Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

    5 hours ago

    2

    0

    हिमंता बिस्वा सरमा आज 11 बजे दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ 4 और विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। समारोह में पीएम मोदी सहित कई NDA शासित राज्यों के सीएम भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में सोमवार को ही तैयारियां शुरू हो गईं। रविवार को असम में बीजेपी की विधायक दल की बैठक हुई, इसमें हिमंता को फिर विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार रात ही पहुंच गए। सीएम के साथ 4 मंत्री शपथ लेंगे हिमंता ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरण बोरो और अजंता नेओग मेरे साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके अलावा रंजीत दास असम विधानसभा के स्पीकर होंगे। इससे पहले हिमंता ने रविवार को कहा था कि मंत्रिमंडल में लगभग 18-19 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन हम नए चेहरों को शामिल करेंगे या अनुभवी लोगों को बनाए रखेंगे, यह हमें मिलने वाले मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा। असम में तीसरी बार भाजपा सरकार असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। पूर्वोत्तर में हिमंता भाजपा का चेहरा पूर्वोत्तर भारत में भाजपा और NDA की बढ़ती ताकत के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा महत्वपूर्ण रणनीतिकार माना जाता है। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद, उन्होंने 'नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस' (NEDA) के संयोजक के रूप में पूरे क्षेत्र में क्षेत्रीय दलों को एक साझा मंच पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई। सरमा की जमीनी स्तर पर पकड़ और कठिन से कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन बनाने की क्षमता ने पूर्वोत्तर में भाजपा के लिए 'अजेय' द्वार खोल दिए हैं। पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम) में भाजपा या एनडीए समर्थित गठबंधन की सरकारें हैं। नई विधानसभा में 7 महिलाएं, भाजपा 92.1% स्ट्राइक रेट असम में BJP की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं- 2023 में असम में परिसीमन हुआ और विधानसभा सीटों की बाउंड्री दोबारा तय की गई। ST, SC की रिजर्व सीटें और बोडोलैंड ट्राइबल रीजन की सीटें बढ़ीं, लेकिन मुस्लिम बहुल सीटें 41 से घटकर 26 रह गईं। राजनीतिक विश्लेषक अशोक मलिक के मुताबिक, ‘नई सीमाओं ने मुस्लिम बहुल इलाकों के प्रभाव को सीमित कर दिया। साथ ही उन सीटों को भी फिर से व्यवस्थित किया जहां असमिया मुसलमान कम हो रहे थे। इससे हिमंत को उन सीटों पर बढ़त मिली जहां पहले भाजपा कमजोर थी।’ 2. कांग्रेस और AIUDF के मुस्लिम वोट बंटे, बीजेपी को फायदा- 2021 में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF ने साथ चुनाव लड़ा था। उन्हें बंगाली मुसलमानों के 89% तो असमी मुसलमानों के 65% वोट मिले थे। 2026 में यह दोनों धड़े अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. जयदीप बरुआ के मुताबिक, 'हिमंता मुस्लिम समुदाय के भीतर दो गुट पैदा करने में सफल रहे हैं। पहले उन्होंने बांग्लादेश से आए 'मियां मुसलमानों' को असमी मुसलमानों के लिए खतरा बताया। फिर असमी मुसलमानों को विशेष दर्जा देकर, उन्हें अपने पाले में सुरक्षित कर लिया।' 3. हिमंता बिस्व सरमा की पॉपुलैरिटी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण- हिमंता बिस्वा सरमा की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ वोट में कन्वर्ट हो गई। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। इससे असमी संस्कृति, परंपरा और भाषा को खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि हर हफ्ते 35-40 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेज रहे हैं। इससे हिंदू वोटों में बीजेपी की पकड़ मजबूत होती चली गई। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अदिप फुकन के मुताबिक, असम में पहली बार पूरा चुनाव हिमंता के चेहरे पर लड़ा गया। वे अपने तीखे बयानों से खुद को योगी जैसे कट्टर नेता के तौर पर स्थापित करने में सफल हुए। 4. कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी में आए- चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के दो सीनियर नेता भूपेन कुमार बोराह और प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी जॉइन कर ली। इससे कांग्रेस का अंदरूनी कलह और राजनीतिक कमजोरी सामने आई। कांग्रेस ने इस बार पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई की लीडरशिप में चुनाव लड़ा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मई 2025 में असम कांग्रेस अध्यक्ष बने गौरव हिमंता के सामने खुद को स्थापित नहीं कर पाए। --------------------------------------------
    Click here to Read more
    Prev Article
    विजय के ड्राइवर के बेटे ने विधायक की शपथ ली:CM की तरफ इशारा करके पूछा- साइन कर दूं; महिला विधायक जीत का सर्टिफिकेट लाना भूलीं; VIDEO
    Next Article
    AIADMK के 30 विधायक विजय के साथ आना चाहते हैं:पलानीसामी के साथ सिर्फ 17 नेता; दो गुटों में बंट सकती है पार्टी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment