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    कानपुर में फिल्मी स्टाइल में होता था किडनी ट्रांसप्लांट:फ्लाइट से टीम आती; हॉस्पिटल स्टाफ की कर देते थे छुट्टी; जानिए पूरा खेल

    2 hours ago

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    कानपुर में पुलिस ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का खुलासा किया। सिंडीकेट से जुड़े लोग गरीब, जरूरतमंदों को लालच देकर किडनी बेचने के लिए तैयार करते थे। उन्हें भरोसे में लिया जाता कि एक किडनी से भी जिंदगी जी सकते हैं। उधर, अमीर मरीज से करोड़ों में सौदा करके उसे किडनी लगा देते। ट्रांसप्लांट करने वाली टीम दिल्ली से हवाई जहाज से आती और रात के अंधेरे में काम करके निकल जाती। अहम बात यह थी कि ट्रांसप्लांट करने वाले स्पेशलाइज्ड सर्जन नहीं, ओटी टेक्निशियन थे। मामले में किसी यूरोलॉजिस्ट का नाम नहीं आया है, जबकि बिना यूरोलॉजिस्ट किडनी ट्रांसप्लांट संभव ही नहीं है। यह पूरा मामला किसी फिल्म जैसा है। इसमें लालच है, ठगी है, धोखा है। नहीं है, तो सिर्फ कोई हीरो। सब के सब विलेन हैं। आज संडे बिग स्टोरी में कानपुर किडनी केस का पूरा मामला जानते हैं... आहूजा हॉस्पिटल: कहानी का सेंटर पॉइंट करीब 2 साल पहले कानपुर के कल्याणपुर इलाके में आहूजा हॉस्पिटल की शुरुआत हुई। डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा ने इसे शुरू किया। दोनों पति-पत्नी हैं और MBBS, MD हैं। पहले कानपुर के अलग-अलग हॉस्पिटल में मरीज देखते थे, फिर अपना अस्पताल बना लिया। शहर के बड़े और नामी डॉक्टर्स से संपर्क किया और उन्हें अपने हॉस्पिटल में बैठने को तैयार किया। कुल 27 डॉक्टर आहूजा हॉस्पिटल में बैठते थे। हॉस्पिटल में 35 बेड की व्यवस्था थी। हाईटेक ICU, NICU और ऑपरेशन थिएटर थे। कुल मिलाकर एक परफेक्ट हॉस्पिटल। डॉ. प्रीति इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) में कानपुर की उपाध्यक्ष है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मेडिकल ऑफिसर है। डायबिटीज एसोसिएशन की सेक्रेटरी और स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के फिजिशियन फोरम की मेंबर है। प्रीति इतने संगठनों के पदों पर है कि अगर कोई शिकायत ऊपर अधिकारियों तक पहुंच भी गई तो कार्रवाई करने से पहले 10 बार सोचेंगे। मेडिकल फील्ड में बड़े अफसरों से प्रीति हमेशा बनाकर चलती थी। दलाल शिवम ने नेटवर्क बनाया, सबको पैसे कमाने का लालच दिया सब ठीक ही चल रहा था, लेकिन कुछ दिन बाद कहानी में एंट्री होती है शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा की। जालौन का शिवम 15 साल की उम्र में कानपुर भाग आया था। 8वीं के बाद स्कूल नहीं गया। कानपुर में छोटे-मोटे काम किए, फिर एंबुलेंस ड्राइवर बन गया। हॉस्पिटल्स और डॉक्टर्स से कनेक्शन बन गया। डॉ. प्रीति से मुलाकात हुई, तो आहूजा हॉस्पिटल का ही बनकर रह गया। शिवम काड़ा का न सिर्फ कानपुर, बल्कि यूपी के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्शन बनता चला गया। उसकी मुलाकात नोएडा के डॉ. रोहित से हुई। रोहित किडनी ट्रांसप्लांट के खेल का पुराना खिलाड़ी था। दोनों के बीच डील हुई। इसके बाद शिवम ग्राहक खोजने में लग गया। इसके लिए उसने सोशल मीडिया को जरिया बनाया। टेलीग्राम पर चैनल बनाए। गेमिंग एप पर एक्टिव हुआ। ये वो गेमिंग एप थे, जहां पैसा लगता था। बहुत सारे लोग हार चुके होते थे। गेम खेलने के दौरान बातचीत से अंदाजा लगाया जा सकता था कि आगे वाला पैसे के लिए किस हद तक जा सकता है। जो काम कानपुर में शिवम कर रहा था, वही काम मेरठ में डॉ. अफजल और प्रयागराज-नोएडा में नवीन पांडेय कर रहा था। ये सभी किडनी के लिए उन लोगों को तलाशते, जिन्हें पैसे की बेहद जरूरत होती और वो किडनी बचने के लिए तैयार हो जाते हैं। 