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    यौनशोषण के दोषमुक्त प्रोफेसर के कॉलेज प्रवेश पर आजीवन प्रतिबंध:हाथरस बागला डिग्री कॉलेज प्रबंधन ने लिया फैसला, दिया VRS, वकील बोले- हम कोर्ट जाएंगे

    8 hours ago

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    हाथरस में यौनशोषण के आरोपों में फंसे बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर रजनीश को कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि दोषमुक्त होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने प्रो. रजनीश को स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति (वीआरएस) दे दी है। सिर्फ इतना ही नहीं कॉलेज प्रबंधन ने एक आदेश जारी करते हुए प्रो. रजनीश के कॉलेज में प्रवेश पर आजीवन के लिए रोक लगा दी है। यह निर्णय कॉलेज प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया। बाद में कॉलेज की ओर से एक प्रेसवार्ता करके इसके बारे में जानकारी दी गई है। कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वैद्य गोपाल शरण गर्ग और सचिव प्रदीप बागला का कहना है- केस के ट्रायल के दौरान प्रो. रजनीश को सस्पेंड कर दिया गया था। केस से बरी होने के बाद उन्होंने आवेदन देकर वीआरएस मांगा था, जिसे कॉलेज प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया है। प्रबंधन का कहना है- इस केस की वहज से कॉलेज की छवि बेहद खराब हो गई है। इसी कारण प्रो. रजनीश के कॉलेज में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। आरोपी के वकील बोले- कोर्ट जाएंगे प्रो. रजनीश के वकील वीरेंद्र चौधरी ने कहा- ये बिल्कुल नाइंसाफी है। अगर कोर्ट ने प्रो. रजनीश को दोषमुक्त करार दे दिया है, तो कॉलेज इतने पुराने प्रोफेसर के प्रवेश पर रोक कैसे लगा सकता है। ये तो कोर्ट के निर्णय पर संदेह करने जैसा है। हम इसके खिलाफ निश्चित रूप से कोर्ट जाएंगे। अब पूरा मामला सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए... 6 मार्च 2025 को बागला डिग्री कॉलेज की एक छात्रा ने महिला आयोग को लेटर लिखा। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने इंटरनल जांच शुरू की थी। पत्र में आरोप लगाया गया था कि बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. रजनीश लंबे समय से उसका यौन शोषण कर रहे हैं। पत्र के साथ कुछ फोटो और वीडियो भी भेजे गए थे। इसी तरह की कुछ अन्य शिकायत भी आई थीं। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर रजनीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया था। इस मामले में पुलिस ने कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. महावीर प्रसाद छोंकर को भी गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई थी। प्रिंसिपल पर छात्राओं की शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप था। महिला आयोग को भेजा गया छात्रा का लेटर... 'आपको बताना चाहती हूं कि प्रोफेसर रजनीश कुमार कई छात्राओं का यौन-शोषण कर रहा है। वह दरिंदा है। वह छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करता है। वीडियो बनाकर उनका शोषण करता है। मैं एक साल से पीएमओ से लेकर सीएम कार्यालय तक इसकी शिकायत कर रही हूं, लेकिन प्रोफेसर इतना ताकतवर है कि किसी भी शिकायत पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। मोदी सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का समर्थन करती है, लेकिन फिर भी ऐसे दरिंदे बेखौफ होकर बेटियों के साथ दरिंदगी कर रहे हैं। इस दरिंदे से मैं इतनी परेशान हूं कि कभी-कभी आत्महत्या करने का विचार आता है। कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष और मैनेजमेंट को प्रोफेसर की करतूतों के बारे में बताया। उन्हें सबूत भी सौंपे, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब तक इस दुष्ट