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    तीन साल पुरानी है स्मार्ट मीटर की खामियां:2023 में ऊर्जा मंत्रालय की जांच में उजागर हुई थी कमियां आज भी नहीं कर पाए दूर

    1 hour ago

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    उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। स्मार्ट मीटर को लेकर उनकी कई शिकायतें भी हैं। फिर भी विभाग जबरन लोगों के घर स्मार्ट मीटर लगा रहा था। स्मार्ट मीटर की खामियां तीन साल पुरानी हैं। 2023 में ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई थी। वो खामियां आज भी दूर नहीं हो पाया। उपभोक्ता परिषद ने बताया कि वर्ष 2023 में एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज की ओर से प्रदेश में 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाए थे। इस पर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद भारत सरकार के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय जांच टीम भेजी गई। इस टीम ने प्रदेश के अलग–अलग वितरण कंपनियों में जाकर स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली, बिलिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं के अनुभव को समझा था। उसने स्मार्ट मीटर की तकनीकी कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया था। उस कमेटी की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर की गई थी। भारत सरकार की ओर से प्रबंध निदेशक पावर कारपोरेशन को 25 दिसंबर 2023 को इस रिपोर्ट की पूरी प्रति भेजी गई थी। साथ ही निर्देश दिए गए थे कि वो स्मार्ट मीटर की खामियों को पहले दूर कर लें, फिर उसे आम लोगों के घरों में लगाए। खामियों को दूर करने की कोई कोशिश नहीं की गई उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 में भारत सरकार की ओर से बताई गई खामियों को आज भी पावर कारपोरेशन दूर नहीं कर पाया। उस समय की जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि एक प्रीपेड उपभोक्ता का कनेक्शन रिचार्ज कराने के बाद भी तीन दिन तक नहीं जुड़ पाया था। ये खामियां बताई थी, जो आज भी बनी हुई है स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी मैनुअल काम क्यों ऊर्जा मंत्रालय ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी यदि मैनुअल हस्तक्षेप करना पड़े तो इसका क्या फायदा? वर्तमान में स्मार्ट मीटर में ऐसी ही खामियां सामने आ रही है। इससे साफ है कि बिजली विभाग ने तीन साल पुराने ऊर्जा मंत्रालय की जांच रिपोर्ट से कोई सबक नहीं सीखा। बिना खामियों को दूर किए वह जबरन लोगों पर स्मार्ट मीटर थोपना चाहते हैं।
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