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    नाबालिग को मां की जगह आरोपी को सौंप दिया:बाल कल्याण समिति ने कप्तानगंज थानाध्यक्ष को तलब कर मांगा जवाब

    13 hours ago

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    बस्ती में कप्तानगंज थाना पुलिस पर एक नाबालिग बालिका को उसकी मां के बजाय आरोपी को सौंपने का आरोप लगा है। इस मामले में बाल कल्याण समिति (CWC) ने थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मामले के विवेचक को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा है। CWC अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने चेतावनी दी है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के एक गांव की निवासी बालिका की मां ने पुलिस को बताया था कि उसकी बेटी 7 फरवरी को कॉपी-किताब खरीदने बाजार गई थी, लेकिन घर वापस नहीं लौटी। 8 फरवरी को पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर बालिका की तलाश शुरू की। 22 फरवरी को बालिका की मां को सूचना मिली कि उनकी बेटी थाने पर है। थाने पहुंचने पर मां ने देखा कि बेटी ने शादी कर ली है। इस बात से नाराज होकर मां ने बेटी को घर ले जाने से इनकार कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने बालिका और उसकी मां की काउंसलिंग करने या CWC के समक्ष पेश करने के बजाय, आरोपी से सांठगांठ कर बालिका को उसी के साथ थाने से भेज दिया। मामले में नया मोड़ तब आया जब इसकी जानकारी चाइल्डलाइन को हुई। बालिका की मां ने पहले ही चाइल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर 1098 पर बेटी के गायब होने की सूचना दे रखी थी। जब चाइल्डलाइन कार्यकर्ताओं ने मां से बात की, तो उन्होंने बताया कि पुलिस ने बेटी को बरामद करने के बाद आरोपी को ही सौंप दिया है। चाइल्डलाइन द्वारा बालिका को CWC के सामने पेश करने की बात कहे जाने पर, पुलिस ने 25 फरवरी को मां को थाने बुलाकर कहा कि बेटी को बस्ती लेकर चलना है और अगर वह बेटी को अपने साथ नहीं ले जाएगी तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा। शिकायत में मां ने आरोप लगाया कि 22 फरवरी से 25 फरवरी के बीच उसकी नाबालिग पुत्री को पुलिस ने आरोपी के घर पर ही रखा। साथ ही यह भी कहा कि पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन उसे अब तक एफआईआर की कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी की टीम ने तत्काल संज्ञान लिया। टीम ने थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मामले के विवेचक को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस संबंध में चेयरपर्सन प्रेरक मिश्रा ने कहा कि ऐसे मामलों में बालिका और परिजनों के बीच तनाव की स्थिति बन जाती है, लेकिन काउंसलिंग के जरिए समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में पुलिस द्वारा नाबालिग को आरोपी के सुपुर्द करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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