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    सीएसजेएमयू में 'परशुराम से राम तक' पर सारस्वत उद्बोधन:डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी ने अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती पर किया संबोधित

    10 hours ago

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    कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर एक सारस्वत उद्बोधन आयोजित किया गया। शनिवार शाम को हुए इस कार्यक्रम का विषय 'परशुराम से राम तक' था। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रीधाम वृंदावन से आए विद्वान डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी मुख्य वक्ता थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान परशुराम का अवतार तत्कालीन सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हुआ था। डॉ. त्रिपाठी ने परशुराम और राम के जीवन चरित्र की दार्शनिक व्याख्या करते हुए इसे केवल दो अवतारों की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय चेतना के विकास की यात्रा बताया। डॉ. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि परशुराम केवल शक्ति और क्रोध के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे 'शास्त्र' (ज्ञान) और 'शस्त्र' (शक्ति) के संतुलन के आदर्श हैं। उन्होंने रामायण के सीता स्वयंवर प्रसंग का जिक्र किया, जहां भगवान शिव का धनुष टूटने के बाद परशुराम का आगमन एक युग परिवर्तन का संकेत था। उन्होंने आगे बताया कि जब परशुराम ने अपना वैष्णव धनुष भगवान राम को सौंपा, तो वह धर्म की रक्षा के दायित्व का हस्तांतरण था। यह प्रसंग दर्शाता है कि वास्तविक शक्ति मर्यादा और संयम में निहित होती है। वर्तमान समाज पर टिप्पणी करते हुए डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि समय के साथ समाज में तप, धर्म, विद्या और अब धन को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में युवाओं को परशुराम के तेज और राम की मर्यादा को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनमें सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का संचार करना है। इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा, वित्त अधिकारी अशोक त्रिपाठी और प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी सहित कई शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।
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