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    यूपी की इकोनॉमी का 'गेम चेंजर' बनेगा गंगा एक्सप्रेस-वे:मेरठ से प्रयागराज तक नए कारखाने लगेंगे, 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने में मदद करेगा

    6 hours ago

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    भारत का इतिहास हमेशा से गंगा किनारे बसता आया है, लेकिन अब इसी नदी के समानांतर विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट 'गंगा एक्सप्रेसवे' अब हकीकत में बदल रहा है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प का सबसे मजबूत रास्ता है। यह सिर्फ डामर और कंक्रीट की सड़क नहीं है, बल्कि पश्चिमी यूपी को संगम नगरी प्रयागराज से जोड़कर प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक तस्वीर बदलने वाला एक महासेतु है। हर जिले की अपनी पहचान बनेगी उसकी ताकत इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अपने रास्ते में आने वाले हर जिले की खासियतों को बाजार से जोड़ देगा। मेरठ में जहां डेटा सेंटर और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को रफ्तार मिलेगी, वहीं हापुड़ में आलू किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लग रही हैं। बुलंदशहर अपनी रणनीतिक लोकेशन और जेवर एयरपोर्ट की नजदीकी के कारण सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बनेगा। अमरोहा के मशहूर ढोलक और लकड़ी के हस्तशिल्प अब सीधे बड़े शहरों और विदेशी बाजारों तक पहुंच सकेंगे। संभल के 'हॉर्न और बोन' क्राफ्ट को भी अब नई पहचान और बेहतर दाम मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सुरक्षा और सामरिक नजरिए से भी खास गंगा एक्सप्रेसवे केवल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है। शाहजहांपुर में बनाई गई 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी इसका सबूत है, जहां जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे। बदायूं में बन रही इंडस्ट्रियल टाउनशिप और हरदोई का रणनीतिक केंद्र होना इस कॉरिडोर को और खास बनाता है। उन्नाव, लखनऊ और कानपुर मिलकर एक ‘ट्राई-सिटी मॉडल’ के रूप में उभर रहे हैं, जिससे कानपुर के चमड़ा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलेगी। प्रतापगढ़ का आंवला और प्रयागराज का व्यापारिक हब इस श्रृंखला की मजबूत कड़ियाँ हैं। धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई ऊंचाई आर्थिक लाभ के साथ-साथ यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक आत्मा को भी जोड़ेगा। काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे पावन तीर्थों के बीच की यात्रा अब बेहद सुगम हो जाएगी। चित्रकूट और विंध्याचल जैसे धाम भी अब मुख्य पर्यटन सर्किट का हिस्सा होंगे। जानकारों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में लगा एक रुपया अर्थव्यवस्था में पांच रुपये का फायदा लाता है। जब लॉजिस्टिक्स सस्ता होगा और बाजार करीब आएगा, तो उद्योगों के साथ रोजगार बढ़ेगा और पलायन रुकेगा। 2025 के महाकुंभ की सफलता के बाद, गंगा एक्सप्रेसवे धार्मिक पर्यटन के जरिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक समृद्धि पहुंचाने का काम करेगा।
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