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    जौनपुर में शिक्षकों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ मशाल जुलूस:केंद्र सरकार से कानून रद्द करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

    2 hours ago

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    जौनपुर में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के तत्वावधान में शिक्षकों ने टीईटी (TET) परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में एक विशाल मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस बीआरपी इंटर कॉलेज के प्रांगण से शुरू होकर कलेक्ट्रेट स्थित शहीद स्मारक पर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान शिक्षकों ने 'नो टेट' और 'आरटीई एक्ट' जैसे नारे लगाए। उन्होंने अपनी सेवा सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। इस मशाल जुलूस का नेतृत्व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह मुन्ना और जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने किया। इसमें अटेवा के जिलाध्यक्ष चंदन सिंह, यूटा के जिलाध्यक्ष डॉ. हेमंत सिंह, पूर्व माध्यमिक विद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील उपाध्याय, विशिष्ट बीटीसी संघ के राम मूरत यादव, पीएसपी के जिलाध्यक्ष सुधीर सिंह, मंत्री विकास सिंह, टीएससीटी के अरविंद यादव, शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष संदीप यादव और एससी-एसटी के जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। शिक्षक नेता डॉ. विजय रघुवंशी, रुद्रसेन सिंह, काशी नंदन मिश्रा और कई शिक्षिकाएं भी उपस्थित थीं। शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई। शिक्षकों ने अपील की कि मानसून सत्र में लोकसभा में विधेयक लाकर पूरे भारतवर्ष के शिक्षकों को इस कानून से मुक्ति दिलाई जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून असंवैधानिक है और इसे केवल शिक्षकों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि एक लोकतांत्रिक देश में 25 लाख शिक्षकों पर इसे लागू करना मानवता और नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। शिक्षकों ने आरटीई एक्ट के तहत बनाए गए संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं और उन्हें इस कानून से मुक्ति नहीं मिली, तो वे दिल्ली और लखनऊ की सड़कों पर बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे। शिक्षकों ने खुद को राष्ट्र निर्माता और सरकार की आंख व चेतना बताया।
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