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    काशी विश्वनाथ न्यास की गंगा आरती में पहुंचे हजारों श्रद्धालु:7 विशेष अर्चक ने आरती की, तीन रास्तों से मिल रही एंट्री

    1 hour ago

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    काशी में रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां बाबा के दर्शन के बाद श्रद्धालु गंगा तट की ओर रुख किए। गंगा द्वार स्थित ललिता घाट पर मंदिर न्यास की ओर से शुरू की गई गंगा आरती के चौथे दिन वीकेंड पर भारी भीड़ देखने को मिली। हजारों श्रद्धालु यहां गंगा आरती में शामिल हुए। यहां 7 अर्चकों ने मां गंगा की आरती की। मंदिर प्रशासन के अनुसार, आज करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया। अब जानिए गंगा आरती तक पहुंचने और वापसी का मार्ग पहला रास्ता - गेट नंबर 4 से मोबाइल लेकर सीधे गंगा आरती स्थल पहुंचेंगे। विश्वनाथ मंदिर की गंगा आरती में पहुंचने और वापसी के लिए भक्तों के पास चार रास्ते हैं। एक तो गेट नंबर चार से आने वाले भक्त मोबाइल के साथ सीधे शंकराचार्य चौक होते हुए गंगा द्वार से बाहर निकलकर गंगा आरती में शामिल होंगे। वहीं अन्य रास्तों सरस्वती फाटक, गेट नंबर 4 और नंदू फेरिया, ढूंढीराज गणेश से प्रवेश करने वाले भक्त भी उसी रास्ते से ललिता घाट पहुंच सकेंगे हालांकि उनका मोबाइल बाहर ही जमा होगा। लेकिन इस रास्ते से मोबाइल लेकर वापसी संभव नहीं हो पाएगी। दूसरा रास्ता - दशाश्वमेध घाट से करीब 500 मीटर की दूरी तय करके ललिता घाट पहुंचा जा सकता है और इसी से वापसी भी हो सकती है। तीसरा रास्ता - मां विशालाक्षी मंदिर से मीरघाट होते हुए भी सीधे ललिता घाट तक भक्त पहुंच और वापसी भी हो सकती है। गंगा आरती में है कष्टहरण का गुण- प्रो. विनय पांडेय बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्राे. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि गंगा आरती एक पूर्ण वैदिक प्रक्रिया है। आरती का अर्थ होता है कष्टहरण। इसमें शामिल होने से जीवन और शरीर दोनों के कष्ट दूर होते हैं। पूजा की पूर्णता आरती के बाद ही होती है। पितरों की आत्मा को मोक्ष मिल जाता है। अति सत्कार का दिन है। आरती लेने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं। ये पुनीत कार्य है। अर्चक करने वालों को सनातनी और सात्विक होना जरूरी है। मांसाहार न हों।
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