Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    IIT में बढ़ते सुसाइड रोकने का 'रामबाण':डॉ. बोले- 90% मामलों में मानसिक बीमारी जड़, केटामाइन थेरेपी से तुरंत हटेंगे नकारात्मक विचार

    1 hour ago

    1

    0

    देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, खासकर IIT कानपुर में बढ़ते सुसाइड के मामलों ने देशभर में चिंता पैदा कर दी है। पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता छात्रों को इस कदर तोड़ रही है कि वे मौत को गले लगा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच चिकित्सा जगत से एक राहत भरी खबर सामने आई है। कानपुर के एलएलआर (LLR) अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञों ने एक ऐसी थेरेपी का सफल प्रयोग किया है, जो आत्महत्या के विचारों को पल भर में खत्म कर सकती है। एलएलआर अस्पताल के मनोरोग विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. धनंजय पांडे के मुताबिक, 'केटामाइन' (Ketamine) दवा सुसाइडल टेंडेंसी यानी खुदकुशी के विचारों को रोकने में 'एंटीडोट' यानी जहर काटने वाली दवा की तरह काम कर रही है। 90% मामलों में मानसिक बीमारी है मुख्य वजह डॉ. धनजंय पांडे ने बताया कि, सुसाइड के 90 प्रतिशत मामलों के पीछे कोई न कोई मानसिक विकार जरूर होता है। आमतौर पर डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए महीनों तक दवाइयां और काउंसलिंग की प्रक्रिया चलती है, लेकिन जब मामला हाथ से निकलता दिखे या मरीज बेहद गंभीर स्थिति में हो, तो केटामाइन थेरेपी सबसे कारगर साबित होती है। यह उन छात्रों या मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो गहरे अवसाद की वजह से जीवन छोड़ने का मन बना चुके हैं। बेहोशी की दवा से कैसे रुक रही मौत? केटामाइन का इस्तेमाल वैसे तो दशकों से सर्जरी के दौरान मरीजों को बेहोश करने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन मनोरोग विशेषज्ञ अब इसका इस्तेमाल एक बिल्कुल नई तकनीक से कर रहे हैं। इस थेरेपी की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'लो-डोज़ तकनीक' है। इसमें मरीज को बेहोश करने वाली भारी खुराक नहीं दी जाती, बल्कि दवा की बहुत कम मात्रा शरीर में पहुंचाई जाती है। 60 मरीजों पर सफल ट्रायल और एडल्ट्स पर असर डॉ. धनजंय पांडेय ने बताया कि, अब तक करीब 60 वयस्क मरीजों पर इस दवा का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका है और इसके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। फिलहाल इस थेरेपी का इस्तेमाल सिर्फ एडल्ट्स पर ही किया जा रहा है और इसे बच्चों या बुजुर्गों को देने से परहेज किया गया है। यह उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जिन पर सामान्य दवाइयां असर करना बंद कर चुकी हैं, जिसे मेडिकल विज्ञान में 'ट्रीटमेंट रेजिस्टेंट डिप्रेशन' कहा जाता है। इन स्थितियों में भी मिल रही बड़ी राहत यह थेरेपी सिर्फ सुसाइड रोकने तक सीमित नहीं है। गंभीर अवसाद से जूझ रहे मरीज जो लंबे समय से उदास हैं, उनके इलाज में भी इसका उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा PTSD यानी किसी बड़े आघात से गुजर रहे लोग और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी जटिल मानसिक स्थितियों के प्रबंधन में भी केटामाइन काफी असरदार साबित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की आधुनिक मेडिकल मदद उपलब्ध कराई जाए, तो छात्रों को असमय मौत के मुंह में जाने से निश्चित रूप से बचाया जा सकता है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    मथुरा में दिखा ईद का चांद:शहर में खुशी का माहौल, बाजारों में देर रात तक खरीदारी,आज मनाई जा रही ईद
    Next Article
    मथुरा में घना कोहरा, ठंड बढ़ी:आंधी-बारिश के बाद तापमान गिरा, किसानों की चिंता बढ़ी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment