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    रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नियुक्तियों पर उठे सवाल:समाजवादी छात्र सभा का जोरदार प्रदर्शन, वीसी की अनुपस्थिति में छात्र धरने पर बैठे, जांच की मांग

    2 hours ago

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    महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली, आरक्षण नियमों की अनदेखी और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे हैं। इन मुद्दों को लेकर समाजवादी छात्र सभा ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जब कुलपति (वीसी) प्रोफेसर केपी सिंह छात्रों से मिलने नहीं आए, तो आक्रोशित छात्र वहीं धरने पर बैठ गए। नियुक्तियों में धांधली और UGC मानकों की अनदेखी छात्र सभा का आरोप है कि नियुक्तियों में UGC Regulation 2018 की धज्जियां उड़ाई गई हैं। सपा छात्र सभा के अध्यक्ष अविनाश मिश्रा ने बताया कि एसोसिएट प्रोफेसर के लिए 8 साल और प्रोफेसर के लिए 10 साल का अनुभव अनिवार्य है, जो केवल UGC वेतनमान में होना चाहिए। आरोप है कि कई अभ्यर्थियों ने निजी संस्थानों के संदिग्ध अनुभव प्रमाण पत्र लगाए हैं। छात्रों ने मांग की है कि सभी नवनियुक्त शिक्षकों के Form-16/16A और वेतन संबंधी दस्तावेजों की सार्वजनिक जांच की जाए ताकि फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने आ सके। आरक्षण और रोस्टर उल्लंघन का मुद्दा प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर 100-पॉइंट रोस्टर प्रणाली के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि SC, ST, OBC और EWS वर्गों के हक को मारकर चहेतों को नियुक्तियां दी गई हैं। एक विशेष वर्ग के अभ्यर्थियों की अधिक संख्या में भर्ती होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों ने मांग की है कि रोस्टर सूची को तत्काल सार्वजनिक किया जाए। छात्रावासों की बदहाली और छात्र समस्याएं सिर्फ नियुक्तियां ही नहीं, विश्वविद्यालय की आंतरिक व्यवस्थाओं पर भी छात्र उग्र दिखे। अरावली समेत अन्य छात्रावासों में पीने के साफ पानी (RO), बिजली के लिए जनरेटर की अनुपलब्धता और गंदगी को लेकर गहरी नाराजगी जताई गई। इसके अलावा, TC और माइग्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर शुल्क में की गई भारी वृद्धि को भी वापस लेने की मांग की गई है ताकि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों पर आर्थिक बोझ न बढ़े। प्रशासन को चेतावनी समाजवादी छात्र सभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और छात्र सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ घेराव और बड़ा आंदोलन करेंगे। इस मौके पर प्रदेश सचिव संजय मेवाती, जिला महासचिव अमरीश यादव, जिला अध्यक्ष अविनाश मिश्रा समेत 50 से अधिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस मौके पर यूनिवर्सिटी के तमाम छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हुए और जमकर नारेबाजी की।
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