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    शराब नीति मामला- केजरीवाल हाईकोर्ट में पक्ष रखा:जस्टिस स्वर्ण कांता को केस से अलग करने की मांग; निष्पक्षता पर सवाल उठाए

    15 hours ago

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    दिल्ली शराब घोटाला मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी पैरवी कर रहे हैं। यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है। रविवार को केजरीवाल और अन्य 22 पूर्व आरोपियों ने इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग (रिक्यूज) करने की मांग की थी। आरोपियों ने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की अपील की थी। हालांकि इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि रिक्यूजल का निर्णय संबंधित जज ही लेता है। रिक्यूजल का मतलब होता है कि कोई जज संभावित हितों के टकराव, पक्षपात या निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर ले। कोर्ट रूम लाइव… केजरीवाल: मैंने रिक्यूजल की अर्जी फाइल की है। इसे रिकार्ड में लिया जाए। SGI तुषार मेहता: सर (केजरीवाल) कोर्ट की एक मर्यादा और एक डेकोरम होता है। यह मेरी याचिका है। SGI- पिछली बार SLP और रिक्यूजल से जुड़ी रिट याचिका पर मैंने कहा था कि इसे आपत्ति के साथ रखा जाएगा और हटाया नहीं जाएगा। हमें रिक्यूजल की मांग वाली 7 अर्जियां मिली हैं, जो गंभीर मामला है। कुछ लोग आरोप लगाकर इसे करियर बना लेते हैं। कोर्ट पर आरोप लगाए जा रहे हैं और हम कोर्ट के समर्थन में रहेंगे। मुझे उनके खुद पेश होने से आपत्ति नहीं, लेकिन उनका वकील भी है—ऐसे में सिर्फ वही पेश हों। अगर कोई और शामिल होना चाहता है, तो उसे एक हफ्ते में आवेदन करना होगा और फिर सभी एक साथ पेश होंगे। 1-2 को छोड़कर किसी ने जवाब दाखिल नहीं किया। अगर रिक्यूजल अर्जियां खारिज हुईं, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। केजरीवाल: मैंने HC की प्रक्रिया के अनुसार ही खुद को अलग करने की अर्जी दाखिल की है। याचिकाकर्ता को, जब वह खुद पेश हो रहा हो तो ई-फाइलिंग करने की अनुमति नहीं होती है। जज साहब, आप इसे रिकॉर्ड पर ले सकती हैं। बेंच: मैं इस पर नोटिस जारी करूंगी। SGI: यह अर्जी बेतुकी और परेशान करने वाली है। बेंच: क्या आप अपने केस की बहस खुद ही करेंगे? केजरीवाल: मैं इस अर्जी पर बहस खुद ही करूंगा। बेंच: अगर कोई जवाब दाखिल करना चाहता है, तो कर सकता है। इसकी एडवांस कॉपी भी दी जाए। दोनों पक्ष अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं। अगर कोई और भी खुद को अलग करने की याचिका दाखिल करना चाहता है, तो ऐसा कर ले, ताकि मैं इस मामले पर एक ही बार में अंतिम फैसला दे सकूं। कोर्ट: हम इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेंगे। SGI: यह बहुत गंभीर मामला है, जो इस देश की राजधानी में हुआ है। (इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल की दोहपर 2.30 के लिए तय की) ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट तक जज बदलने की मांग कर चुके इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग की और कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ टिप्पणी करने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी। हालांकि, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पहले ही केजरीवाल की यह मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खुद जज ही तय करेंगे कि उन्हें सुनवाई से अलग होना है या नहीं। इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। बरी होने पर केजरीवाल ने कहा था- मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई 27 फरवरी को बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं। वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें… मुख्यमंत्री रहते हुए कोर्ट में पैरवी कर चुकीं ममता बनर्जी पूर्व CM केजरीवाल कोर्ट में दलीलें रखने वाले हैं। लेकिन उनसे पहले सुप्रीम कोर्ट में 4 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में बंगाल सीएम बनर्जी ने अदालत में करीब 13 मिनट तक दलीलें पेश की थीं। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर सीएम के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… केजरीवाल बोले- कोर्ट का फैसला भाजपा के मुंह पर तमाचा:हमें खत्म करने के लिए मोदी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे आम आदमी पार्टी(AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शराब घोटाले में कोर्ट का फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर 1 मार्च को एक रैली में कहा कि AAP को खत्म करने के लिए मोदी जी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने मोदी और शाह पर 4 साल तक परेशान करने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…
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