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    'हम विश्वगुरु नहीं हैं', BJP के दिग्गज नेता Murli Manohar Joshi ने Sanskrit को राष्ट्रभाषा बनाने की उठाई मांग

    3 hours from now

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    भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को कहा कि भारत अब 'विश्वगुरु' नहीं रहा और इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार और क्वांटम कंप्यूटिंग में भी इसके उपयोग की मांग की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए जोशी ने संस्कृत को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि बी आर अंबेडकर सहित कई लोगों ने अतीत में इसके लिए प्रयास किए थे, लेकिन उनके प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुए। इसे भी पढ़ें: चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, West Bengal और Tamil Nadu में 48 घंटे का 'Dry Day'उन्होंने पत्रकारों से कहा कि विश्वगुरु होने की धारणा के बारे में मेरा व्यक्तिगत मानना ​​है कि आजकल हमें इस शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हम वर्तमान में विश्वगुरु नहीं हैं। हमें विश्वगुरु बनने की आकांक्षा रखनी चाहिए, लेकिन आज हम विश्वगुरु नहीं हैं। जोशी ने कहा कि इस दृष्टि से आधुनिक समय में संस्कृत का बहुत महत्व है और उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग सहित आधुनिक वैज्ञानिक कार्यों में इस प्राचीन भाषा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।जोशी ने कहा कि अगर देश में अधिकतर काम संस्कृत में होने लगे तो यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। संविधान बनाते समय डॉ. अंबेडकर ने भी संस्कृत को देश की राष्ट्रीय भाषा बनाने का प्रयास किया था… संस्कृत न केवल भारत की बल्कि पूरे विश्व की विरासत है क्योंकि यह सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसी बीच, आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने भी सोमवार को संस्कृत के अधिक प्रचार-प्रसार की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि इसके प्रचलन में वृद्धि न केवल अन्य सभी भारतीय भाषाओं को समृद्ध करेगी और उनके बीच सेतु का काम करेगी, बल्कि लोगों को भारत के प्राचीन विचारों और संस्कृति से भी जोड़ेगी। इसे भी पढ़ें: संविधान संशोधन बिल पर Annamalai का बड़ा आरोप, बोले- DMK और Congress ने दक्षिण से धोखा कियाभागवत ने कहा कि भारत को जीवंत रखने और आगे बढ़ाने के लिए इसे "जानना और समझना" आवश्यक है। उन्होंने संस्कृत भारती कार्यक्रम में कहा कि यदि ये सब होना है, तो भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य है। भारत अनेक भाषाओं का घर है। भारत की प्रत्येक भाषा अपने आप में एक राष्ट्रीय भाषा है। लेकिन इन विविध राष्ट्रीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी क्या है? वह है संस्कृत।पहले हम विश्वगुरु थे, अब झालमुरी है 🤡नही यकीन है तो भाजपा के कद्दावर नेता, मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मुरली मनोहर जोशी जी को सुन लीजिए। pic.twitter.com/eaCqSTqy41— Srinivas BV (@srinivasiyc) April 20, 2026
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