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    'जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर करेंगे हमला', अमेरिका-तेहरान शांति वार्ता के बीच Benjamin Netanyahu की खुली चेतावनी

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    पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण सैन्य टकराव को शांत करने के लिए जहां एक तरफ वाशिंगटन और तेहरान कूटनीतिक टेबल पर हैं, वहीं दूसरी तरफ इजराइल के कड़े रुख ने इस शांति प्रक्रिया पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान पर 'तीसरी बार' भी हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। नेतन्याहू के इस बयान ने साफ कर दिया है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही हो, लेकिन इजराइल के लिए सैन्य कार्रवाई का विकल्प आज भी पूरी तरह खुला हुआ है। इसे भी पढ़ें: 'कैमरों की लोकेशन पता थी, चोरी के बाद वॉशरूम में छिपाते थे कैश', आरोपी अविनाश शुक्ला का पुलिस के सामने बड़ा खुलासा | Ram Mandir Donation Scam'परमाणु तबाही को हमने रोका, आगे भी कड़ा एक्शन संभव'इजराइल के 'चैनल 14' से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तेहरान के खिलाफ किए गए पिछले सैन्य ऑपरेशन्स का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा:"ईरान में, हमने खुद को परमाणु बमों की तबाही से बचाया है। अगर हमारी सुरक्षा चिंताएं हल नहीं हुईं, तो जरूरत पड़ने पर तीसरी बार भी ऐसा ही हमला किया जाएगा। इजराइल, ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और इसके लिए हम स्वतंत्र रूप से कार्रवाई जारी रखेंगे।"तुर्की की सरकारी 'अनादोलु एजेंसी' के अनुसार, नेतन्याहू का यह बयान किसी भी ऐसे वैश्विक समझौते के प्रति इजराइल के कड़े विरोध को दर्शाता है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट नहीं करता।नाजुक मोड़ पर शांति वार्ता: 'इस्लामाबाद ढांचा' और ट्रंप की चेतावनीइजराइल की यह आक्रामक चेतावनी ऐसे समय में आई है जब कतर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए शुरुआती युद्धविराम समझौते (इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन) को एक स्थायी राजनीतिक शांति संधि में बदलने की कोशिशें जारी हैं। इस ड्राफ्ट मेमोरेंडम में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं:चरणबद्ध तरीके से दोनों देशों के बीच सैन्य आक्रामकता को रोकना। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को जहाजों के लिए सुरक्षित खोलना। ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और उसकी परमाणु गतिविधियों की कड़े अंतरराष्ट्रीय तंत्र से निगरानी।डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को टोका:इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल को संयम बरतने की सख्त हिदायत दी है। मीडिया संस्थान Axios के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को आगाह करते हुए कहा है कि यदि इजराइल ने दोबारा बड़ा हमला किया, तो वह वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग (Isolate) पड़ सकता है। ट्रंप ने कहा, "मैंने कहा, 'बिबी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए, वरना बहुत जल्द तुम दुनिया में अकेले पड़ जाओगे।'" लेबनान को लेकर इज़राइल-ईरान के बीच लड़ाईइन कोशिशों के बावजूद तनाव बना हुआ है। बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर इज़राइली हमलों के बाद, ईरान ने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इज़राइल ने ईरान के अंदर मौजूद ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।अमेरिका ने इन हमलों में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इज़राइल के हवाई सुरक्षा अभियानों में मदद की।नेतन्याहू ने सैन्य अभियान का बचाव जारी रखा है। उनका दावा है कि इज़राइली अभियानों ने ईरान और हिज़्बुल्लाह दोनों को काफी कमज़ोर कर दिया है और जिसे उन्होंने तत्काल परमाणु खतरा बताया था, उसे टाल दिया है। इसे भी पढ़ें: Explained Roads Science | 40°C में क्यों पिघल जाती हैं ब्रिटेन की सड़कें, जबकि 50°C की 'आग' भी झेल जाता है भारत?नेतन्याहू का लेबनान दौराइसी माहौल में, नेतन्याहू ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइल के कब्ज़े वाले इलाकों का दौरा किया और वादा किया कि बेरूत के साथ हालिया सुरक्षा समझौतों के बावजूद इज़राइली सेना वहां बनी रहेगी।नेतन्याहू ने इज़राइली सैनिकों से कहा, "हमारा ज़ोर इस बात पर है कि जब तक खतरा खत्म नहीं हो जाता, हम दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ेंगे।"उन्होंने कहा, "और जब तक हिज़्बुल्लाह यहां हथियारबंद होकर हमें धमकाता रहेगा, हम भी यहीं बने रहेंगे।"यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका समर्थित सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ खास इलाकों से इज़राइल के सीमित रूप से पीछे हटने और लेबनान की सेना का नियंत्रण बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद नेतन्याहू का कब्ज़े वाले लेबनानी इलाके का यह पहला दौरा था।वाशिंगटन और तेहरान मौजूदा ढांचे को एक पक्के समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इज़राइल एकतरफा सैन्य कार्रवाई का अपना अधिकार बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले हफ़्तों में यह तय हो सकता है कि कूटनीति कामयाब रहती है या यह इलाका फिर से टकराव की ओर बढ़ता है। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi
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