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    रायबरेली में महिला पदयात्रा निकली:नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कांग्रेस को घेरा, पोस्टर पर लिखा- "महिलाओं के अधिकार पर वार, कांग्रेस है जिम्मेदार"

    3 hours ago

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    रायबरेली में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान के नेतृत्व में 'महिला पदयात्रा' निकाली गई। इस पदयात्रा के माध्यम से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में लाया गया। पदयात्रा के दौरान लगाए गए पोस्टरों और नारों में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, पर सीधा हमला किया गया। पोस्टरों पर लिखा था, "महिलाओं के अधिकार पर वार, कांग्रेस है जिम्मेदार", जो दर्शाता है कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे को अब जनता के बीच ले जा रहा है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वर्ष 2023 एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जब 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' संसद में पेश किया गया। यह विधेयक करोड़ों महिलाओं के उस सपने की शुरुआत था, जो दशकों से नीति-निर्धारण में अपनी हिस्सेदारी का इंतजार कर रही थीं। जहां सरकार इसे अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम बता रही है, वहीं संसद में हुई बहस ने कई सवाल भी खड़े किए। चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी सहित कई क्षेत्रीय दलों ने 'कोटे के भीतर कोटे' और धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाई थी। आधी आबादी का मौलिक अधिकार माना जा रहा महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त पहलू यह है कि आरक्षण को अब किसी 'उपकार' के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसे समाज की आधी आबादी का मौलिक अधिकार माना जा रहा है, जिसका नेतृत्व राष्ट्र के समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। पंचायती राज व्यवस्था इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां लाखों महिलाएं जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और बीडीसी सदस्य के रूप में शासन की कमान संभाल रही हैं। पंचायतों की इसी सफलता को अब विधानसभा और लोकसभा तक ले जाने का संकल्प लिया गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस वैचारिक लड़ाई को 'गांव-गांव' तक ले जाने की रणनीति बनाई है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को यह समझाना है कि उनके अधिकारों का रक्षक कौन है और कौन केवल राजनीतिक लाभ देख रहा है। सरकार 2029 के चुनावों तक 33% आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध दिख रही है।
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