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    यूपी सरकार ने संभाली 10 हजार अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी:पढ़ाई के लिए हर महीने 4000 रुपए और मुफ्त लैपटॉप, शादी के लिए 1.01 लाख रुपए

    3 hours ago

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    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उन बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ी है, जिनके सिर से कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता का साया उठ गया था। 'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19)' के तहत सरकार न केवल इन बच्चों की पढ़ाई और परवरिश का जिम्मा उठा रही है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को पूरा कर रही है। इस योजना के जरिए अब तक 66 ऐसी बेटियों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है, जिन्हें सरकार ने प्रति बेटी 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी है। वर्तमान में 10,904 बच्चों को मिल रहा लाभ साल 2021 में शुरू हुई इस योजना का मकसद उन बच्चों को संभालना है, जिन्होंने 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावकों को खो दिया। शुरुआत में इस योजना से 13,926 बच्चे जुड़े थे, जिनमें से कई अब बालिग हो चुके हैं। वर्तमान में 10,904 बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। सरकार इन बच्चों को उनकी बुनियादी जरूरतों के लिए 18 साल की उम्र या 12वीं पास करने तक 4,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय मदद दे रही है। डिजिटल पढ़ाई के लिए मिले 8085 लैपटॉप बच्चों के भविष्य को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने अब तक 8085 छात्र-छात्राओं को लैपटॉप बांटे हैं। इसके अलावा, जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उन्हें सरकारी बाल गृहों में मुफ्त रहने की सुविधा दी गई है। 11 से 18 साल तक के बच्चों के लिए कस्तूरबा गांधी और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा का इंतजाम है। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, JEE, CLAT) की तैयारी कर रहे 18 से 23 साल के युवाओं को भी 2,500 रुपये प्रति माह की सहायता दी जा रही है। डीएम होंगे बच्चों की संपत्ति के संरक्षक बच्चों के भविष्य के साथ-साथ उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। सरकार ने जिलाधिकारियों (DM) को इन बच्चों का कानूनी संरक्षक बनाया है। यह सुनिश्चित करना डीएम की जिम्मेदारी है कि इन अनाथ बच्चों की चल-अचल संपत्ति पर कोई कब्जा न कर सके। महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा खुद को असहाय महसूस न करे और उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
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