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    कानपुर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू:18 देशों के विशेषज्ञ सस्टेनेबल तकनीकों पर करेंगे मंथन

    3 hours ago

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    कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) में सोमवार को इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबल कंप्यूटिंग एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (ICSCIS-2026) का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 20 से 21 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें 18 देशों के विशेषज्ञ और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, मुख्य अतिथि प्रो. फाल्गुनी गुप्ता, प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा, डीन प्रो. दृष्टि मित्रा, निदेशक डॉ. आलोक कुमार, और कॉन्फ्रेंस संयोजक प्रो. रॉबिंस पोरवाल व डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस आयोजन को ANRF का वित्तीय सहयोग प्राप्त है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए देश-विदेश से 600 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। भारत के 15 से अधिक राज्यों के अलावा 18 देशों के प्रतिभागी इसमें शामिल हुए हैं। सम्मेलन में 25 अंतरराष्ट्रीय कीनोट स्पीकर्स अपने विचार प्रस्तुत करेंगे, जबकि 20 तकनीकी सत्र हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन-ऑफलाइन) में आयोजित किए जाएंगे। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि सस्टेनेबल कंप्यूटिंग और इंटेलिजेंट सिस्टम्स अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि ये मानव जीवन को सुरक्षित, सक्षम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विश्वविद्यालय की वैश्विक अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। मुख्य अतिथि प्रो. फाल्गुनी गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान और सस्टेनेबल तकनीकों का समन्वय भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा। उन्होंने ऐसे मंचों को वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया। रोमानिया की ऑरेल व्लाइकू यूनिवर्सिटी ऑफ अराड की प्रो. वेलेंटीना एमीलिया बालास ने ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन की सराहना की और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बताया। सम्मेलन में चयनित शोध पत्रों को SCITEPRESS, Bentham Science और Wiley Scrivener जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थानों में प्रकाशित किया जाएगा। प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि 600 से अधिक शोध पत्रों की प्राप्ति विश्वविद्यालय की मजबूत शोध क्षमता को प्रदर्शित करती है। कार्यक्रम के अंत में कॉन्फ्रेंस कन्वीनर प्रो. रॉबिंस पोरवाल ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का धन्यवाद किया। उद्घाटन सत्र में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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