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    वृंदावन में बड़े-बड़े स्पीकर लगे, लाइफ जैकेट नहीं:प्रयागराज-अयोध्या में मनमाना किराया, वाराणसी में भी नियमों की अनदेखी

    4 hours ago

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    वृंदावन नाव हादसे में 13 लोगों की जान चली गई। बड़ा सबक यह कि अगर लोगों ने लाइफ जैकेट पहनी होती, तो जान बच जाती। इस हादसे ने साफ कर दिया कि आस्था के बड़े केंद्रों पर चल रहा नाव कारोबार कहीं सख्ती, कहीं ढिलाई और कहीं अव्यवस्था के बीच झूल रहा। दैनिक भास्कर की टीम ने चारों धर्मनगरी मथुरा, प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी में सुरक्षा मानकों का हाल जाना। हम देखना चाहते थे कि वृंदावन हादसे के बाद क्या कुछ बदला? क्या नाव पर बैठने वाली सवारियों को लाइफ जैकेट दिए जा रहे। सवारी लाइफ जैकेट के साथ बैठ रही हैं या नहीं? तय मानकों का कितना पालन हो रहा? प्रशासन कितना अलर्ट मोड पर है? पढ़िए खास रिपोर्ट… सबसे पहले बात वृंदावन की यमुना के घाटों पर सन्नाटा, हादसे का दिख रहा असर हमारी टीम सबसे पहले वृंदावन पहुंची। हादसे के बाद यहां के यमुना घाटों पर माहौल पूरी तरह बदला नजर आ रहा। जिस नदी में हर रोज पर्यटकों की चहल-पहल और नावों की आवाजाही रहती थी, वहां सन्नाटा पसरा है। रोज फर्राटा भरने वाली सैकड़ों बोट किनारे खड़ी हैं। अधिकतर नाविकों ने खुद ही नावों का संचालन रोक दिया है। हालांकि प्रशासन की ओर से संचालन पर औपचारिक रोक की पुष्टि नहीं है। लेकिन नावें किनारे खड़ी दिख रही हैं। नाविक बोला- लाइफ जैकेट के लिए कभी किसी ने कहा ही नहीं यहां हमारी मुलाकात बाबूलाल नाविक से हुई। बाबूलाल ने बताया- हम पीढ़ियों से नाव चलाते आ रहे हैं। कभी इतना बड़ा हादसा नहीं देखा। यह जीवन में पहली बार है, जब इतना बड़ा हादसा हुआ। बाबूलाल से हमने पूछा- लाइफ जैकेट क्यों नहीं रखते? जवाब दिया- कभी किसी ने कहा ही नहीं। अब प्रशासन कह रहा है, तो रखेंगे। हमने पूछा- नाव क्यों बंद हैं? इस पर बाबूलाल ने कहा- इतना बड़ा हादसा हुआ है, 2 दिन से अधिकतर नाविक बचाव कार्य में लगे हैं। इसके अलावा मन भी दुखी है, जिसकी वजह से हम खुद से नाव नहीं चला रहे। दो दिन नहीं चलाएंगे, तो कुछ नहीं होगा। बाबूलाल से जब यह पूछा कि क्या प्रशासन ने नावों का संचालन रोका है, तो उन्होंने कहा ऐसा नहीं है। केशीघाट पर खड़ी नावों में बैठे दिखे पर्यटक हादसे वाली जगह से करीब 100 मीटर दूर स्थित केशीघाट पर हमें सैकड़ों बोट खड़ी दिखीं। यहां कुछ पर्यटक खड़ी बोट में ही बैठकर फोटो लेते नजर आए। हमने जब तस्वीरें लीं, तो वह लोग बोट से उतर आए। यहां खड़ी बोटों में से अधिकतर में बड़े-बड़े स्पीकर तो लगे थे, लेकिन किसी में भी लाइफ जैकेट नहीं थी। 25 से 30 क्षमता, जुगाड़ से बनाई डबल डेकर केशीघाट पर खड़ी बोट में यात्रियों को बैठाने की क्षमता 25 से 30 दिखी। यहां कुछ बोट वालों ने जुगाड़ से सीढ़ी लगाकर उसे डबल डेकर बना रखा है। अब प्रयागराज की बात बोट में लाइफ जैकेट नहीं, मनमानी वसूली वृंदावन हादसे के बाद प्रयागराज में सुरक्षा मानकों का कुछ हद तक पालन हो रहा है। लेकिन, श्रद्धालुओं से मनमाने किराए पर रोक नहीं है। संगम तट पर दूर-दराज से आने वाले तमाम श्रद्धालु इस समस्या से घिरे दिखे। किला घाट से संगम तक का किराया 60 रुपए निर्धारित है। इशके बावजूद यहां एक-एक यात्री से 500-1000 तक वसूली होती दिखी। पूरी नाव बुक कराने के एवज में 4000 से 5000 रुपए तक मांगे जा रहे हैं। किला घाट से संगम तक 1500 रुपए सवारी मांग रहे किला घाट पर हमें गुजरात से आए राजेंद्र सिंह गोहिल मिले। राजेंद्र सिंह ने बताया- हम चार लोग जामनगर से आए हैं। नाविक ने हर व्यक्ति से 1500 रुपए संगम तक जाने के लिए मांगे। दूसरे नाविक से बात की तो उसने भी 5000 से कम न लेने के लिए बोल दिया। यहां किससे शिकायत करें, कुछ पता नहीं। घाट के आसपास कोई बोर्ड या नंबर भी नहीं लिखा है, जिससे जल पुलिस से संपर्क किया जा सके। वहीं, किराए को लेकर जल पुलिस प्रभारी रविंद्रनाथ गौड़ गोल-मोल जवाब देते रहे। दावा करते रहे कि इस तरह की कोई शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाती है। यह भी दावा किया कि जल पुलिस की टीम लेकर वह लगातार घाटों पर घूमते रहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि