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    राहुल गांधी का केस सुनने से हाईकोर्ट जज का इंकार:जज ने कहा- अदालत के खिलाफ बोलना क्या सही है?

    22 hours ago

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता केस से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सुभाष विद्यार्थी ने खुद को अलग कर लिया है। सोमवार को लखनऊ बेंच में मामले की सुनवाई जैसे ही शुरू हुई, जज सुभाष विद्यार्थी ने याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की उन सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें धमकी दी गई थी। जज विद्यार्थी ने याचिकाकर्ता से कई सवाल किए। पूछा, पीठ पीछे कीचड़ उछालना कैसे उचित है? अदालत के खिलाफ बोलना सही है? जज ने कहा, आवेदक ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया। आप सबने मुझे परेशान किया है। मेरे साथ अन्याय हुआ है। याचिकाकर्ता विग्नेश ने सफाई दी, लेकिन जज ने सुनने से मना कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की फाइल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने पेश की जाए, ताकि नई बेंच का गठन किया जा सके और आगे की सुनवाई तय हो सके। याचिकाकर्ता विग्नेश कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता हैं। कोर्ट ने पहले कहा- राहुल पर FIR हो, फिर अपना आदेश पलटा विग्नेश ने सोशल मीडिया पर धमकी दी, 2 पोस्ट किए याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने 18 अप्रैल को एक घंटे के भीतर सोशल मीडिया के X प्लेटफॉर्म पर 2 पोस्ट किए थे। पहली पोस्ट में लिखा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अंतिम स्थिति यह है– मामला स्वीकार किया जाता है। विग्नेश ने केस से जुड़े सभी लोगों को चेतावनी देते हुए लिखा, 'कृपया ध्यान दें कि यदि इस मामले के स्टेटस में कोई परिवर्तन होता है, तो मैं अपना अगला ट्वीट अपलोड करूंगा और उसमें सभी माफिया, अंडरवर्ल्ड, कार्टेल, सिंडिकेट और अवैध गठजोड़ों का पर्दाफाश करूंगा। (इस x पोस्ट के साथ विग्नेश एस शिशिर कोर्ट में केस की स्थिति से संबंधित दस्तावेज पोस्ट किए) विग्नेश की दूसरी पोस्ट में कोर्ट का स्टेटस बदलने का जिक्र है। उन्होंने रिश्वत लेने का जिक्र करते हुए लिखा कि कृपया उनसे ली गई धनराशि वापस कर दें। अन्यथा मैं इंटरसेप्ट की गई कॉल को सीधे ट्विटर पर अपलोड कर दूंगा। पूरी तरह तैयार रहें। आपको स्थायी रूप से जेल जाना होगा। विग्नेश ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया है। किसकी इंटरसेप्ट कॉल है, किसने धनराशि दी है, इसका भी सीधे-सीधे जिक्र नहीं है। अब कोर्ट रूम LIVE पढ़िए... शिशिर (याचिकाकर्ता): आज जो ऑर्डर दिया रहा है, वह एकतरफा है। जज सुभाष विद्यार्थी: आप मेरे ऑर्डर को चैलेंज कर सकते हैं। शिशिर: मैं चैलेंज करने नहीं आया हूं। लेकिन मेरी अन्य पोस्ट भी देखें। आप एकतरफा ऑर्डर दे रहे हैं। जज सुभाष विद्यार्थी: आप सबने मुझे परेशान किया है। मेरे साथ अन्याय हुआ है। शिशिर: ये पोस्ट अदालत के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए थी, जो मुझ पर दबाव डाल रहे थे। जज सुभाष विद्यार्थी: यह बात दूसरे जज को बोलिएगा। शायद आप एक बेहतर जज के हकदार हैं। शिशिर: बेंच से रिक्वेस्ट है कि वह इस केस को दो दिन बाद ले। जज सुभाष विद्यार्थी: जब मामला आएगा, तब सबमिशन करिएगा। जज सुभाष विद्यार्थी: सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए मैसेज कोर्ट पर इल्जाम लगाने जैसे हैं। एक और मैसेज में उन्होंने (शिशिर) आम जनता से अपील की कि वे CJI को लिखें कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को हाईकोर्ट के ऑर्डर की टाइप की हुई कॉपी खुली अदालत में सुनाने का निर्देश दें। (हाईकोर्ट ने आवेदक विग्नेश शिशिर के कई सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया? जज