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    जदयू नेता केसी त्यागी ने रालोद ज्वाइन किया:जयंत चौधरी बोले- त्यागीजी मेरे जन्मदिन का किस्सा सुनाते हैं; त्यागी बोले- पद लेने नहीं आया हूं

    12 hours ago

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    पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता केसी त्यागी ने रविवार को राष्ट्रीय लोकदल ज्वाइन कर लिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने उनको सदस्यता दिलाई। दिल्ली में आयोजित एक किसान समृद्धि गोष्ठी में वे रालोद में शामिल हुए। जयंत चौधरी ने कहा- मैं केसी त्यागी को जन्म से देखता आ रहा हूं। वह अक्सर मेरे जन्मदिन से जुड़ा किस्सा भी सुनाते हैं। जब पार्टी में शामिल होने की बात हुई तो उन्होंने जरा भी देर नहीं किया। आज एक बार फिर मुझे त्यागी जी के साथ काम करने का मौका मिला है। केसी त्यागी लंबे समय से जदयू से जुड़े रहे हैं। वह पार्टी के मुख्य प्रवक्ता थे। उनको पद से भी हटा दिया गया था। पिछले दिनों जनता दल यूनाइटेड की मेंबरशिप का रिन्यूअल नहीं कराए जाने के बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। इन अटकलों को और बल उस समय मिला जब 11 जनवरी 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित बुक फेयर में उनकी लिखित किताब 'संकट की खेती' का लोकार्पण जयंत चौधरी ने किया। विमोचन के दौरान जयंत ने केसी त्यागी को चौधरी चरण सिंह का सच्चा शिष्य बताते हुए कहा था कि मैं त्यागीजी को मनाने आया हूं। हर दल में एक केसी त्यागी होना चाहिए। किताब, चौधरी चरण सिंह और स्वामी सहजानंद सरस्वती को समर्पित है, जो किसानों के संघर्ष पर प्रकाश डालती है। पढ़िए जयंत चौधरी की प्रमुख बातें… जयंत चौधरी ने कहा- त्यागी जी की एक ही इच्छा है-चौधरी चरण सिंह जैसा बनना। चौधरी चरण सिंह जैसा बनना आसान नहीं, उसके लिए बहुत बड़ी तपस्या करनी पड़ती है। उनके जैसा न कोई हुआ है और न ही हो सकता है। अगर आज चौधरी चरण सिंह होते, तो देश की राजनीति की तस्वीर कुछ और होती। हम चाहकर भी उनके जैसे नहीं बन सकते। कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि पार्टी का विस्तार तभी संभव है, जब नए और पुराने लोगों को साथ जोड़ा जाए। उन्हें यह समझाना होगा कि लोकदल क्यों जरूरी है। त्यागी बोले- मैं कोई पद लेने नहीं आया ज्वाइनिंग के बाद त्यागी ने कहा- जयंत जी मुझे माफ करना आपसे कोई पद नहीं चाहिए। आपके दादाजी चौधरी साहब ने मुझे इतना दिया है कि अब मुझे पद की इच्छा नहीं है। बस चौधरी साहब का लगाया ये पौधा ऐसे ही बढ़े,फले फूले मुझे यही चाहिए। मैं जयंत जी को चौधरी चरण सिंह जैस बनते देखने आया हूं। कार्यक्रम में ढोल-नगाड़ों से हुआ जयंत चौधरी का स्वागत कार्यक्रम में पहुंचने पर केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी का ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया गया। इस दौरान RLD के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, मंत्री अनिल कुमार, यशवीर, सांसद राजकुमार सांगवान, पूर्व सांसद मलूक नागर, पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा सहित वेस्ट यूपी के कई नेता मौजूद रहे। वेस्ट यूपी की त्यागी बिरादरी रालोद के साथ जुड़ सकती राजनीतिक जानकार मानते हैं कि केसी त्यागी का रालोद के साथ आने से पश्चिमी यूपी की त्यागी बिरादरी में बढ़िया मैसेज जा सकता है और वह पार्टी के साथ जुड़ सकती है। इसका इंपैक्ट 2027 के चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। जानकारों की मानें तो केसी त्यागी खुद को चौधरी चरण सिंह का वैचारिक पुत्र मानते हैं। उन्होंने अजित सिंह के सामने भी इस बात को कई बार कहा कि चौधरी साहब के जैविक पुत्र आप हैं, लेकिन वैचारिक पुत्र मैं हूं। गाजियाबाद में किसान परिवार में जन्मे त्यागी केसी त्यागी का जन्म यूपी के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर स्थित मोरटा गांव में हुआ था। वह साधारण किसान परिवार से थे। उनके पिता जगराम सिंह त्यागी और माता रोहताश त्यागी थीं। उन्होंने मुरादनगर में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद त्यागी ने मेरठ विश्वविद्यालय से B.Sc. की डिग्री ली थी। गाजियाबाद से पहली बार जनता दल के टिकट पर सांसद बने केसी त्यागी जनता दल के सिंबल पर 1989 में गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन एमपी प्रेम मोहन को हराया था। सांसद प्रेम मोहन, मोहन मिकिंस कंपनी के मालिक थे। हालांकि, 1991 के चुनाव में रामलहर में वह भाजपा के रमेशचंद तोमर से हार गए। यह वह दौर था जब जनता दल में विघटन होने लगा था। यूपी के कद्दावर नेता मुलायम सिंह यादव ने जनता दल से अलग होकर 1992 में समाजवादी पार्टी बनाया। केसी त्यागी भी सपा में शामिल हो गए। लेकिन बताया जा रहा कि त्यागी को कुछ खास तवज्जो नहीं मिली। वह जनता दल से ही अलग होकर बनी समता पार्टी में शामिल हो गए। समता पार्टी, जार्ज फर्नांडीज-नीतीश कुमार आदि ने बनाई थी। समता पार्टी का जनता दल यू में विलय के बाद वे भी जदयू में शामिल हो गए। फिर 2004 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जदयू को मेरठ सीट लड़ने के लिए दी। तब केसी त्यागी ने जदयू से मेरठ संसदीय सीट से चुनाव लड़ा लेकिन, बसपा से मेयर रहे शाहिद अखलाक से हार गए। पांच बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके केसी त्यागी को बिहार से नीतीश कुमार ने 2013 में राज्यसभा भेजा। जदयू के वह प्रधान महासचिव और मुख्य प्रवक्ता के पद पर भी काम कर चुके हैं। क्यों यूपी में फिर हुए सक्रिय? नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के लिए दिल्ली में मोर्चा संभालने वाले केसी त्यागी अचानक से यूपी में क्यों सक्रिय हो गए हैं? जानकार बताते हैं कि केसी त्यागी की ज्वाइनिंग के पीछे उनके बेटे का राजनैतिक भविष्य है। उनके बेटे अमरीश 2022 के चुनाव में भाजपा में शामिल हुए थे। लेकिन बीजेपी ने अमरीश को कोई खास तवज्जो नहीं दी और वे साइडलाइन कर दिए गए हैं। 2027 में केसी त्यागी अपने बेटे को चुनावी राजनीति में लांच करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने रालोद के माध्यम से यूपी में फिर सक्रियता बढ़ाई है। किठौर या गाजियाबाद से टिकट मांग सकते हैं सीनियर जर्नलिस्ट अनिल बंसल कहते हैं, मेरठ की किठौर सीट पर भाजपा से सतवीर त्यागी 2017 में विधायक रह चुके हैं। गाजियाबाद का मुरादनगर भी त्यागियों की जीती सीट है। भाजपा से अजीत पाल त्यागी यहां मौजूदा विधायक हैं। 2017, 2022 का चुनाव जीते हैं। इससे पहले उनके पिता स्व. राजपाल त्यागी इस सीट से 7 बार चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री रहे। ऐसे में केसी त्यागी रालोद के जरिए NDA में इन सीटों से बेटे अमरीश के लिए टिकट का दावा करेंगे। केसी त्यागी और रालोद को क्या फायदा मिलेगा? लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को फिर से दोहराया कि सत्ता में आने पर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपए देंगे। समाजवादी पेंशन फिर से शुरू करेंगे। फिल्म धुरंधर को लेकर मचे विवाद के बीच बिना नाम लिए कहा कि भाजपा अब पैसे देकर फिल्में बनवा रही है। पढ़ें पूरी खबर
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