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    गोरक्षक चंद्रशेखर कैसे बने 'फरसा बाबा':15 Kg का फरसा लेकर चलते, गौशाला में 350 गायें; कहते थे- गौतस्करों से लड़ता हूं

    8 hours ago

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    'मेरी गौशाला में 350 गाय हैं। इनकी सेवा करता हूं। जहां से भी खबर आती है कि आवारा गो माता दिखी हैं, मैं उन्हें अपने यहां ले आता हूं। कहीं खबर आई कि गाय की मौत हो गई, तो हम उस गाय का अंतिम संस्कार करते हैं। उसे चंदन, चुनरी, तुलसी के साथ विदा करते हैं।' ये बातें पिछले दिनों मथुरा में फरसा बाबा के नाम से मशहूर गौ-रक्षक चंद्रशेखर ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में कही थी। वह आगे कहते हैं- रात में 10 बजे से सुबह 5 बजे तक गौ माता को बचाने के लिए हाईवे पर निगरानी करता हूं। गौ तस्करों से लड़ता हूं। यही मेरी दिनचर्या हैं, यही मेरी पहचान है। माथे पर बड़ा लाल टीका, हाथ में फरसा और गेहुआ वस्त्र… ऐसे दिखते थे फरसा बाबा। लोग कहते हैं- उन्हें हमेशा फरसे के साथ देखा, जो करीब 15kg भारी था, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे लोग चंद्रशेखर नहीं फरसा बाबा कहने लगे। इन्हीं चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा की शनिवार की सुबह 5 बजे ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। साथियों ने दावा किया कि गौ तस्करों ने ट्रक से कुचलकर बाबा की हत्या की। जबकि डीआईजी का कहना है कि गौ-रक्षक चंद्रशेखर की मौत हादसे में हुई। वह गौतस्करी के शक में ट्रक की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से एक ट्रक ने उस ट्रक को टक्कर मार दी। इसमें कुचलकर बाबा की मौत हो गई। बाबा की मौत की खबर मिलते ही लोग उग्र हो गए। हजारों की संख्या में लोग मथुरा के छाता कस्बे में सड़कों पर उतर आए। दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे जाम कर दिया। लोगों की पुलिस से झड़प हुई। पुलिस की गाड़ियां तोड़ दी गई। कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस के गोले छोड़े। अब सवाल है कि फरसा वाले बाबा आखिर थे कौन? जिनकी मौत के बाद लोग सड़क पर उतर आए। आइए उनके बारे में सिलसिलेवार जानते हैं... गौरक्षा के लिए मशहूर थे फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर का घर मथुरा में बरसाना रोड पर छाता इलाके के आजनौंख गांव में है। घर के बाहर एक बोर्ड लगा है। उस पर लिखा है- लाख करो तीर्थ, पूजन करो हजार, गौ माता न बचा सके, सब कुछ है बेकार। इसी बोर्ड में लिखा है- गाय बचाना, लंगड़ी-लूली, असहाय, एक्सीडेंट और मृतक गाय के शास्त्र युक्त अंतिम संस्कार के लिए संपर्क करें। नीचे एक नंबर भी दिया गया है। जब इस नंबर पर फोन होता है तो चंद्रशेखर की फरसा वाली टीम पहुंचती है और गाय का बकायदा अंतिम संस्कार करती है, खुद चंद्रशेखर भी जाते थे। चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा शुरुआत से ही गाय के लिए समर्पित रहे। शुरुआत में बरसाना इलाके में गायों को लेकर जब भी कोई समस्या सामने आती, लोग चंद्रशेखर को ही बताने लगे। वह गायों की मदद करके धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो गए। खुद फरसा और साथी तलवार लेकर चलते थे चंद्रशेखर अपने साथ हमेशा फरसा लेकर चलते थे। बस इसी वजह से लोग उन्हें फरसा वाले बाबा कहते थे। उनके साथ तीन अन्य लोग भी रहते थे, इनके कंधो पर तलवार लटकी होती थी। तलवार लेकर चलने को लेकर वह कहते थे- कई बार हमारे ऊपर गौ-तस्करों ने हमला किया, जान से मारने की कोशिश की। इसके बाद हमारे साथियों ने कहा कि अब हम भी आपके साथ हथियार लेकर ही रहेंगे, इसलिए मैं फरसा और साथी तलवार लेकर चलते हैं। ये कोई अवैध नहीं है। नमस्कार नहीं, कहते जय गौमाता लोग कहते हैं- बाबा की एक आदत थी, वो कभी नमस्कार और प्रणाम नहीं कहते थे, न ही सुनना पसंद करते थे। इसकी जगह जय गौमाता, जय गोपाल बोलते थे। उन्होंने घर पर ही एक गौशाला खोल रखी थी। इसमें 350 से 400 गाय और नंदी हैं। इसमें बहुत कम गाय ऐसी हैं, जो दूध देती हैं। गाय के लिए पैसा नहीं लेते चंद्रशेखर अपनी गौशाला में गाय को पालने के लिए किसी से कोई पैसा नहीं लेते थे। वह लोगों से इनके लिए चारा लेते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, मुझे कभी इनके लिए चारा मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। लोग खुद आते और कहते थे कि मेरे खेत से चारा काट लीजिए। बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जो बाजरा, धान जैसी चीजें देकर चले जाते हैं। इन गायों की देखभाल के लिए हमारे यहां 10 से 15 लड़के हैं। यहां कोई चेला-चेली जैसी बात नहीं है, सभी मिलकर गौमाता की सेवा और रक्षा करते हैं। चंद्रशेखर का अपना एक यूट्यूब चैनल भी था। इस पर वह गायों की सेवा करते हुए का वीडियो डालते थे। कई ऐसे भी वीडियो मिले जिसमें गाय की नहर में गिरने व सड़क पर एक्सीडेंट से मौत हो गई। चंद्रशेखर वहां अपने गौशाला की गाड़ी से पहुंचते और उस गाय का अंतिम संस्कार करवाते थे। रात में हाईवे पर करते गौतस्करों का पीछा चंद्रशेखर गौमाता के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। सुबह 9 बजे से 3 बजे तक गौशाला व आसपास के इलाकों में रहते थे। 3 बजे से 6 बजे तक वह चौराहों पर गाय की निगरानी करते थे। कोई उन्हें लेकर जाता दिखे तो उसे रोकते और पूछते थे कि कहां ले जा रहे हो। अगर वह संदिग्ध समझ में आता और मेवात साइड लेकर जाने की बात करता था तो उससे गाय ले लेते थे। चंद्रशेखर रात के 10 बजे से सुबह 5 बजे तक दिल्ली-मथुरा हाईवे पर रहते थे। वह यहां गौ-तस्करों की निगरानी करते थे, उनका पीछा करते थे। यूट्यूब पर एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने कहा था, मैं पिछले कई सालों से रातभर गौ-तस्करों से मुकाबला करता हूं। हाथ में फरसा होता है। गौ-तस्कर मुझसे खौफ खाते हैं, इसलिए वह कभी भी गौमाता को इधर से लेकर नहीं जा पाते। सुबह 5 बजने पर मैं घर आता हूं और 9 बजे तक आराम करता हूं। 21 मार्च की सुबह चंद्रशेखर की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। चंद्रशेखर के समर्थक कहते हैं, फरसा वाले बाबा ने गौतस्करों का पीछा किया, गौतस्करों ने ट्रक से कुचलकर उनकी हत्या कर दी। उन सबको पकड़ा जाना चाहिए, उनका एनकाउंटर होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो यह हमारे बाबा के साथ अन्याय होगा। …….. ये पढ़ें - मथुरा में साधु की मौत पर हंगामा, 10km हाईवे जाम:पथराव में पुलिसकर्मी घायल, लाठीचार्ज; आरोप- गौतस्करों ने ट्रक से कुचलकर मारा मथुरा में गौरक्षक चंद्रशेखर बाबा की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। वह फरसा वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। बाबा के एक साथी ने दावा किया- शनिवार तड़के बाबा 2 साथियों के साथ ट्रक का पीछा कर रहे थे। ट्रक में गौवंश था। ट्रक को ओवरटेक कर बाबा ने सामने बाइक खड़ी कर दी। तभी अचानक ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ा दी और बाबा को कुचलते हुए फरार हो गया। पढ़िए पूरी खबर…
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