Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    हत्यारे सलीम की कहानी- 'खान' हटाकर नाम में 'वास्तिक' जोड़ा:कारपेंटर बना, महिलाओं के कपड़े बेचे; 26 साल बाद गाजियाबाद से अरेस्ट

    2 hours ago

    2

    0

    यूपी के गाजियाबाद में रहने वाला सलीम वास्तिक उर्फ सलीम खान न सिर्फ हत्यारा है, बल्कि उसकी हकीकत भी बेहद डरावनी है। फरवरी में 2 कट्‌टरपंथी भाइयों ने जब का गला रेता तो उसने काफी सुर्खियां और सहानुभूति बटोरी। सीएम योगी ने एक्शन लिया, एनकाउंटर में दोनों हमलावर मार गिराए गए। पुलिस ने सुरक्षा दी। लेकिन शनिवार को जब दिल्ली पुलिस ने सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया तो उसका वास्तविक चेहरा सामने आ गया। सलीम अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा होने के बाद 26 साल तक दिल्ली पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। जिस मुस्लिम धर्म में उसका जन्म हुआ, उसे भी छोड़ दिया। नाम से ‘खान’ हटाकर वास्तिक जोड़ा। हरियाणा के करनाल में कारपेंटर बना तो मेरठ और गाजियाबाद में महिलाओं के कपड़े बेचे। पढ़िए कातिल सलीम वास्तिक की कारपेंटर बनने से लेकर महिलाओं के कपड़े बेचने तक की कहानी… पहले उस केस को जानिए, जिसमें फरार था सलीम… दोस्त अनिल के साथ मिलकर छात्र की हत्या की उत्तर- पूर्वी दिल्ली के सीमेंट कारोबारी सीताराम का 13 साल का बेटा संदीप दिल्ली के दरियागंज स्थित रामजस स्कूल में पढ़ाई करता था। 20 जनवरी, 1995 को सर्द मौसम में दोपहर के साढ़े 11 बजे संदीप दूसरी पाली में पढ़ने के लिए घर से निकला था। दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से शाम 6 बजे तक थी। संदीप शाम के 7 बजे भी घर नहीं पहुंचा, इससे परिवार चिंतित हो गया। संदीप की मां और उसके पिता ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। अगले दिन 21 जनवरी, 1995 को पिता की दुकान पर पीसीओ से एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने फोन उठाते ही कहा, ‘तुम्हारा बेटा संदीप हमारे कब्जे में है और एक घंटे बाद कॉल करेंगे।’ यह सुनते ही संदीप के पिता सीताराम के होश उड़ गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी। दिल्ली के गोकलपुरी थाने में 21 जनवरी को ही अपहरण का केस दर्ज किया गया। ‘बेटा चाहिए तो 30 हजार का इंतजाम करो’ सलीम ने 21 जनवरी को ही छात्र के पिता को दोबारा कॉल करके कहा, ‘यदि बेटा चाहिए तो 30 हजार दो। यह पैसे गाजियाबाद के लोनी फ्लाईओवर के पास बस अड्‌डे पर शाम साढ़े 4 बजे पहुंचाने होंगे। पैसे ऐसी बस में रखने होंगे, जो यूपी के बागपत जिले में जा रही हो। अगर पुलिस को बताने का प्रयास किया तो तुम्हारे बेटे को मौत के घाट उतार देंगे।' यह सुनते ही संदीप के कारोबारी पिता सहम गए। पड़ोसी ने बताया मास्टरजी को रिक्शे में जाते देखा पुलिस बच्चे की बरामदगी के लिए लग गई। जांच के दौरान शक रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट्स ट्रेनर सलीम खान पर गया। एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि ‘मैंने बच्चे को एक लंबे लड़के "मास्टरजी" के साथ रिक्शे में जाते देखा।’ पुलिस बच्चे के पिता को लेकर सलीम खान के पास पहुंची। सलीम को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में सलीम ने गुनाह कबूल किया कि उसने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर संदीप का अपहरण किया। फिर मुस्तफाबाद स्थित एक गंदे नाले के पास बच्चे की हत्या कर दी। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर शव बरामद किया। पिता ने बेटे के शव की पहचान की। अनिल ने मिट्‌टी में दबा दी थी बच्चे की घड़ी पुलिस अब सलीम को अरेस्ट कर चुकी थी, जबकि दूसरे साथी अनिल की तलाश थी। 