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    कानपुर के 'साइलेंस ज़ोन' में शोर का सितम:अस्पतालों के बाहर नियमों की धज्जियां उड़ीं, 1000 रुपये के चालान का डर भी बेअसर

    2 hours ago

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    शहर को ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए यातायात विभाग ने एक महत्वाकांक्षी पहल की है। रावतपुर चौराहे (जी.टी. नर्सिंग होम) से लेकर कार्डियोलॉजी अस्पताल तक के करीब 500 मीटर के दायरे को 'नो हॉर्न जोन' घोषित किया गया है। विभाग का मकसद था कि अस्पतालों के पास सन्नाटा रहे और मरीजों को शोर से राहत मिले, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। भास्कर की टीम ने जब इस 'नो हॉर्न जोन' का जायजा लिया, तो नजारा चौंकाने वाला था। यहां नियम सिर्फ कागजों और साइन बोर्ड्स तक ही सिमटे नजर आए। ग्राउंड जीरो: न पुलिस दिखी, न खौफ; बजता रहा शोर हैरानी की बात यह है,कि जिस 500 मीटर की रेंज को शांत रखने की जिम्मेदारी पुलिस की थी, वहां एक भी ट्रैफिक पुलिसकर्मी मुस्तैद नहीं मिला। वाहन चालक बेरोकटोक और बेवजह हॉर्न बजाते हुए निकल रहे थे। यातायात विभाग ने प्रावधान किया है,कि बेवजह हॉर्न बजाने पर 1000 रु का चालान कटेगा, लेकिन जब निगरानी करने वाला ही कोई न हो, तो नियम का पालन कौन करे? नतीजतन, यह नई कवायद पहले ही चरण में फेल होती दिख रही है। मरीजों का इलाका, पर राहत की जगह आफत यह पूरा क्षेत्र संवेदनशील है। यहां कार्डियोलॉजी और मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल जैसे बड़े संस्थान हैं, जहां न केवल कानपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश से गंभीर मरीज आते हैं। कायदे से यहाँ शांति होनी चाहिए, लेकिन ई-रिक्शा, ऑटो और टेम्पो के शोर ने इसे शहर का सबसे कोलाहल वाला हिस्सा बना दिया है। पब्लिक की दलील 'साहब', जाम में बिना हॉर्न कैसे चलें?' वाहन चालक राजेश से जब हमने इस नियम के बारे में बात की, तो उन्होंने कड़वी हकीकत बयां की। उनका कहना है, सड़क पर ऑटो और ई-रिक्शा की बाढ़ आई हुई है। कदम-कदम पर जाम लगता है। ऐसे में रास्ता पाने के लिए हॉर्न बजाना मजबूरी है, शौक नहीं। जब तक सड़कों से अतिक्रमण और अवैध वाहन कम नहीं होंगे, तब तक यह नियम लागू करना नामुमकिन है। राजेश जैसे कई लोगों का मानना है,कि 1000र रुपये का जुर्माना वसूलना समाधान नहीं है। सरकार को पार्किंग और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट पर काम करना चाहिए। यदि लोग मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करें, तो सड़कों पर दबाव कम होगा और शोर अपने आप घट जाएगा। अधिकारी बोले-अभी तो ट्रायल है, सख्ती अब होगी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि, यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसकी सफलता के बाद इसे शहर के अन्य इलाकों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने ट्रैफिक पुलिस को इस क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और सख्ती से चालान काटने के निर्देश दिए हैं। डीसीपी ट्रैफिक रविन्द्र कुमार ने कहा कि, जल्द ही इस जोन में पुलिसकर्मियों की स्थायी तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही एक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि लोग डर से नहीं बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझकर हॉर्न न बजाएं।
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