मौके पर जल पुलिस के मोबाइल नंबर संबंधी कोई बोर्ड क्यों नहीं लगवाया गया, तो कोई जवाब नहीं दे पाए। दावा- लाइफ जैकेट का हो रहा सख्ती से पालन प्रयागराज में महाकुंभ से ही नावों पर लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। इस व्यवस्था का पालन माघ मेले में भी किया गया और वर्तमान में भी लगातार जारी है। संगम तट पर हमने देखा कि बड़ी नाव पर बैठने वाले सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाई जा रही। सवारियों को बैठाने की तय संख्या का पालन भी हो रहा है। प्रयागराज जल पुलिस प्रभारी रविंद्र नाथ गौड़ का कहना है- समय-समय पर लाइफ जैकेट की जांच की जाती है। इसके लिए गोताखोर को लाइफ जैकेट पहनाकर नदी में उतारा जाता है। यह देखा जाता है कि वह सुरक्षित तैर रहा है या नहीं। फिलहाल किसी विशेष ब्रांड को निर्धारित नहीं किया गया है। ओवरलोडिंग न होने के लिए भी निगरानी की जाती है। अब अयोध्या की बात जल पुलिस करा रही अनाउंसमेंट वृंदावन नाव हादसे के बाद अयोध्या में सरयू घाटों पर सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। सरयू नदी में नौका विहार करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में हैं। लाइफ जैकेट अनिवार्य करने से लेकर ओवरलोडिंग पर रोक और सुरक्षा उपकरणों की जांच तक, हर स्तर पर निगरानी तेज है। नावों पर लाइफ जैकेट और सुरक्षा मानकों को लेकर जल पुलिस की ओर से अनाउंसमेंट भी कराया जा रहा है। क्षमता से ज्यादा सवारियां नहीं बैठाने के निर्देश हैं। जल पुलिस प्रभारी रुबे प्रताप मौर्य का कहना है श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी नाव संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी यात्री को नाव में न बैठाएं। निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी न लें। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब वाराणसी की बात कुछ नाव पर बिना लाइफ जैकेट यात्रा कर रहे लाइफ जैकेट पहनने से मना किया, नाविक बोला- पहनना जरूरी वाराणसी के गंगा घाट पर एक नाव में यात्री बैठ रहे थे। हम भी यात्री बनाकर उस नाव में बैठ गए। सभी पर्यटकों को लाइफ जैकेट दिया गया, लेकिन कुछ पर्यटक उसे पहनने से इनकार कर दिया। हालांकि नाविकों ने पुलिस चेकिंग का हवाला देते हुए कहा कि इसे पहनना जरूरी है। इस पर कुछ यात्रियों ने शिकायत की कि जैकेट मानक के अनुसार नहीं है। बटन खराब हैं। इस पर नाविक ने उन्हें दूसरी लाइफ जैकेट दे दी। हम जिस नाव में बैठे थे, उसमें यात्रियों के बैठने की क्षमता 80 थी, लेकिन 50 सवारी बैठाने के बाद नाविक नमो घाट के लिए निकल पड़ा। इस सफर के दौरान हमारी नजर कई छोटी मोटर बोट पर पड़ी, जिस पर विदेशी पर्यटक बैठे थे। लेकिन, वो लाइफ जैकेट नहीं पहने थे। वहीं कुछ नाव ऐसी भी थीं जिनमें 50 प्रतिशत लोग लाइफ जैकेट का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। सभी को लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य काशी के ACP अतुल अंजान ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्थाएं सख्त की जा रही हैं। देखा गया है कि कुछ श्रद्धालु फोटो खिंचाने के चक्कर में लाइफ जैकेट निकाल देते हैं। इस पर सख्त निगरानी की जा रही है। सभी को लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य है। गहरे पानी वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। गंगा में 3 टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। नियम तोड़ने वाले नाविकों पर कार्रवाई होगी। साथ ही ट्रैफिक कंट्रोल के लिए 3 किमी बैरिकेडिंग की जाएगी। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… वृंदावन नाव हादसा-13 मौतों के ये 4 जिम्मेदार, नाव मालिक और ठेकेदार को जेल भेजा, अफसरों ने खुद को बचा लिया वृंदावन में पांटून पुल से टकराकर नाव पलट गई। अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, 3 अब भी लापता हैं। 15 मिनट पहले का जो वीडियो मिला, उसमें सभी हंसते-मुस्कुराते दिख रहे हैं लेकिन, कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। जिस घाट पर हादसा हुआ, वहां दुनियाभर से कृष्ण भक्त आते हैं। 25-30 फीट गहरी यमुना में नाव मालिक बिना लाइफ जैकेट पहनाए 37 लोगों को बोटिंग करा रहा था। पढ़ें पूरी खबर
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