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    संजय निषाद ने 160 सीटों को साधने का बनाया प्लान:यूपी इलेक्शन से पहले केवट-मल्लाहों को साधेंगे, क्या SC में शामिल हो पाएंगे?

    3 hours ago

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    निषाद पार्टी गोरखपुर से अपनी चुनावी रैली का शंखनाद करने जा रही है। इसके बाद 3 और मेगा रैलियां होंगी। पार्टी यूपी की 160 केवट-मल्लाह बहुल सीटों को साधना चाहती है। रैलियों में पार्टी 4 बड़ी मांगे उठाएगी। सबसे अहम केवट-मल्लाह को OBC से अनुसूचित जाति में शामिल करने का माहौल बनाएगी। निषाद पार्टी 4 रैलियों के जरिए क्या सियासी संदेश देना चाहती है? केवट-मल्लाह को OBC से SC में दर्ज कराना क्या आसान है? यूपी में निषाद कितने प्रभावी है? इस रिपोर्ट में पढ़िए… रैली वाले चारों स्थान क्यों अहम, ये जानिए गोरखपुर. निषाद पार्टी की स्थापना यहीं हुई। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद इसी जिले के रहने वाले हैं। निषाद पार्टी को पहली सियासी सफलता 2018 के उपलोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट से मिली थी। ये सीट योगी आदित्यनाथ के सीएम चुने जाने के बाद खाली हुई थी। प्रयागराज का श्रृंगवेरपुर : गंगा-यमुना का संगम है। यहीं पर भगवान राम और उनके सखा निषाद राज की भव्य मूर्ति लगी है। श्रृंगवेरपुर में सरकार ने 100 एकड़ में निषाद राज पार्क भी बनवा रखा है। गंगा-यमुना बेल्ट में केवट-मल्लाह की सबसे बड़ी आबादी रहती है। वाराणसी : पीएम नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां की रैली में उमड़ी भीड़ का राजनीतिक संदेश दूर तक जाएगा। वाराणसी और आसपास के जिलों में भी केवट-मल्लाह की बड़ी आबादी रहती है। मेरठ : दिल्ली एनसीआर से लेकर गंगा की इस बेल्ट में कश्यप समाज बड़ी संख्या में रहते हैं। मेरठ के पास ही हस्तिनापुर भी है। इस बेल्ट में ताकत दिखाकर निषाद पार्टी का विस्तार करने की मंशा रखती है। क्या है निषाद पार्टी की 4 बड़ी मांगें 1. निषाद को OBC की बजाए SC में शामिल कराना : पार्टी के गठन का आधार ही यही था। सपा के साथ गठबंधन के समय भी निषाद पार्टी इसी मांग के साथ जुड़ी थी। फिर भाजपा के साथ गठबंधन भी इसी शर्त पर हुआ था। बीच में निषाद पार्टी ने गठबंधन में रहते हुए नारा दिया था कि ‘आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं’ और ‘मझवार आरक्षण लागू करो’। OBC से 9% आरक्षण कम करके इसे SC में जोड़ा जाए। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद कहते हैं- यूपी में चारों रैली के जरिए मैं निषाद-केवट-मल्लाहों को बताना चाहता हूं कि आपका हक ऊंची जाति के लोग नहीं खा रहे हैं। बल्कि आपका हिस्सा लेदरमैन (दलित) और मिल्कमैन (यादव) खा रहे हैं। संजय निषाद आगे कहते हैं- रैली के जरिए हम अपने समाज को बताएंगे कि 22 मई से देश में जनगणना शुरू हो रही है। इस बार जातिगत जनगणना भी होगी। पहला काम ये करना है कि अपने परिवार का नाम OBC से खारिज कराकर जनगणना रजिस्टर में 12 नंबर बिंदु पर SC (मझवार) में दर्ज करवाना होगा। 2. ताल-घाट, बालू के ठेके पर मिले पहला हक : निषाद पार्टी के मुताबिक उनकी कौम अंग्रेजों से लड़ी थी। इसके चलते उनकी पुश्तैनी जमीनें छीन ली गई थीं। हमारा समाज नदी के किनारे रहता है। ऐसे में पहली प्राथमिकता पर बालू के ठेके भी मिलने चाहिए, सरकार चाहे तो रॉयल्टी ले ले। 3. जमीन पर मिले हक : संजय निषाद कहते हैं कि पहले गांव के ताल-घाट वर्ग-3 में दर्ज होते थे। इस पर मालिकाना हक निषाद समाज के लोगों का होता था। लेकिन 2007 में जब यूपी में बसपा सरकार बनी, तो ये मालिकाना हक छीन लिया गया। हमने कोर्ट से इस नियम को निरस्त कराया। मायावती के शासन में स्टे भी लिया था, जिसे हमने खारिज करा दिया है। 4. विमुक्ति जनजाति वाली मिले सुविधाएं : केवट-मल्लाह आदि जातियों को भारत सरकार ने विमुक्ति जनजाति घोषित कर रखा है। इन्हें 74 प्रकार की सुविधाएं देकर समाज के मुख्यधारा से जोड़ना था। लेकिन 2013 में सपा सरकार ने ये अधिकार भी छीन लिया। संजय निषाद कहते हैं- “सपा ने शिक्षा छीन ली। रोजी-रोटी बसपा ने छीन ली। जब तक ऐसे दल के नेताओं को गांव में घुसने दोगे, तब तक अपना हिस्सा नहीं पाओगे। इन्हें भगाओगे, तभी इनको गलती का अहसास होगा। मैं जब भी सदन में इस पर बोलता हूं तो ये दोनों पार्टियों के नेता हमारी आवाज दबाने का प्रयास करते हैं।” 