसे ही यह मीनाकारी का विश्वनाथ धाम तोहफे में दिया गया। मेरे पास दिल्ली और अन्य शहरों के के व्यापारियों के फोन आने शुरू हो गए हैं। करीब 12 घंटे में 20 पीस का ऑर्डर मिल चुका है। प्रधानमंत्री को इसके पहले राम मंदिर मीनाकारी का भेंट किया गया था। जिसका दीपावली पर करोड़ों का कारोबार हुआ था। जानिए इसे बनाने वाली नारी शक्तियों ने क्या कहा? और कैसे इसे तैयार किया ? विश्वनाथ धाम की रिप्लिका पर चांदनी ने की मीनाकारी चांदनी यादव ने बताया - मैं गाय घाट पर ही रहती हूं और कुंज बिहारी सर के घर दूध लेकर आती थी। उस समय उन्हें ये सब करते हुए देखती थी तो मेरा भी मन किया और 10 साल से मैं इसे सीख रही हूं। चांदनी ने बताया कि गुलाबी मीनाकारी में कई स्टेप में काम होता है। इसमें मीनाकारी करना मुझे बहुत पसंद है। चांदी के स्ट्रक्चर पर मीना चढ़ाना मुझे बहुत पसंद है। चांदनी ने बताया - आज जो विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री को दिया गया है। उसे हमने बहुत ही प्यार से बनाया है। प्रधानमंत्री नारियों के लिए जो कर रहे हैं। उससे हम उनका धन्यवाद करते हैं। चांदनी ने बताया कि बहुत ही खास था इसे बनाना। डिजाइन बनाने में माहिर हैं तनु गुलाबी मीनाकारी की आर्टिजन तनु यादव ने बताया- मुझे गुलाब मीनाकारी सीखते हुए 5 साल हो गए हैं। मुझे पहले से आर्ट करने का शौक था। मेरी बड़ी बहन यहां कुंज बिहारी अंकल के यहां गुलाबी मीनाकारी का काम करती थी। उसे देखकर मेरा भी मन हुआ और मैंने भी सीखना शुरू कर दिया। इस विश्वनाथ धाम को बनाने के लिए हम 4 महिलाओं और कुंज बिहारी सर ने छोटे-छोटे काम करके इसे एक सप्ताह में बनाया और बहुत खुशी हो रही कि इसे प्रधानमंत्री को दिया गया। प्रधानमंत्री लगातार हमारे प्रोडक्ट्स को देश ही नहीं विदेश में भी पहुंचा रहे हैं। अब जानिए गुलाबी मीनाकारी का इतिहास … 16 वीं शताब्दी में मुगलों ने शुरू की थी मीनाकारी मीनाकारी यानी इनेमलिंग की शुरुआत मुगलों ने 16 वीं शताब्दी में की थी। कुंज बिहारी ने बताया कि इसमें सेफ इनेमल पर गुलाबी कलर के स्ट्रोक होते हैं। इसे करने वाले ही मीनाकार कहलाते हैं। कुंज ने बताया कि इसमें देवी-देवताओं की धार्मिक मूर्तियां, पारंपरिक आभूषण, सजावटी सामान और फूल, पक्षी और जानवर आदि बनाए जाते हैं। तीन प्रकार की मीनाकारी में प्रसिद्ध है बनारसी मीनाकारी कुंज बिहारी ने बताया कि मीनाकारी तीन प्रकार की होती आई है। इसमें एक रंग खुला मीना, पंच रंगी मीना और गुलाबी मीनाकारी। एक रंग खुला मीना में केवल सोने की रेखा उजागर की जाती है। वहीं पंच रंग में हरा, हल्का नीला, सफेद, गहरा नीला और लाल कलर का प्रयोग किया जाता है। वहीं बनारस की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी में चांदी पर गुलाबी रंग से मीनाकारी की जाती है। बाजार ने तोड़ दी थी उद्योग की कमर गुलाबी मीनाकारी को संजो के रखे हुए गुलाबी मीनाकारी के आर्टिजन कुंज बिहारी ने बताया कि गुलाबी मीनाकारी बनारस से खत्म होने की कगार पर थी। बाजार में सही मूल्य न मिलने और खरीद न होने की वजह से इसके पारंपरिक आर्टिजन इससे किनारा कर रहे थे। नई पीढ़ी इस तरफ नहीं देख रही थी क्योंकि यह बहुत ही बारीक काम है। ऐसे में यह उद्योग और कला धीरे-धीरे बंद हो चुकी थी। हमें किसी भी प्रकार का ऑर्डर नहीं मिल रहा था। 2015 में जीआई टैग मिलने के बाद बदल गई तस्वीर जीआई टैग एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने बताया कि साल 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद सरकार ने आर्टिजंस के ऊपर ध्यान दिया। साल 2015 में बनारसी गुलाबी मीनाकारी को जीआई टैग मिला। यह कला स्थापित होना शुरू हो गई। सरकार ने इसकी ब्रांडिंग की और इसे बाजार दिलाया। आज हर साल करोड़ों का टर्न ओवर इस कला से आर्टिजन कमा रहे हैं। मोदी सरकार ने इस कला के लिए बाजार मुहैया कराया और आज इसमें दोबारा से रौनक लौट आई है। --------------------------------
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