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    पंजाब के सिंगर को साउथ में मिला फिल्म फेयर अवॉर्ड:कन्नड़ फिल्म कृष्णम प्रणय सखी में गाया सुपरहिट गाना, बोले-म्यूजिक की कोई भाषा नहीं होती

    4 hours ago

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    लुधियाना के लिए गर्व का पल है कि एक पंजाबी युवक जसकरण सिंह ने संगीत के जरिए भाषाओं और संस्कृतियों की सीमाएं पार करते हुए राष्ट्रीय पहचान बनाई है। 26 वर्षीय जसकरण सिंह ने 70वें फिल्म फेयर अवार्ड साउथ में बेस्ट प्लेबैक सिंगर (मेल) कन्नड़ का प्रतिष्ठित अवॉर्ड जीत कर साउथ में पंजाब का डंका बजाया है। उन्हें यह सम्मान कन्नड़ फिल्म कृष्णम प्रणय सखी के सुपरहिट गाने "द्वापरा" के लिए मिला। यह अवॉर्ड उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है। अवार्ड जीतने के बाद लुधियाना पहुंचे जसकरण सिंह मीडिया से रूबरू हुए। रियलिटी शो से शुरू हुआ सफर जसकरण का सफर आसान नहीं रहा। करीब 8 साल पहले उन्होंने तमिल सिंगिंग रियलिटी शो जी-तामिल सारे गा मा पा में टॉप-4 स्थान बनाकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद उन्होंने साउथ इंडस्ट्री में लगातार मेहनत जारी रखी। अलग-अलग भाषाओं में बनाई पहचान जसकरण ने भाषा की बाधाओं को कभी अपने रास्ते में नहीं आने दिया। तमिल के बाद उन्होंने 2022 में तेलुगु और 2023 में कन्नड़ सिंगिंग शोज में हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि एक पंजाबी गायक होने के बावजूद उनकी उच्चारण क्षमता ने साउथ के दर्शकों को भी प्रभावित किया। जीत का पल, पहले पिता को दी खबर अपनी इस उपलब्धि को याद करते हुए जसकरण ने कहा कि जब उन्हें नॉमिनेशन की खबर मिली तो वह कुछ मिनटों तक खामोश रह गए। इसके बाद सबसे पहले उन्होंने अपने पिता को फोन कर यह खुशखबरी दी। परिवार और गुरुओं का बड़ा योगदान लुधियाना के सेक्टर-32 निवासी जस्करण ने 2011 में वोकल कोच कपिल शर्मा से क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग शुरू की। इसके बाद हानित तनेजा से वेस्टर्न सिंगिंग सीखी। वह अपने मेंटर असिम नागपाल और परिवार, खासकर ‘बड़े पापा’ जसबीर सिंह के सपोर्ट को अपनी सफलता का अहम कारण मानते हैं। मेहनत और जुनून ने दिलाई पहचान जसकरण का कहना है कि “म्यूजिक की कोई भाषा नहीं होती, यह दिलों को जोड़ता है। शुरुआत में मुझे तमिल या कन्नड़ नहीं आती थी, लेकिन मैंने लगातार गाने सुनकर और रोज प्रैक्टिस करके अपनी उच्चारण को बेहतर किया।"
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