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    लखनऊ में 530 स्कूली वैन अनफिट:168 वाहन बिना परमिट चल रहे, 38 गाड़ियों का परिवहन विभाग में कोई रिकॉर्ड नहीं

    9 hours ago

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    लखनऊ में स्कूली बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शहर में 530 अनफिट और 168 बगैर परमिट स्कूली वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यानी कुल 698 ऐसे वाहन हैं, जिनसे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई बेहद धीमी बनी हुई है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही करीब दो लाख बच्चे रोजाना स्कूल वैन, ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों से सफर कर रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब सामने आता है कि शहर में करीब 3800 ऐसे ‘घोस्ट’ वाहन भी चल रहे हैं जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुका है, फिटनेस नहीं है और परिवहन विभाग के पास इनका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। इनमें से अधिकतर वाहन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को ढो रहे हैं, जहां निगरानी लगभग न के बराबर है। फिटनेस और परमिट की अनदेखी, नियम सिर्फ कागजों में आंकड़ों के मुताबिक, 530 वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है, जिनमें 126 स्कूली और 404 अनुबंधित वाहन शामिल हैं। वहीं 168 वाहन बिना परमिट के संचालित हो रहे हैं, जिनमें 49 स्कूली और 119 अनुबंधित वाहन हैं। ये सभी वाहन ओमनी वैन, मोटर कैब और मैक्सी कैब जैसी श्रेणियों में आते हैं, जिनमें बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा है। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति, एक साल में सिर्फ 538 चालान परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई के आंकड़े बेहद कमजोर हैं। पिछले एक साल में केवल 538 स्कूली वाहनों के चालान किए गए, जो औसतन प्रतिदिन दो चालान भी नहीं बनते। इतनी बड़ी संख्या में अनियमित वाहनों के बावजूद यह कार्रवाई नाकाफी मानी जा रही है। ई-रिक्शा और ऑटो भी बने खतरा, खुलेआम नियमों की अनदेखी स्कूलों के बाहर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा और ऑटो भी बच्चों को ढोते नजर आते हैं। इनमें न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है और न ही बैठने की क्षमता का ध्यान रखा जाता है। इससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले भी हो चुके हादसे, फिर भी नहीं लिया सबक बीते वर्ष शहीद पथ पर सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के बच्चों को ले जा रही वैन हादसे का शिकार हो गई थी। उस घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती और अभियान की बात कही थी, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। अधिकारियों का दावा और हकीकत अलग-अलग आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय का कहना है कि अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इनकी संख्या में कमी लाई जा रही है। साथ ही स्कूली वाहनों का विवरण पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। हालांकि मौजूदा आंकड़े इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े करते हैं।
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