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    कार्डियोलॉजी में 1 साल में 34 हजार मरीज बढ़ें:अब 3 नई कैथ लैब से मिलेगी राहत; डायरेक्टर बोले- सीमित स्टॉफ में भी बेस्ट आउटपुट दिया

    3 hours ago

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    कानपुर के लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) पर आम जनता का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है। संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने पिछले एक साल के चिकित्सा कार्यों का जो ब्यौरा दिया, उसने साफ कर दिया कि दिल की बीमारियों के इलाज के लिए यह संस्थान न केवल कानपुर, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का बड़ा केंद्र बन चुका है। पिछले साल के मुकाबले इस बार न सिर्फ ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ बढ़ी, बल्कि गंभीर ऑपरेशन और एंजियोग्राफी के मामलों में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। एक साल में 34 हजार बढ़े ओपीडी मरीज संस्थान के वार्षिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 3 लाख 77 हजार थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 4 लाख 11 हजार से अधिक पहुंच गई। महज एक साल में 34 हजार मरीजों की बढ़ोतरी संस्थान के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। सिर्फ बाहरी मरीज ही नहीं, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष जहां 21 हजार मरीज भर्ती हुए थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 23 हजार के पार पहुंच गया। ऑपरेशन और एंजियोग्राफी में रिकॉर्ड वृद्धि मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच संस्थान ने सर्जरी और जीवन रक्षक प्रक्रियाओं की रफ्तार भी बढ़ाई है। पिछले साल संस्थान में करीब 3 हजार ऑपरेशन किए गए थे, जबकि इस साल 3,500 से अधिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए। इसी तरह एंजियोग्राफी के मामलों में भी भारी उछाल दर्ज किया गया। पिछले साल 8,500 एंजियोग्राफी हुई थीं, जबकि इस वर्ष 11 हजार मरीजों की जांच की गई। दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले पेसमेकर लगाने के मामलों में भी 250 की वृद्धि दर्ज की गई, जो संस्थान की बढ़ती सक्रियता का प्रमाण है। 3 नई कैथ लैब से मिलेगी राहत संस्थान की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने भविष्य की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस साल संस्थान में 3 नई कैथ लैब बढ़ाई जा रही हैं। इनके शुरू होने से हृदय रोगियों की जांच और इलाज में होने वाली देरी कम होगी और गंभीर मरीजों को तेजी से उपचार मिल सकेगा। सीमित संसाधनों के बीच बेहतर इलाज डॉ. वर्मा ने बताया कि वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती सीमित संसाधन और पुराना ढांचा है। जब तक बड़ी कार्डियक इमरजेंसी बनकर तैयार नहीं हो जाती, तब तक उपलब्ध कम जगह में ही बेहतर प्रबंधन के जरिए मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। हालांकि फिलहाल डॉक्टरों की संख्या में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन संस्थान प्रबंधन भविष्य में स्टाफ बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। डॉ. राकेश वर्मा ने कहा कि मरीजों का बढ़ता आंकड़ा और बेहतर मेडिकल आउटकम यह साबित करता है कि संस्थान की कार्यप्रणाली समाज के लिए बेहद लाभकारी है। हमारा लक्ष्य हर मरीज को कम से कम समय में बेहतर से बेहतर इलाज देना है।
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