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    लखनऊ में 40 साल पुरानी एलडीए कॉलोनियों का होगा कायाकल्प:जर्जर फ्लैट्स की जगह बनेंगी हाईराइज इमारतें

    1 hour ago

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    लखनऊ में अब चार दशक पुरानी आवासीय योजनाओं की तस्वीर बदलने जा रही है। सीमित सुविधाओं और पुराने ढांचे वाले जी+3 भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस गगनचुंबी अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपनी पुरानी कॉलोनियों के री-डेवलपमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में हजरतगंज स्थित वजीर हसन रोड, पेपर मिल कॉलोनी और कानपुर रोड योजना के सेक्टर-जी को शामिल किया गया है। वजीर हसन रोड: 1988 के 64 फ्लैट होंगे री-डेवलप वजीर हसन रोड पर 1988 में बने 4 टावरों में कुल 64 फ्लैट हैं। इनमें से 60 की रजिस्ट्री हो चुकी है, 3 लंबित हैं और 1 फ्लैट अभी भी अनावंटित है। शुरुआती सर्वे में सामने आया कि इमारतें काफी जर्जर हो चुकी हैं और कई फ्लैटों में मूल आवंटियों की जगह अवैध कब्जे हैं। पार्किंग और पार्क पर भी कब्जा कॉलोनी में तय पार्किंग और पार्क की जमीन पर भी अनाधिकृत कब्जे मिले हैं। प्राइम लोकेशन पर होने के बावजूद योजना की हालत खराब है, जिससे अब इसे पूरी तरह नए सिरे से विकसित करने की तैयारी है। पुराने आवंटियों को मिलेगा नया घर री-डेवलपमेंट के बाद पुराने आवंटियों को नए अपार्टमेंट में ही समायोजित किया जाएगा। इससे उन्हें सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर सुविधाओं वाले घर मिलेंगे। कानपुर रोड और पेपर मिल कॉलोनी भी शामिल कानपुर रोड योजना के सेक्टर-जी में 1990 के आसपास बने करीब 1000 डबल स्टोरी मकानों का भी कायाकल्प होगा। यहां भी बड़ी संख्या में अवैध कब्जे सामने आए हैं। वहीं, पेपर मिल कॉलोनी के पुराने भवनों का सर्वे कर उनकी स्थिति के आधार पर पुनर्विकास का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। एलडीए का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ शहर की पुरानी कॉलोनियों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि ज्यादा लोगों को बेहतर और आधुनिक आवासीय सुविधाएं भी मिल सकेंगी।
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