4 रैलियों के जरिए क्या साधना चाहती है निषाद पार्टी निषाद पार्टी यूपी में 4 रैलियों से अपनी ताकत दिखाने में कितना सफल होगी, ये हमने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद और दो राजनीतिक एक्सपर्ट से समझा… डॉ. संजय निषाद कहते हैं- रैली से हम अपने समाज को जागरुक और संगठित करना चाहते हैं। सभी रैलियों में पार्टी ने विधानसभा के 100-100 लोगों को बुलाया है। साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों जैसे सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर, अपना दल (एस) के आशीष पटेल को भी इन रैलियों में आमंत्रित किया है। मैंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें भी 22 मार्च की रैली में आमंत्रित किया है। 23 मार्च को निषाद राज जयंती पर निषाद पार्टी ने छुट्‌टी घोषित करने की भी मांग की है। भगवान राम का जन्म नवमीं तो उनसे चार दिन के बड़े निषादराज का जन्म पंचमी को हुआ था। मतलब साफ है कि राजनीतिक जमावड़ा करके संजय निषाद अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। एक्सपर्ट व्यू वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- यूपी के पूर्वी छोर से दिल्ली एनसीआर तक अलग-अलग उप जातियों में निषाद समाज का अच्छा प्रभाव है। पिछले दो दशक में ये समाज काफी जागरुक हुआ है। सपा ने अपने शासन के आखिरी समय में OBC की 17 जातियों को दलित में शामिल करने का ऐलान कर दिया था। निषाद समाज लंबे से खुद को एससी में शामिल कराने की मांग कर रही है। अभी यूपी चुनाव में एक साल का वक्त है, लेकिन निषाद पार्टी अभी से अपनी जमीन तैयार करने में जुट गई है। निषाद पार्टी अभी सत्ताधारी एनडीए के साथ है। एससी में निषाद समाज को शामिल कराने के लिए पूर्व में संजय निषाद तेवर भी दिखा चुके हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से वे काफी संतुलित नजर आ रहे हैं। रैलियों का मतलब प्रेशर पॉलिटिक्स हालांकि पूर्वांचल से आने वाले वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही इन आयोजनों को लेकर सवाल खड़े करते हैं। वे तल्खी से पूछते हैं कि संजय निषाद को बताना चाहिए- उन्हें अपने समाज को इन रैलियों में ये बताना चाहिए। सत्ता में बैठकर प्रेशर पॉलिटिक्स के अलावा मुझे इन रैलियों के पीछे और कुछ नहीं दिख रहा है। इस बार जातिगत जनगणना से तय हो जाएगा कि किस समाज की कितनी संख्या है। इसके बाद तय होगा कि उस अमुक समाज का दरोगा कौन होगा? केवट-मल्लाह को OBC से SC में दर्ज कराना क्या आसान है? संविधान में 4 ही जातियां सामान्य, एससी, एसटी व ओबीसी दर्ज हैं। संविधान की सूची नंबर 53 पर ये समाज मझवार नाम से एससी में दर्ज हैं। केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप, धीमर, तुरैहा, मझवार, धीमर, मांझी, रायकवार, बाथम, कहार, गोड़िया, गंगोता, गंगई, बेलदार इसकी उप जातियां हैं। सेंसेस मैनुअल 1961 में भी केवट, मल्लाह, मांझी की गणना मझवार एससी में की गई थी, जैसे मोची को एससी में गिना जाता है। 2022 में सीएम योगी ने एक पत्र भारत के महापंजीयक लिखा था कि निषाद ओबीसी हैं या एससी। इसके जवाब में बताया गया था कि सेंसेस मैनुअल में ये एससी कैटेगरी में दर्ज हैं। नोडल विभाग से सामाजिक न्याय मंत्रालय को निर्णय लेकर निर्देश जारी करना है। इसी आधार पर जातिगत जनगणना में समाज के लोग अपना नाम जाति के कालम में मझवार दर्ज करा सकते हैं। मझवार सर्टिफिकेट के आधार पर ही 2014 में भाजपा के टिकट पर रामचरित्र निषाद दिल्ली से आकर मछलीशहर सुरक्षित संसदीय सीट से सांसद चुने गए थे। मतलब साफ है कि कई राज्यों में निषाद समाज एससी में शामिल हैं। अब अधिकारी की बात जनगणना कार्य की डायरेक्टर शीतल वर्मा कहती हैं- इसमें सरनेम के बजाय स्व-घोषित जाति को प्रमुखता दी जा सकती है। हालांकि बताए गए जाति के आधार पर आरक्षण का लाभ तभी मिलेगा, जब संबंधित तहसीलदार उस वर्ग का प्रमाण पत्र जारी करे। यूपी में निषाद कितने प्रभावी? ……………. ये पढ़ें - गंगा में इफ्तार- धर्मगुरु खिलाफ, सपा-कांग्रेस क्यों सपोर्ट में:एक्सपर्ट बोले- मुस्लिम वोटबैंक की चिंता; मौलाना ने कहा- हड्डियां फेंकना गलत वाराणसी में 14 लड़कों ने गंगा नदी में नाव पर रोजा इफ्तार पार्टी की। इसकी रील बनाई। फिर सोशल मीडिया में शेयर कर दिया। इसमें वो बिरयानी खाते दिख रहे हैं। भाजपा युवा मोर्चा की शिकायत पर सभी 14 लड़कों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके साथ ही इस मामले में सियासत शुरू हो गई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और इमरान प्रतापगढ़ी ने मुस्लिम लड़कों का सपोर्ट किया। वाराणसी पुलिस के एक्शन पर सवाल उठा दिए। पढ़िए पूरी खबर…
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