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    खुले आसमान के नीचे 70 परिवारों ने गुजारी पूरी रात:बलिया में भूख से बिलखते रहे बच्चे, आग ने 60 घरों को चपेट में लिया

    5 hours ago

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    बलिया के बेल्थरा रोड में उभांव थाना क्षेत्र के हल्दीरामपुर-छपिया गांव में शनिवार को हुए भीषण अग्निकांड के बाद रविवार को भी गांव में अफरा-तफरी और मायूसी का माहौल बना रहा। जहां एक दिन पहले आग ने सैकड़ों जिंदगियों को झुलसा दिया, वहीं दूसरे दिन लोग राख के ढेर में अपनी बची-खुची उम्मीदें तलाशते नजर आए। करीब 60 से अधिक घर और मड़हे जलकर खाक हो जाने से लगभग 70 से ज्यादा परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं। खुले आसमान के नीचे कटी पूरी रात शनिवार की रात इन परिवारों के लिए किसी काली रात से कम नहीं थी—बिना छत, बिना बिस्तर, खुले आसमान के नीचे पूरी रात काटनी पड़ी। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि प्रशासन की ओर से टेंट या अस्थायी आश्रय की कोई ठोस व्यवस्था मौके पर नजर नहीं आई। भूखे रहकर बच्चों को खिचड़ी खिलाई रविवार की सुबह गांव में दिल दहला देने वाला दृश्य दिखा। महिलाएं जले हुए घरों की राख में अपने सपनों के अवशेष खोजती हुई रोती-बिलखती नजर आईं। बच्चे भूख से बिलख रहे थे, तो गांव के लोग आपसी सहयोग से खिचड़ी बनाकर सबसे पहले उन्हें खिलाते दिखाई दिए। खुद भूखे रहकर भी बच्चों का पेट भरने की कोशिश इस त्रासदी के बीच इंसानियत की मिसाल बन गई। शादी वाले घर में मातम छाया इस अग्निकांड ने कई परिवारों के भविष्य पर भी गहरी चोट की है। विक्रम राजभर की बेटी प्रियंका, जिसकी शादी 21 जून को होनी थी, उसके घर में मातम पसरा है। शादी के लिए रखा गया सामान और एक लाख रुपये नकद आग में जल गए। रविवार की सुबह प्रियंका की मां राख के ढेर के सामने बैठकर फूट-फूट कर रोती नजर आईं—मानो उनकी बेटी के सपने भी उसी आग में जल गए हों। पिता और बेटी आग में झुलसे घटना में बेचन (55) और उसकी पुत्री कंचन (25) गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिन्हें सीएचसी सीयर से हायर सेंटर रेफर किया गया है। कंचन की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। इसके अलावा कई मवेशी भी आग की भेंट चढ़ गए, जिससे ग्रामीणों की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट गई है। विधायक गोरख पासवान आग पीड़ितों से मिले रविवार को पूर्व विधायक गोरख पासवान गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। वहीं प्रशासनिक टीम द्वारा नुकसान का आकलन जारी है। लेखपाल राजीव गिरी के अनुसार, करीब 40 घर और 73 परिवार इस आग से प्रभावित हुए हैं। शासन द्वारा न्यूनतम 13 हजार रुपये की सहायता राशि दिए जाने की बात कही गई है, लेकिन आग में जरूरी दस्तावेज और बैंक से जुड़े कागजात जल जाने के कारण सहायता राशि पहुंचाने में भी दिक्कत आ रही है। मदद को आगे आए गांव वाले इस बीच गांव के ही रमेश मास्टर ने मदद के लिए आगे आते हुए दो बोरा गेहूं देने की घोषणा की। फिलहाल ग्रामीण ऐसे ही आपसी सहयोग से ही भोजन और राहत की व्यवस्था कर रहे हैं। भोला सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि अगर तत्काल लकड़ी और डोढ़ (छप्पर बनाने की सामग्री) की व्यवस्था हो जाए तो लोग फिर से अपने आशियाने खड़े करने की कोशिश शुरू कर सकेंगे। इसी के साथ उन्होंने खाना बनाने के लिए रसोई गैस सिलेंडर व चूल्हे की व्यवस्था की मांग की ताकि फौरी तौर पर लोगों को राहत मिल सके। 3 घटें तक जलते रहे 60 से अधिक घर गौरतलब है कि शनिवार को लगी आग ने करीब ढाई से तीन घंटे तक गांव में तांडव मचाया। तेज हवा के चलते आग तेजी से फैलती गई और दर्जनों घर इसकी चपेट में आ गए। दमकल की टीम देरी से पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों और पानी के टैंकरों की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। फिलहाल आग तो बुझ चुकी है, लेकिन गांव में बिखरी राख, जले हुए सामान और रोते-बिलखते लोग इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हल्दीरामपुर-छपिया के लोगों के लिए यह त्रासदी अभी खत्म नहीं हुई है, असल संघर्ष तो अब शुरू हुआ है।
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