4 फरवरी, 1995 को अनिल दिल्ली कोर्ट में सरेंडर कर जेल चला गया। पुलिस ने अनिल की झुग्गी से खुदाई कर संदीप की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद किया। पूछताछ में पता चला कि फिरौती की कॉल अनिल ने की थी, जबकि हत्या सलीम ने। दिल्ली की कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई पुलिस ने सलीम और अनिल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। 5 अगस्त, 1997 को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सलीम खान और अनिल को दोषी ठहराया। उम्रकैद की सजा सुनाई। 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। सलीम ने पैरोल पर बाहर आने के लिए अर्जी लगाई, वहीं अपने वकील के माध्यम से अंतरिम जमानत की याचिका दाखिल की। पैरोल पर जैसे ही वह तिहाड़ जेल से बाहर आया, फरार हो गया। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने सलीम की सजा को बरकार रखा। हेड कांस्टेबल ने निभाई गिरफ्तारी में अहम भूमिका दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम पुराने गंभीर मामलों में फरार अपराधियों पर निगरानी कर रही थी। इसी दौरान हेड कांस्टेबल (HC) मिंटू यादव को सूचना मिली कि मशहूर यूट्यूबर सलीम खान उर्फ सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक वही फरार अपराधी है, जिसे उम्रकैद की सजा हुई थी। यहां से दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम जांच में कोर्ट के रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट और पुराने फोटो के आधार पर पुष्टि करने में लग गई। गोपनीय तरह से गाजियाबाद के लोनी में सलीम की पूरी रेकी की। इसके बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी ने 8 सदस्यीय टीम के साथ सलीम को अरेस्ट करते हुए पूछताछ की। सलीम ने कैसे पहचान बदली, जानिए… भागकर करनाल में कारपेंटर का काम किया पूछताछ में सलीम ने पुलिस को बताया कि दिल्ली में 1995 में जब वह रामजस स्कूल, दरियागंज में मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देता था तो मुस्ताफाबाद और दिल्ली में साइकिल पर जैकेट सप्लाई का काम भी करता था। साल 2000 में फरार होने के बाद वह कभी अपने घर शामली नहीं गया। हरियाणा के करनाल में रहने लगा। यहां एक कारपेंटर की दुकान पर कुछ दिन काम सीखा और फिर अलमारी बनाने का काम किया। एक साल बाद ही ठिकाना बदल दिया और फिर अंबाला में छिप गया। जहां अलमारी बनाने का पुराना काम करता रहा। फरार होने के 10 साल बाद गाजियाबाद के लोनी में 2010 में किराए के कमरे में रहने लगा। जहां अपना नाम सलीम वास्तिक रख लिया। उसने महिलाओं के कपड़ों और अन्य सामान की शॉप खोली। धीरे-धीरे उसे लगा कि दिल्ली पुलिस उसे नहीं तलाशेगी। सलीम ने अपनी पत्नी अफसाना बेटे और बेटी को भी अपने से दूर रखा। पत्नी हमेशा दूसरे मकान में रहती थी। फरारी के दौरान क्या किया फरवरी में सलीम वास्तिक को 14 चाकू मारे गए थे ----------------- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में विश्वकर्मा लड़की की मौत पर सियासत:राहुल-प्रियंका ने पूछा- बेटियां असुरक्षित क्यों? अखिलेश ने पिता का वीडियो दिखाया गाजीपुर में 16 साल की लड़की की मौत पर सियासत शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी सांसद बहन प्रियंका गांधी ने शनिवार को केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा है। लड़की के साथ रेप और उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाने का ऐलान किया है। अखिलेश ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय पर मीडिया से कहा, अगर परिवार मना कर देगा तो हम मिलने नहीं जाएंगे, लेकिन परिवार मना नहीं कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    जन्मदिन पार्टी में फायरिंग, 3 युवकों की मौत:बुलंदशहर में केक लगने पर दोस्तों के बीच विवाद, सभासद के भाई-भतीजे की मौत
    Next Article
    आमिर खान बोले- बच्चों को वक्त नहीं दे पाया:फिल्म ‘एक दिन’ से पूरी हुई कमी, जुनैद की इंडिपेंडेंस पर गर्व, कहानी पर जताया भरोसा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment