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    हरिद्वार में 'एक्स मुस्लिम यात्रा' पर FIR करेगी गंगा सभा:कहा- मुस्लिम टोपी पहनकर हरकी पैड़ी में आए, ये सनातन का अपमान, बख्शेंगे नहीं

    7 hours ago

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    उत्तरप्रदेश के बिजनौर से निकल आज हरिद्वार में खत्म हुई ‘एक्स मुस्लिम यात्रा’ पर गंगा सभा FIR करने की तैयारी में है। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस पूरी यात्रा में शामिल लोगों पर धार्मिक आस्थाओं के अपमान का आरोप लगाते इसे प्रोपेगेंडा बताया है। गंगा सभा का कहना है कि हरकी पैड़ी के पूरे क्षेत्र में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन है, इसके बावजूद यात्रा में शामिल लोग मुस्लिम टोपी पहने ब्रह्मकुंड क्षेत्र तक आए। नितिन गौतम ने कहा है कि ये काम जानबूझकर किया गया और इसका उद्देश्य हिंदुओं की भावनाओं को भड़काना था। वहीं, यात्रा के आयोजक और इसमें शामिल संत समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह यात्रा धार्मिक स्वतंत्रता और भयमुक्त जीवन के अधिकार को लेकर निकाली गई थी। उनका दावा है कि इसमें शामिल लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं और समाज में जागरूकता फैलाना ही उद्देश्य था। पहले जानिए क्या है ‘एक्स मुस्लिम पदयात्रा’… 60 से ज्यादा लोगों की इस यात्रा के संयोजक इमरोज़ आलम के मुताबिक, ‘एक्स मुस्लिम पदयात्रा’ उन लोगों के लिए निकाली गई है जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया है। यह पदयात्रा 11 अप्रैल को बिजनौर के गंगा बैराज से शुरू हुई और दो दिन में करीब 85 किलोमीटर का सफर तय कर हरिद्वार के हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड पहुंची। इमरोज़ आलम ने इसे दुनिया की पहली ऐसी पदयात्रा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वाले लोगों के “जीने के अधिकार” की बात उठाना है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोगों को धमकियां मिलती हैं, इसी कारण कई प्रतिभागी चेहरा ढककर यात्रा में शामिल हुए। 4 प्वॉइंट्स में समझिए क्यों भड़की गंगा सभा ‘एक्स मुस्लिमों को अधिकार दिलाने के लिए निकाली यात्रा’ यात्रा के संयोजक इमरोज़ आलम ने कहा कि यह पदयात्रा उन लोगों के लिए निकाली गई है जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया है। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें अपनी पसंद से जीने का अधिकार मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की घोषणा के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलीं और एक एक्स मुस्लिम सलीम नाम के व्यक्ति पर हमला भी हुआ। आलम के अनुसार, इसी वजह से कई प्रतिभागी खुलकर सामने नहीं आ सके और डर के कारण अपनी पहचान छुपाकर यात्रा में शामिल हुए। ‘टोपी पहचान का प्रतीक, मुस्लिम नहीं’ टोपी पहनकर यात्रा में शामिल लोगों पर उठे सवालों पर इमरोज़ आलम ने कहा कि वे लोग मुस्लिम नहीं हैं, बल्कि अपनी पहचान दिखाने के लिए प्रतीक के तौर पर टोपी पहनकर आए थे। उन्होंने कहा कि कई प्रतिभागियों ने चेहरा ढक रखा था, क्योंकि वे डर के माहौल में जी रहे हैं और खुलकर सामने नहीं आ सकते। उनके मुताबिक, यात्रा का उद्देश्य किसी विवाद को खड़ा करना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों के लिए माहौल बनाना है जो अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीना चाहते हैं। ‘डर में जी रहे लोगों को बाहर लाने की कोशिश’ संत राम विशाल दास ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन वे भय और दबाव के कारण अपने घरों में ही सीमित हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा ऐसे लोगों के भीतर का डर खत्म करने के लिए निकाली गई है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के जरिए संदेश दिया गया है कि जो लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं, वे चाहे किसी भी धर्म को अपनाएं या न अपनाएं, उन्हें सुरक्षा और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
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