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    काशी विश्वनाथ मंदिर में स्कंदषष्ठी पर भगवान कार्तिकेय का पूजन:क्यों की जाती है भगवान कार्तिकेय की पूजा, जानिए धार्मिक और पौराणिक महत्व

    15 hours ago

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    श्री कुमार षष्ठी (स्कंद षष्ठी) के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में स्थित भगवान कार्तिकेय के विग्रह का वैदिक रीति-रिवाजों तथा शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार विशेष पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। मंदिर के विद्वान आचार्यों एवं शास्त्रियों द्वारा भगवान कार्तिकेय का मंत्रोच्चार, अभिषेक, पूजन, अर्चन और विशेष अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न किया गया। पूजन के दौरान भगवान के श्रीचरणों में पुष्प, फल, नैवेद्य एवं अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित की गईं। साथ ही समस्त जनकल्याण, सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति तथा राष्ट्र की उन्नति और प्रगति के लिए मंगलकामना की गई। अब जानए क्या है स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व स्कंद षष्ठी हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जो भगवान कार्तिकेय की आराधना को समर्पित है। भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवताओं के सेनापति माने जाते हैं। उन्हें स्कंद, कुमार, षण्मुख, सुब्रह्मण्य और मुरुगन जैसे नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से साहस, पराक्रम, तेज, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। यह पर्व विशेष रूप से जीवन की बाधाओं को दूर करने, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने तथा मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण भारत में विशेष महत्व भगवान कार्तिकेय दक्षिण भारत के प्रमुख आराध्य देवों में से एक हैं। विशेषकर तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में उनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। वहां वे "मुरुगन" नाम से विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। तमिल हिंदू समुदाय में भगवान कार्तिकेय की भक्ति का विशेष स्थान है और उनके अनेक भव्य मंदिर दक्षिण भारत में स्थित हैं। स्कंद षष्ठी व्रत एवं पूजा-विधि स्कंद षष्ठी के अवसर पर भक्त भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भगवान स्कंद की स्थापना, अभिषेक, मंत्रजाप तथा हवन शामिल होते हैं। श्रद्धालु अखंड दीप प्रज्वलित करते हैं और भगवान को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का त्याग करना चाहिए। साथ ही ब्रह्मचर्य, संयम और सात्विक जीवनशैली का पालन करने का विशेष महत्व बताया गया है। अब जानिए क्या है व्रत का आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व धार्मिक ग्रंथों में स्कंद षष्ठी व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है तथा संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार भगवान कार्तिकेय की कृपा से भक्तों को शत्रुओं पर विजय, रोगों से मुक्ति और जीवन की विभिन्न समस्याओं से राहत प्राप्त होती है।
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