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    कंडौरा गांव में बुलडोजर कार्रवाई का विरोध:भाकपा (माले) कार्यकर्ताओं ने राजस्व विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन

    6 hours ago

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    रायबरेली में 24 अप्रैल 2026 को हरचंदपुर ब्लॉक के कंडौरा गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में भाकपा (माले) ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विकास भवन से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाला। जिलाधिकारी कार्यालय पर सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के जिला सचिव हनोमान अंबेडकर ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में उच्च न्यायालय की जनहित याचिका और तहसीलदार कोर्ट के फैसले की आड़ ली गई है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अति पिछड़ी जाति के 127 परिवारों को बेदखल करने की तैयारी की जा रही है, जिसकी शुरुआत कुछ घरों को ध्वस्त करके की गई है। अंबेडकर ने दावा किया कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों और कुछ लोगों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के सहारे गरीबों को गांव से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिस रास्ता भूमि का हवाला देकर बेदखली की गई है, वह पहली चकबंदी से पहले खाता संख्या 281, गाटा संख्या 1079 के तहत आबादी के रूप में दर्ज थी, जिसका रकबा 15 बिस्वा था। उन्होंने आगे कहा कि चकबंदी के दौरान इसी आबादी भूमि को रास्ते के रूप में दर्ज कर आबादी से अलग कर दिया गया और इसका रकबा बढ़ा दिया गया। इसी प्रकार, गाटा संख्या 970 तालाब के रूप में दर्ज है, लेकिन इसमें बुद्धू पुत्र ननकऊ का अंश संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज है, जिस पर बने मकानों को भी ध्वस्त किया गया। अंबेडकर के अनुसार, गाटा संख्या 1078, जिसका रकबा 2 बीघा 13 बिस्वा तालाब अंकित था, चकबंदी में इसका रकबा बढ़ाकर पौने चार बीघा कर दिया गया। इस तरह, 1079 ब को 1078 आ में मिलाकर तालाब बनाने की कार्रवाई के कारण उसमें बसे लोग तालाब के दायरे में आ गए। इसी तरह, गाटा संख्या 1081 चकबंदी से पहले विंदा पुत्र भगवन्ता के नाम दर्ज थी, जिसे चकबंदी में तालाब बना दिया गया। कामरेड अंबेडकर ने कहा कि जिन मकानों को रास्ता भूमि बताकर बुलडोज किया गया है, उसकी चौड़ाई 60 फुट से अधिक है। यह पीछे का हिस्सा है, जबकि पीछे बने रास्ते के सामने वाले हिस्से में काबिज लोगों को अभयदान दे दिया गया है। अभी सैकड़ों घर इसी रास्ते और तालाब के नाम पर उजड़ने का इंतजार कर रहे हैं। तो क्या मार्ग की चौड़ाई उसी समय हाईवे के अनुरूप तय कर दी गई थी, या कुछ विशिष्ट लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इन गरीबों की बलि चढ़ाई जा रही है? उन्होंने कहा कि अभिलेखों में किए गए हेरफेर के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। यदि 1025 के पूर्व से वहां आबादी थी और लोगों के घर बने हुए थे, तो यह लोगों को उजाड़कर उनकी कीमती जमीन छीनने की कोशिश है। उन्होंने आगे कहा कि तथ्यों के आधार पर तहसीलदार न्यायालय की प्रक्रिया में लेखपाल की भूमिका, अभिलेखों में हेरफेर कर बेईमानीपूर्ण बदलाव के जरिए आदेशों को प्रभावित करने और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के माध्यम से पूरे गांव के गरीबों, अतिपिछड़ों, दलितों और अनुसूचित जनजाति के बाशिंदों को उजाड़ने की कार्रवाई को विधिक रूप देने की कोशिश की जा रही है। अधिकांश ग्रामीण अशिक्षा और गरीबी के कारण इस जाल में फंसते गए। बाद में जिलाधिकारी को संबोधित तीन सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने और राहत पाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई रोकते हुए समय देने, ग्राम सभा कण्डौरा ब्लॉक हरचंदपुर, जिला रायबरेली के राजस्व अभिलेखों में मनमाने और गैरविधिक परिवर्तन व इंद्राज की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने तथा जांच में उपरोक्त तथ्य सही पाए जाने पर सभी नोटिस वापस लेने की मांग की गई। कार्यक्रम में भाकपा (माले) के पूर्व जिला सचिव उदय पटेल, किसान नेता फूलचंद, इंकलाबी नौजवान सभा के जिला अध्यक्ष गुलाम अहमद सिद्दीकी, खेग्रामस जिला सचिव राजेश कुमार, ऐक्टू नेता रामगोपाल सहित अन्य लोग भी शामिल रहे।
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