सुभाष विद्यार्थी: कोर्ट की राय है कि उसने (शिशिर) कोर्ट की छवि खराब की है। वह जनता की राय मांग रहा है कि क्या उसे इस बेंच के सामने मामला जारी रखना चाहिए। (यह कहते हुए जस्टिस विद्यार्थी ने मामले से खुद को अलग कर लिया) जज सुभाष विद्यार्थी: पीठ पीछे कीचड़ उछालना कैसे उचित है? अदालत के खिलाफ बोलना सही है? सरकारी वकील: योर लॉर्डशिप, आवेदक के सोशल मीडिया पोस्ट का बचाव नहीं किया जा सकता। किसी को भी हाईकोर्ट पर सवाल उठाने का हक नहीं है और न ही कोई उठा सकता है। जज सुभाष विद्यार्थी: आवेदक ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया। जज सुभाष विद्यार्थी: मीडिया में कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं... कोर्ट को अपने राजनीतिक अखाड़े का हिस्सा बना रहे हैं। डिप्टी सॉलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया: आवेदक के सोशल मीडिया पोस्ट का बचाव नहीं किया जा सकता। वकील अशोक पांडे: आप खुली अदालत में आदेश लिखवाने के बाद अपना ही आदेश नहीं बदल सकते। जस्टिस विद्यार्थी: अगला मामला...। आवेदक शिशिर: मैंने सोशल मीडिया पर आपके पिछले आदेश की तारीफ की थी। कृपया वे पोस्ट भी देखें, जिनमें मैंने कहा था कि यह एक ऐतिहासिक आदेश था। CBI से जांच कराने का आदेश दिया था 17 अप्रैल को जज सुभाष विद्यार्थी ने 28 जनवरी, 2026 के उस आदेश को पलटा था, जिसमें MP-MLA कोर्ट ने विग्नेश शिशिर की याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा था- FIR दर्ज करके मामले को CBI को ट्रांसफर किया जाए। सुनवाई के दौरान जज सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश दिए थे कि मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज पेश करें। मंत्रालय ने केस से जुड़ी सभी फाइलें हाईकोर्ट में पेश की थीं। विग्नेश शिशिर का दावा है कि उन्होंने कोर्ट में दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए। इनसे संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं। वहां चुनावों में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं। सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से वकील डॉ. बीके सिंह पेश हुए थे। केंद्र सरकार का पक्ष वकील एसबी पांडेय ने रखा। याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की तरफ से बिंदेश्वरी पांडेय कोर्ट पहुंचे थे। रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर हुआ था केस 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी ही याचिका खारिज कर दी थी सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राहुल की भारतीय नागरिकता से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अगर कोई कंपनी किसी फॉर्म में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक के तौर मेंशन करती है, तो क्या ऐसा कर देने से ही वे ब्रिटिश नागरिक हो गए। सीजेआई गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा था- 'हम यह याचिका खारिज करते हैं। इसमें कोई आधार नहीं है। 'याचिका में कहा गया था, 'कोर्ट राहुल की नागरिकता के बारे में मिली शिकायत पर जल्द फैसला करने के लिए गृह मंत्रालय को निर्देश दे।' याचिका में राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता जय भगवान गोयल ने ब्रिटेन की कंपनी के 2005-06 के सालाना ब्योरे का जिक्र किया था। इसमें कथित तौर पर राहुल को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था। राहुल के खिलाफ यूपी में 3 केस मोदी सरनेम केस में गई थी सांसदी मोदी सरनेम केस में गुजरात की एक कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद 24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 7 अगस्त 2023 को उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी।
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