पर कोई कार्रवाई नहीं होती, मैं हार नहीं मानूंगी। ऐसा लगता है कि कॉलेज के प्रधानाचार्य और मैनेजमेंट की शह पर प्रोफेसर कॉलेज की छात्राओं का शोषण कर रहा है। वह भोली-भाली छात्राओं को प्रतियोगिता परीक्षा पास कराने और नौकरी के नाम पर बहलाता-फुसलाता है। फिर उनके साथ गलत काम करता है और वीडियो भी बनाता है। उसके फोटो-वीडियो मेरे हाथ लगे हैं, जिन्हें मैं प्रमाण के रूप में इस पत्र के साथ भेज रही हूं। अब तक मैंने अलग-अलग नाम से शिकायतें की हैं, क्योंकि अगर दरिंदे को मेरे बारे में पता चल गया, तो वह मुझे मरवा देगा। यह शिकायत भी मैं अपनी पहचान छिपाकर कर रही हूं। रजनीश पिछले 20 साल से कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं का यौन-शोषण कर रहा है। मेरी जैसी छात्राओं की इज्जत बचा लीजिए, नहीं तो यह दरिंदा रजनीश कुमार न जाने कितनी और छात्राओं की इज्जत लूट लेगा। लोकलाज के कारण छात्राएं कुछ नहीं कहेंगी। सामने दिख रहे फोटो और वीडियो के आधार पर इस प्रोफेसर पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।' छात्रा ने आयोग को भेजी थीं ये तस्वीरें… वकील बोले थे- सभी AI जेनरेटेड वीडियो इस मामले की सुनवाई एडीजे एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत में चली। आरोपी पक्ष के वकील ने सामने आए अश्लील वीडियो को AI जनरेटेड बताया। पीड़ित पक्ष से आरोपों को साबित करने के लिए 9 गवाह पेश किए। इनमें पीड़ित दो छात्राएं और पूर्व कर्मचारी भी शामिल थीं। कोर्ट ने गवाहों और छात्रों के बयान और सबूतों को आरोपी के खिलाफ नाकाफी माना और 24 मार्च 2026 को प्रो. रजनीश को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया। कॉलेज की रिपोर्ट में भी था निर्दोष इस मामले को लेकर प्रबंध समिति ने भी तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट में सीडी और फोटो की सही जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। जांच समिति को प्रोफेसर के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले थे और कॉलेज ने उन्हें निर्दोष माना था। सिर्फ इतना ही नहीं प्रो. रजनीश के कोर्ट से बरी होने के बाद कॉलेज प्रो. महावीर प्रसाद छोंकर ने कहा था- न्यायालय के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि यह 'पूरा झूठ और मनगढ़ंत मामला' था। कॉलेज में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने कॉलेज की छवि धूमिल करने के लिए यह साजिश रची थी। भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे प्रो. रजनीश, 20 साल तक रहे, अब गायब बता दें कि प्रो. रजनीश बागला डिग्री कॉलेज के भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने 20 साल तक कॉलेज में सेवाएं दीं। कोर्ट से बरी होने के बाद से वे एक बार भी कॉलेज नहीं गए। वहीं अब उनका कोई अता-पता नहीं है। बताया गया कि प्रो. रजनीश ने तीन शादियां की थीं, पर उन्हें कोई औलाद नहीं थी। --------------------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… मिर्जापुर में वकील की हत्या करने वाले का एनकाउंटर:दोनों पैर में गोली लगी, पुलिसवाले टांगकर ले गए; मॉर्निंग वॉक पर मारी थी गोली मिर्जापुर में सीनियर वकील राजीव सिंह की हत्या करने वाले 50 हजार के इनामी राजेंद्र सोनकर को पुलिस ने शनिवार रात एनकाउंटर में गिरफ्तार कर लिया। उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिसकर्मी उसे कंधे पर टांगकर गाड़ी तक ले गए, फिर मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसपी अपर्णा रजक कौशिक ने बताया- बरौधा तिराहे पर पुलिस टीम चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान आरोपी बाइक से आया और पुलिस को देखकर भागने लगा। पीछा करने पर उसने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लग गई। पढ़ें पूरी खबर…
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