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    संजय निषाद बोले- हारी हुई सीटें दें भाजपा:प्रयागराज में बोले- 40 साल से जहां कम वोटों से हार रहे, वहां निषाद पार्टी को मौका दें

    53 minutes ago

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    निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे पर अपनी पार्टी का दावा सामने रखा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा से सिर्फ सीटें मांगने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि ऐसी सीटों पर जीत दिलाने की क्षमता रखती है, जहां भाजपा लंबे समय से कम वोटों के अंतर से हारती रही है। संजय निषाद ने कहा कि जिन सीटों पर निषाद समाज की संख्या अधिक है और भाजपा करीब 40 साल से जीत नहीं पाई है, ऐसी सीटें निषाद पार्टी को दी जानी चाहिए। संजय निषाद ने कहा, हम तो एक ही बात कहेंगे कि जहां कम, वहां हम। अगर भाजपा किसी सीट पर कम वोटों से हार रही है तो सहयोगी दल उस कमी को पूरा कर जीत में बदलने का प्रयास कर सकते हैं। जहां हार रहे हैं, वह सीटें हमें दें संजय निषाद ने कहा कि पिछली बार भाजपा ने निषाद पार्टी को 16 सीटें दी थीं, जिनमें 11 सीटों पर जीत मिली। उन्होंने इसी आधार पर आगे भी ऐसी सीटों पर मौका देने की मांग की है, जहां निषाद समाज की संख्या ज्यादा है और भाजपा लंबे समय से चुनाव हार रही है। उन्होंने कहा कि हारी हुई सीटें सहयोगी दलों को देने में कोई नुकसान नहीं है। इससे सहयोगी दलों की संख्या भी बढ़ेगी और उन सीटों को जीत में बदलने की कोशिश की जा सकेगी। तावड़े से मुलाकात पर बोले- राजनीतिक चर्चा नहीं हुई भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि उनके बीच राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर चाय पर आने का निमंत्रण दिया था और इसी क्रम में वह उनके घर आए। मुलाकात में सामाजिक विषयों पर चर्चा हुई। राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से बातचीत के लिए दिल्ली और लखनऊ में समय लेकर बैठक करने की बात हुई है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को उन्होंने उठाया, उन्हें लिखकर भी दिया गया और तावड़े ने उसे नोट किया। निषाद पार्टी प्रत्याशी मांगने वाली नहीं, जीत देने वाली सीट बंटवारे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी को केवल सीट मांगने वाली पार्टी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश उन सीटों पर जीत दिलाने की है, जहां भाजपा लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी सीट पर भाजपा कम वोटों से हार रही है और वहां निषाद समाज की संख्या पर्याप्त है, तो उस सीट पर निषाद पार्टी को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाना चाहिए। अब जातियां पहले की तरह धोखा नहीं खाएंगी संजय निषाद ने निषाद समेत विभिन्न जातीय समूहों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जातियां राजनीतिक रूप से निष्क्रिय रहीं, लेकिन अब वे अपने हितों को लेकर ज्यादा जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव के दौरान अलग-अलग तरीकों से वोट हासिल किए जाते थे, लेकिन अब इन समुदायों ने अपनी राजनीतिक पार्टियां बनानी शुरू कर दी हैं। कहा कि समाज अब अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी को लेकर सवाल कर रहा है। निषादों को एससी में शामिल करने की मांग निषाद समाज के आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि वह चाहते हैं कि निषादों को ओबीसी की सूची से हटाकर अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाए और उन्हें संबंधित प्रमाणपत्र जारी किया जाए। जिन जातियों को नौकरियों और अवसरों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, उन्हें अवसर दिया जाना चाहिए। सरकारी नौकरियों के आंकड़ों को लेकर भी दावा संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरियों में विभिन्न राजनीतिक दलों के शासनकाल के दौरान जातीय हिस्सेदारी को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 28 लाख नौकरियों के आंकड़े के संदर्भ में अलग-अलग समुदायों के कब्जे की बात सामने आती है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान कुछ प्रभावशाली जातीय समूहों को सरकारी नौकरियों में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला। जातीय विवाद पर बोले- संघर्ष नहीं होना चाहिए संत कबीर नगर में सपा सांसद की गाड़ी पर हुए हमले के मामले में कहा, उन्होंने डीएम से शिकायत की और सांसद से भी फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में जातीय संघर्ष नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी जनप्रतिनिधि के साथ कोई घटना होती है और वह विसर्जन या किसी कार्यक्रम में जाता है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं से सरकार की छवि भी प्रभावित होती है। नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात पर सफाई विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि वह बीमार थे और अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने उनका हालचाल लिया। कहा कि वह उनके परिचित और प्रमुख राजनीतिक नेता हैं। किसी के बीमार होने पर उसका हालचाल लेना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। सीटों की संख्या पर बोले- अभी गोपनीय मामला यह पूछे जाने पर कि निषाद पार्टी कितनी हारी हुई सीटों पर दावा कर रही है, संजय निषाद ने स्पष्ट संख्या बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा दोनों दलों के बीच चर्चा से तय होने वाला गोपनीय विषय है। उन्होंने कहा कि सीट तय करते समय यह देखा जाता है कि संबंधित सीट पर हार का अंतर कितना था, वहां निषाद समाज की संख्या कितनी है और संगठन कितना मजबूत है। रंग बदलना, नाम बदलना ही नुकसान पहुंचाता है हाल ही में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नीला गमछा पहनने के सवाल पर बोले, यही गलती उन्हें डुबा रही है। यही उनके सलाहकार हैं। राजनीतिक दलों को अपनी विचारधारा और अपने काम का प्रचार करना चाहिए। रंग बदलना, नाम बदलना, यही बदलाव नुकसान पहुंचाता है।
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