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    विधानमंडल का विशेष सत्र- भाजपा महिला मंत्रियों को उतारेगी:अखिलेश भी रागिनी सोनकर, नसीम सोलंकी को आगे करेंगे

    4 hours ago

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    महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में गिरने के बाद यूपी सरकार 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुला रही है। इसमें विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का प्लान है। इसके जरिए भाजपा सरकार संदेश देने की कोशिश करेगी कि कांग्रेस और सपा ने महिला विरोधी नीतियों की वजह से बिल पास नहीं होने दिया। वहीं, विपक्ष बिल लाने की टाइमिंग को लेकर भाजपा पर निशाना साधेगा। दरअसल, केंद्र सरकार जब लोकसभा में संशोधन बिल लाई, उस समय तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों में चुनाव प्रचार चल रहा था। विपक्ष का आरोप था कि भाजपा सरकार देश का चुनावी नक्शा बदलना चाहती थी। यह बिल 2029 के चुनावी फायदे को ध्यान में रखकर लाया गया है। कुल मिलाकर यूपी के विशेष सत्र में जोरदार हंगामा होना तय है। इससे पहले जानिए भाजपा ने यूपी में महिला आरक्षण बिल के इर्द-गिर्द किस तरह का माहौल बना रखा है? बिल गिरने के अगले दिन से ही यूपी में विरोध शुरू लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने के तुरंत बाद भाजपा की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। अगले दिन से ही भाजपा ने इस मुद्दे पर सपा और कांग्रेस को घेरने के लिए यूपी में बड़ा अभियान शुरू कर दिया। सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा यादव ने प्रेस कॉन्फेंस की। मुख्यमंत्री आवास से महिलाओं की आक्रोश रैली निकाली गई। रैली की अगुवाई खुद सीएम योगी ने की। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत तमाम बड़े नेता मौजूद थे। महिला विधायकों और मंत्रियों को आगे रखेगी सरकार दोनों सदनों में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत है। इस वजह से प्रस्ताव पारित होना तय माना जा रहा है। निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से महिला विधायकों और मंत्रियों को आगे रखा जाएगा। इस दौरान सपा सरकार में महिलाओं के खिलाफ हुई आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र भी किया जाएगा। इसके अलावा भाजपा पूरे यूपी में विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने के लिए अभियान चला रही है। महिला मोर्चा की कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं से संपर्क कर रही हैं। हर जिले में विरोध प्रदर्शन और पुतला फूंकने का कार्यक्रम किया जा रहा है। विपक्ष के खिलाफ महिला वोट बैंक साधने की कोशिश सीनियर जर्नलिस्ट वीरेंद्रनाथ भट्‌ट मानते हैं- 2017 से 2022 तक भाजपा को यूपी में विधानसभा और लोकसभा चुनाव जिताने में महिलाओं का बड़ा रोल रहा है। योगी सरकार महिलाओं के लिए मिशन शक्ति समेत तमाम स्कीम चला रही है। यह धारणा बन चुकी है कि योगी सरकार में महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हुए हैं। महिलाएं सड़क पर सुरक्षित निकल सकती हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को महिला वोटबैंक की जरूरत है। इस सत्र के जरिए सरकार महिला वोटबैंक साधने की कोशिश कर रही है। योगी सरकार और भाजपा संगठन की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक पहुंचकर बताया जाए कि सपा-कांग्रेस के विरोध की वजह से उनका अधिकार छिन गया। रणनीति बनाने के लिए सपा ने बुलाई बैठक उधर, सपा ने विशेष सत्र में अपनी रणनीति तय करने के लिए 29 अप्रैल को विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहेंगे। सपा की ओर से भी महिला विधायक ही सदन से सड़क तक आगे रहेंगी। इस दौरान हाथरस कांड, उन्नाव रेप केस और IIT-BHU में छात्रा से गैंगरेप जैसे मामले उठाए जा सकते हैं। विशेष सत्र को लेकर सपा विधायक रागिनी सोनकर कहती हैं- यह जनता के खून-पसीने की कमाई का दुरुपयोग है। भाजपा की रैली में जो महिलाएं आई थीं, उन्हें खुद पता नहीं था कि वो क्यों आई हैं? महिलाओं को सड़कों पर उतार रहे हैं। किसी के कपड़े जल रहे हैं, किसी का चेहरा जल रहा। अपने राजनीतिक स्वार्थ में भाजपा महिलाओं का इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस बोली- ये भाजपा का राजनीतिक स्टंट कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा का कहना है- भाजपा की हकीकत महिलाओं के सामने उजागर हो गई है। महिलाएं सच्चाई जान गई हैं। कांग्रेस का विरोध बिना जनगणना परिसीमन कराने पर है। अगर भाजपा महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहती है, तो किसी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बनाती? भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कारण यह राजनीतिक स्टंट खेला है। लेकिन, भाजपा को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। अगर विधानसभा के विशेष सत्र में सत्ता पक्ष की ओर से इस पर राजनीतिक की गई, तो हम इसका विरोध करेंगे। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… मुलायम के 'हल्ला बोल' की राह पर अखिलेश, प्रशासन को बिना बताए पीड़ित के घर पहुंचेगी सपा; चुनाव से पहले पार्टी की नई स्ट्रैटजी यूपी की सियासत में अखिलेश यादव ने नया पैंतरा चला है। अब किसी घटना-दुर्घटना के बाद सपा नेता प्रशासन को बिना बताए पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे। PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पीड़ितों का खासतौर पर ध्यान रखा जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
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