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    मेरठ में स्वामी पूर्णानंद सरस्वती की जयंती पर जुटे विद्वान:बोले– वैदिक संस्कृति ही मानवता का मार्ग, अशांति का बड़ा कारण वाणी की मर्यादा का अभाव

    1 hour ago

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    मेरठ में प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं आर्य विद्वान स्वामी पूर्णानंद सरस्वती का 126वां जन्मोत्सव IMA हॉल में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नजीबाबाद गुरुकुल की ब्रह्मचारिणियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ से हुई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। समारोह में तेलंगाना से आए आचार्य हरिप्रसाद के सान्निध्य में वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जबकि डॉ. मनीषा तोमर ने भजन प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद आयोजित व्याख्यानमाला में देशभर से आए विद्वानों ने वैदिक संस्कृति और उसके महत्व पर अपने विचार रखे। स्वामी जी के सुपौत्र एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र की सेवा का संकल्प लेना चाहिए। परोपकारिणी सभा अजमेर के संरक्षक डॉ. वेदपाल सिंह ने कहा कि “दूसरों के धन पर लालच न करना” वैदिक सिद्धांत का मूल है, और इसी भावना से विश्व में शांति स्थापित हो सकती है। अमेठी से आए डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री ने महर्षि दयानंद के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि आर्य समाज के प्रयासों से यज्ञों में पशु बलि जैसी कुप्रथा समाप्त हुई। तेलंगाना के युवा विद्वान आचार्य हरिप्रसाद ने आधुनिक जीवन में बढ़ते अवसाद पर चिंता जताते हुए कहा कि वैदिक जीवनशैली, संयम और यम-नियम का पालन मानसिक शांति का आधार है। मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि आज वैश्विक अशांति का एक बड़ा कारण वाणी की मर्यादा का अभाव है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में वैदिक संस्कृति ही मानव जीवन का मूल आधार बनेगी। पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने भी वैदिक ज्ञान को विश्व शांति का समाधान बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संत शिरोमणि स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने ऑनलाइन संबोधन के माध्यम से की। उन्होंने स्वामी पूर्णानंद सरस्वती के त्याग, तपस्या और सत्य के प्रति समर्पण को प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर “सत्यार्थ प्रकाश” पर आधारित भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा स्वामी जी के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुरुषोत्तम और डॉ. वीर सिंह ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र सिंह ने दिया। समारोह में मेरठ, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर से बड़ी संख्या में चिकित्सक, समाजसेवी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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