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    19 साल के जोडर की रैंकिंग में टॉप-50 में एंट्री:राफेल जोडर कमाचो टेनिस की नई सनसनी; स्पेनिश दिग्गज नडाल जैसा नाम होने से तुलना

    1 hour ago

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    स्पेनिश टेनिस की दुनिया में वर्तमान में कार्लोस अल्कारेज का दबदबा है, लेकिन अब 19 वर्षीय राफेल जोडर कमाचो एक नई सनसनी बनकर उभरे हैं। स्पेनिश होने और ‘राफेल’ नाम होने के कारण उनकी तुलना दिग्गज राफेल नडाल से होना स्वाभाविक है, लेकिन जोडर ने बड़ी सादगी से इस समानता को स्पष्ट किया है। जोडर ने बताया, ‘नडाल मेरे आदर्श हैं, लेकिन मेरा नाम उनके नाम पर नहीं रखा गया है। मेरे पिता, दादा और परदादा, तीनों का नाम राफेल था।’ यह नाम उनकी पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन कोर्ट पर उनके प्रदर्शन ने नडाल जैसे सुनहरे भविष्य की उम्मीदें जगा दी हैं। राफेल जोडर की यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक साल पहले जोडर रैंकिंग में शीर्ष 600 से भी बाहर थे। मार्च 2024 में उन्होंने पहली बार शीर्ष-100 में प्रवेश किया। अब वे सीधे 42वें नंबर पर पहुंच गए हैं। मैड्रिड ओपन में डेब्यू से ठीक पहले शीर्ष-50 में जगह बनाना उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है। इस महीने मोरक्को में अपना पहला टूर-लेवल खिताब जीतने के बाद, उन्होंने बार्सिलोना ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया, जहां उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों को धूल चटाई। जोडर सितंबर 2006 में जन्मे, तब तक नडाल दो ग्रैंड स्लैम जीते चुके थे। जोडर के लिए सबसे यादगार पल पिछले साल दिसंबर में आया, जब जेद्दा में उनकी मुलाकात राफेल नडाल से हुई। जोडर ने बताया, ‘नडाल ने मुझे यूएस ओपन जूनियर जीतने पर बधाई दी। यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि वे स्पेनिश युवाओं की प्रगति पर नजर रखते हैं। वे न केवल टेनिस, बल्कि स्पेनिश खेलों के इतिहास के सबसे महान एथलीट हैं।’ जोडर कहते हैं, ‘मेरा लक्ष्य कोई खास रैंकिंग नहीं, बल्कि हर टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करना है। यह मेरा पहला साल है और मैं अभी बहुत कुछ सीख रहा हूं।’ स्पेनिश टेनिस को अब एक ऐसा ‘राफा’ मिल गया है, जो अपनी खुद की पहचान बनाने के लिए तैयार है। फुटबॉल का मैदान छोड़, टेनिस कोर्ट को चुना मैड्रिड के एक शिक्षक परिवार में जन्मे जोडर ने महज चार साल की उम्र में रैकेट थाम लिया था। शुरुआत में वे फुटबॉल के भी शौकीन थे, लेकिन 12 साल की उम्र में उन्होंने एक कठिन फैसला लिया और फुटबॉल छोड़कर पूरी तरह टेनिस को अपना लिया। बचपन में वह मैड्रिड मास्टर्स के मैचों को दर्शक दीर्घा में बैठकर देखा करते थे। उन्हें आज भी 2013 में जोकोविच और दिमित्रोव के बीच हुआ वह ऐतिहासिक मुकाबला याद है, जिसने उन्हें पेशेवर खिलाड़ी बनने के लिए प्रेरित किया।
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