6 लाख में डील की, 90 लाख रुपए में बेचा किडनी केस में पीड़ित 2 हैं। एक बिहार का आयुष, दूसरा मुजफ्फरनगर की पारुल। आयुष को पैसे चाहिए थे और पारुल को किडनी। इन दोनों के बीच एक पूरा अवैध सिस्टम था, जो मुनाफाखोरी के लिए किसी भी हद तक चला जाता है। आयुष और शिवम टेलीग्राम के जरिए संपर्क में आए। दोनों में बातचीत हुई। पैसे की बात आई तो 6 लाख रुपए में डील फाइनल हो गई। आयुष को 3 लाख रुपए ऑपरेशन के पहले और 3 लाख ऑपरेशन के बाद मिलने थे। दूसरी तरफ, मेरठ के डॉ. अफजल ने मुजफ्फरनगर की पारुल को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तैयार कर लिया था। ये डील करीब 90 लाख रुपए में तय हुई। आयुष की अफजल से टेलीग्राम पर बातचीत शुरू हुई। अफजल ने आयुष को भरोसा दिया कि मई में उसके MBA एग्जाम से पहले ऑपरेशन हो जाएगा। बीच में आयुष का मन बदला भी, लेकिन अफजल और लोगों ने उसे दोबारा किडनी बेचने के लिए राजी कर लिया। मैनेजमेंट का जिम्मा प्रीति और सुरजीत ने संभाला किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 29 मार्च का दिन चुना गया। जगह हमेशा की तरह कानपुर का आहूजा हॉस्पिटल था। ये भी तय हुआ कि किडनी निकालने के बाद आयुष को मेडि लाइफ हॉस्पिटल और पारुल को प्रीति हॉस्पिटल में एडमिट करवाया जाएगा। हमेशा से यही होता आ रहा था। प्रीति हॉस्पिटल का ओनर डॉ. नरेंद्र सिंह उर्फ नंदू और मेडि लाइफ का ओनर डॉ. राम प्रकाश कुशवाहा और डॉ. राजेश कुमार पहले से ही सेट थे। इन्हें भर्ती करने के एवज में 1-1 लाख रुपए से ज्यादा मिलते थे। आहूजा हॉस्पिटल एक ऑपरेशन के लिए 2 लाख 75 हजार रुपए अपने पास रखता था। ऑपरेशन का मैनेजमेंट नोएडा का डॉ. रोहित संभालता था। वो अभी फरार है। डॉ. रोहित ने एक पूरी टीम बना रखी थी। जैसे ही चीजें फाइनल होतीं, वो टीम तैयार कर लेता। उसकी टीम में किडनी ट्रांसप्लांट का काम दिल्ली के द्वारका का मुदस्सर अली करता था। मुदस्सर यूरोलॉजिस्ट नहीं है, जो इस काम में स्पेशलाइज्ड हो। वो ओटी टेक्निशियन है। मुदस्सर की मदद के लिए गाजियाबाद से दो अन्य ओटी टेक्निशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह राघव भी आते थे। प्लान के मुताबिक, 28 मार्च को डॉ. अफजल मेरठ से पारुल को लेकर कानपुर पहुंच गया। दूसरी तरफ, आयुष को भी हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया गया। 29 मार्च के लिए डॉ. रोहित ने मुदस्सर अली, राजेश और कुलदीप के लिए फ्लाइट की टिकट बुक करवा दीं। पूरी टीम हमेशा रात को ही दिल्ली से निकलती थी। एयरपोर्ट से लाने और छोड़ने की जिम्मेदारी सैफी परवेज की रहती थी। ये मेरठ वाले अफजल के साथ ही रहता था। जब टीम आती, तो कुछ और ड्राइवर्स के साथ मिलकर सबको रिसीव करता था। जिस दिन ऑपरेशन, उस दिन कर्मचारियों की छुट्टी थी आहूजा हॉस्पिटल में 29 मार्च को ऑपरेशन होना था। उसके 3 दिन पहले से ही मरीजों की संख्या कम होने लगी थी। डॉ. प्रीति और डॉ. सुरजीत तय कर लेते थे कि जिस दिन किडनी ट्रांसप्लांट होगा, उस दिन कोई सीरियस पेशेंट हॉस्पिटल में न रहे। हॉस्पिटल के आधे से ज्यादा स्टॉफ की छुट्टी कर दी जाती थी। किडनी ट्रांसप्लांट का काम सुबह 3 से 4 बजे के बीच होता था। उस वक्त हॉस्पिटल में के इक्का-दुक्का मरीज और उनके परिजन सो रहे होते। जांच वगैरह का भी कोई डर नहीं। 