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    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन तेज:सोनभद्र में मशाल जुलूस निकाला, सरकार से आरटीई एक्ट संशोधन की मांग

    2 hours ago

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    अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में चल रहा आंदोलन अब तेज हो गया है। सोमवार को आंदोलन के दूसरे चरण में जनपद सोनभद्र में शिक्षकों ने एक विशाल मशाल जुलूस निकाला। इस जुलूस में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। यह जुलूस रॉबर्ट्सगंज के नेहरू पार्क से शुरू होकर बढ़ौली चौराहे तक पहुंचा, जहां एक सभा के साथ समाप्त हुआ। मशाल जुलूस के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्ष 2001 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उनका तर्क है कि टीईटी की व्यवस्था वर्ष 2011 में लागू की गई थी, ऐसे में उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस दायरे में लाना न्यायसंगत नहीं है। महासंघ के जिला संयोजक और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री योगेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय व्यावहारिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि आरटीई एक्ट में संशोधन कर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए। जिला अध्यक्ष राजकुमार मौर्य ने भी अपने संबोधन में कहा कि किसी भी प्रक्रिया के बीच में नियम बदलना न्यायसंगत नहीं होता। उन्होंने जोर दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की निर्धारित योग्यताओं के आधार पर हुई थी, उनसे वर्षों बाद नई योग्यता की अपेक्षा करना गलत है। इससे शिक्षकों में व्यापक असंतोष है। शिक्षकों ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में देशभर के लाखों शिक्षकों द्वारा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विरोध दर्ज कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के चलते अब आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो तीसरे चरण में देशभर की राज्य राजधानियों में बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षकों को न्याय नहीं मिल जाता।
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