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    मंत्री संजय निषाद ने बुलेट चलाई:3000 बाइक के साथ रैली निकाली; गोरखपुर में पार्टी का चुनावी शंखनाद

    12 hours ago

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    गोरखपुर में निषाद पार्टी का विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर शंखनाद कर दिया गया है। रविवार को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री 3000 बाइकों की रैली के साथ पार्टी कार्यालय से निकले। संजय निषाद खुद बुलेट लेकर आगे चले रहे हैं। रैली पादरी बाजार पुलिस चौकी, जेल तिराहा, असुरन चौक, गोलघर काली मंदिर, शास्त्री चौक होते हुए अंबेडकर चौक पहुंचेगी। यहां से यात्रा पैडलेगंज होते हुए महंत दिग्विजयनाथ पार्क पहुंचेगी। यहां विशाल जनसभा होगी। जिसमें सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, अपना दल के आशीष पटेल उपस्थित रहेंगे। प्रदेश के 4 बड़े शहरों में विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश की लगभग 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं। इसलिए 5 अप्रैल तक होने वाली इन 4 रैलियों के जरिए इन सीटों को साधने का प्रयास किया जाएगा। जानिए गोरखपुर से क्यों शुरू हो रही रैली डा. संजय निषाद कहते हैं कि गोरखपुर में हमारी जड़ें हैं। 2007 में यहां रामगढ़ताल का पानी और प्रयागराज में निषादराज के किले की मिट्‌टी लेकर मैंने यात्रा शुरू की थी। उस यात्रा को 19 साल पूरे हो गए हैं और निषाद पार्टी को 10 साल। वह मिट्‌टी व पानी प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ 20 राज्यों तक पहुंच चुकी है। सबसे पहली जीत भी यहीं मिली थी। प्रवीण निषाद ने 2018 लोकसभा उपचुनाव जीता था। गोरखपुर में भाजपा को यह बड़ी चुनौती थी। 3 तस्वीरें देखिए… जानिए क्या हैं प्रमुख मांगें मझवार/तुरैहा को अनुसूचित जाति में परिभाषित करना केवट, मल्लाह, बिंद, मांझी, कहार, धीवर, बाथम और कश्यप जैसी जातियों को पूर्व से अंकित मझवार और तुरैहा श्रेणी के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की मांग उठाई जाएगी। पार्टी का तर्क है कि ये सभी समुदाय सामाजिक, आर्थिक और पारंपरिक रूप से एक ही वर्ग से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें समान संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। खनन, बालू और पुश्तैनी घाटों पर अधिकार बहाली मछुआ समाज को पहले नदी, बालू खनन और पुश्तैनी घाटों पर आसामी दर्ज के साथ अधिकार प्राप्त थे। किन्तु पूर्व की सरकारों द्वारा इन पारंपरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया, जिससे समाज की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। पार्टी इन अधिकारों की पुनः बहाली की मांग कर रही है। वर्ग-3 की भूमि को मछुआ समाज के लिए पुनः आरक्षित करना उत्तर प्रदेश में वर्ग-3 की भूमि मछुआ समाज के लिए आरक्षित थी और उन्हें आसामी दर्ज प्राप्त था, क्योंकि समाज का 80% से अधिक हिस्सा भूमिहीन है। इसके बावजूद पूर्व सरकारों ने यह अधिकार समाप्त कर दिया। निषाद पार्टी की मांग है कि इस भूमि को पुनः समाज के लिए आरक्षित किया जाए, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके। विमुक्त जाति/जनजाति के अधिकारों की बहाली भारत सरकार के आदेशानुसार मछुआ समाज की कई उपजातियों को, क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के पीड़ित होने के कारण, विमुक्त जाति एवं जनजाति के अधिकार प्राप्त थे। किन्तु वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा इन लाभों को समाप्त कर दिया गया। पार्टी की मांग है कि इन अधिकारों को पुनः लागू किया जाए, जिससे समाज को न्याय मिल सके। ओबीसी से 9 प्रतिशत काटकर एससी में आरक्षण देने की मांग करेंगे डा. संजय निषाद का कहना है कि दूसरे नाम से निषाद समाज को एससी का आरक्षण मिलता है। चाहे जिस दल में हों, निषाद नेताओं से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए एकजुट हों। ओबीसी से 9 प्रतिशत काटकर एससी में जोड़ा जाए। जातीय जनगणना में अपनी जाति मझवार के रूप में एससी में दर्ज कराएं। निषाद पार्टी की रैली से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए
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