29 मार्च की रात ऑपरेशन हुआ। नोएडा-दिल्ली से जो टीम आई थी, वो फ्लाइट से वापस चली गई। पारुल को 30 मार्च की सुबह प्रीति हॉस्पिटल में और आयुष को मेडि लाइफ हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। यहीं दोनों का इलाज शुरू हुआ। इसी दिन पुलिस को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट केस के बारे में कुछ इनपुट मिले। इंटेलिजेंस इनपुट से भी पुष्टि हुई। इसके बाद डीसीपी वेस्ट, क्राइम ब्रांच और एसओजी, तीनों ने एक साथ आहूजा हॉस्पिटल, प्रीति हॉस्पिटल और मेडि लाइफ हॉस्पिटल पर छापा मारा। यहीं से पूरी कहानी खुल गई। साउथ अफ्रीका तक फैला है किडनी सिंजिकेट शुरुआत में लगा कि ये सिर्फ एक मामला है, लेकिन जैसे-जैसे जांच बढ़ी, एक बड़ा सिंडीकेट सामने आया। पुलिस ने डॉ. प्रीति आहूजा, डॉ. सुरजीत आहूजा, प्रीति हॉस्पिटल के मालिक नरेंद्र सिंह, मेडि लाइफ हॉस्पिटल के राम प्रकाश मौर्या और राजेश कुमार और एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ हुई, तो कई राज खुले। शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा के फोन से कई वीडियो मिले। एक वीडियो में मेरठ का डॉ. अफजल 500-500 नोटों की गड्डियों के साथ लेटा हुआ था। ये 15 लाख रुपए थे। एक दूसरे वीडियो में शिवम अग्रवाल जो सिर्फ 8वीं तक पढ़ा है, अफ्रीकी लड़की अरेबिका की जांच करता दिख रहा है। इससे पता चलता है कि ये सिंडिकेट देश ही नहीं, बल्कि साउथ अफ्रीका तक फैला है। पता चला कि अरेबिका से किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपए लिए गए थे। अभी तक कोई सर्जन नहीं पकड़ा गया पूरे केस में सबसे बड़ा पॉइंट ये है कि अब हुई गिरफ्तारियों में कोई भी यूरोलॉजिस्ट यानी किडनी का डॉक्टर नहीं है। पुलिस ने 29-30 मार्च की रात आहूजा हॉस्पिटल के सीसीटीवी फुटेज बरामद किए थे। ऑपरेशन के बाद 3 लोग कार से वापस जाते दिखे थे। इसमें से एक कार गाजियाबाद की तरफ गई, जिसमें मुदस्सर अली, कुलदीप राघव और राजेश कुमार थे। दूसरी कार मेरठ की तरफ गई। इसमें डॉ. रोहित, अफजल, वैभव और अमित सवार थे। तीसरी कार इस मामले में गुत्थी बन गई है, क्योंकि वह लखनऊ की तरफ गई थी। बताया जा रहा कि इस कार में एक सर्जन और प्राइवेट हॉस्पिटल के दो डॉक्टर थे। ये तीनों ऑपरेशन थिएटर के सीसीटीवी कैमरे में भी थे। लेकिन ये कौन हैं, लखनऊ के किस हॉस्पिटल से इनका संपर्क था, इसके बारे में अब तक कोई भी जानकारी पुलिस के हाथ नहीं लगी है। पुलिस ने इनकी तलाश में लखनऊ में कुछ जगहों पर छापेमारी भी की है। खेल में 50 से ज्यादा दलाल, डॉक्टर शामिल शिवम के फोन से मिली एक रिकॉर्डिंग से पता चला कि उसने 40 से 50 किडनी ट्रांसप्लांट करवाई हैं। एक वीडियो में पंजाब के मनिंदर आहूजा हॉस्पिटल के सामने खड़े होकर कह रहे थे कि इन लोगों ने मुझसे 43 लाख रुपए ले लिए, लेकिन अब तक किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया। अब ये सब पकड़ गए। हमारा तो पूरा पैसा डूब गया। हमारे पास आत्महत्या करने के अलावा कोई चारा नहीं है। शुरुआत के 4 दिन में 9 आरोपी पकड़े गए। पूछताछ के बाद इतने ही नाम और सामने आए। कानपुर पुलिस ने केस की जांच के लिए 10 टीमें बनाई हैं। ये टीमें कानपुर के अलावा लखनऊ, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस अभी तक डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, डॉ. मुदस्सर अली, डॉ. अमित, डॉ. वैभव, नवीन पांडेय को नहीं पकड़ पाई है। इनके पकड़े जाने के बाद केस की और भी परतें सामने आएंगी। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… किडनी बेचने वाला MBA स्टूडेंट गर्लफ्रेंड के सामने फूट-फूटकर रोया, कानपुर में पुलिसवालों के पैर पकड़े रुपए के लालच में अपनी किडनी बेचने वाले आयुष को हैलट अस्पताल से लखनऊ रेफर किया गया है। बिहार के बेगूसराय में रहने वाली आयुष की गर्लफ्रेंड आयुष से मिलने कानपुर भी आई। गर्लफ्रेंड को देखते ही आयुष फूट-फूटकर रोने लगा। उसने कहा- मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। पूरी खबर पढ़ें…
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