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    गरीबी में पिता पढ़ न सके, बेटा सिटी टॉपर बना:हाईस्कूल टॉपर दिशा बोलीं- IAS बनना है, पिता बोले- एक रोटी कम खाएंगे, बेटी को पढ़ाएंगे

    1 hour ago

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    गरीबी और मजबूरी में पिता क्लास-2 तक ही पढ़ सके, लेकिन बेटे अमित साहू ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में सिटी टॉप कर दिखाया। परचून की दुकान चलाने वाले राकेश साहू ने सपना देखा था कि अपने बच्चों को खूब पढ़ाएंगे। वहीं हाईस्कूल में सिटी टॉप करने वाली दिशा पाण्डेय IAS बनना चाहती हैं। पिता मिलन पाण्डेय प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि खाना कम खाएंगे, लेकिन बेटी को आगे पढ़ाएंगे। शहर के नौबस्ता स्थित पारितोष इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सिटी टॉपर सामने आए हैं। हाईस्कूल में दिशा पाण्डेय ने 95.5% अंक हासिल कर प्रदेश में 6वां और कानपुर में टॉप किया है। वहीं इंटरमीडिएट में अमित साहू ने 96.2% अंक हासिल कर प्रदेश में 7वां और सिटी टॉप किया। इंटर सिटी टॉपर अमित की कहानी अमित के पिता राकेश साहू ने बताया कि वह एक परचून की छोटी सी दुकान चलाते हैं। उसी से परिवार चलता है। परिवार में पत्नी राम दुलारी साहू और 15 साल की बेटी सोनाक्षी साहू हैं। राकेश ने बताया कि आज बहुत खुश हूं। मेरा बेटा बहुत मेहनत करता था। जब मैं उसे पढ़ते देखता था तो लगता था कि वह मेरा नाम जरूर रोशन करेगा। मैं गल्ला मंडी में रहता हूं। मेरा खुद का जीवन गरीबी में बीता। मुझे मिलाकर हम 6 भाई थे। माता-पिता ने स्कूल तो भेजा, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मैं केवल क्लास-2 तक ही पढ़ सका। मेरा पढ़ने का मन करता था, लेकिन मजबूरी थी। मैंने सोचा था कि अपने बच्चों को जरूर पढ़ाऊंगा। आज मेरा सपना पूरा होता दिख रहा है। बेटे ने हाईस्कूल में भी प्रदेश में 10वां और शहर में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। अब सिटी टॉप किया है तो बहुत खुशी है। अब आगे भी जितना हो सकेगा, पढ़ाएंगे। वह इंजीनियर बनना चाहता है, तो पूरी कोशिश करूंगा। माता राम दुलारी ने कहा कि मेरे बेटे ने जो सफलता हासिल की है, उससे मन बहुत खुश है। वह रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करता था। कभी-कभी उसे मना भी करती थी, लेकिन वह पढ़ाई के आगे मानता ही नहीं था। अमित साहू ने कहा कि मुझे पता था कि पापा पढ़ना चाहते थे, लेकिन मजबूरी में नहीं पढ़ सके। इसलिए मैंने सोचा कि पढ़-लिखकर उनका सपना पूरा करूंगा। आगे मैं IIT से बीटेक कर इंजीनियर बनना चाहता हूं। हाईस्कूल सिटी टॉपर दिशा पाण्डेय की कहानी दिशा के पिता मिलन पाण्डेय ने बताया कि वह नौबस्ता की एक रेडीमेड दुकान में नौकरी करते हैं। मामूली वेतन से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में पत्नी ज्योति पाण्डेय, बेटी दिशा और छोटा बेटा देव है। दिशा इतनी मेहनती है कि उसे पढ़ाई के लिए मना करना पड़ता था। ज्यादा पढ़ने के कारण उसकी तबीयत पर भी असर पड़ता था और उसका बीपी लो हो जाता था। परीक्षा के दौरान भी उसकी तबीयत खराब हुई, लेकिन उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी। आज के मोबाइल के दौर में वह सोशल मीडिया से दूर रहती है। उसका कोई अकाउंट नहीं है। उसकी मेहनत देखकर हमने तय किया है कि अगर वह IAS बनना चाहती है तो हम उसे जरूर पढ़ाएंगे। एक रोटी कम खाएंगे, लेकिन उसकी पढ़ाई नहीं रुकने देंगे। मां ज्योति पाण्डेय ने बताया कि मेरी बेटी बहुत मेहनती है। हम उसे मना करते थे कि अब बस करो, लेकिन वह रात 2 बजे तक पढ़ाई करती रहती थी। हम लोग भी उसके साथ जागते थे। आज हमें उस पर गर्व है। दिशा ने कहा कि मैंने अपने रिश्तेदारों के कार्यक्रमों में जाना छोड़ दिया था। न किसी शादी में गई और न ही किसी बर्थडे में। सोशल मीडिया से भी दूर रही, क्योंकि मुझे अपनी मेहनत से ज्यादा अपने माता-पिता की मेहनत दिखाई देती थी। उन्होंने मैथ में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। इसके लिए उन्होंने सिर्फ किताबों से अभ्यास किया। कोई कोचिंग या ट्यूशन नहीं लिया। उनका रिकॉर्ड रहा कि उन्होंने एक भी दिन स्कूल से छुट्टी नहीं की।
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    मथुरा में बोर्ड परीक्षा के टॉपर की कहानी:पिता ने हाईस्कूल नहीं की पास,बेटी ने जिला टॉप किया,मजदूर की बेटी डिफेंस सर्विस के जरिए करना चाहती है देश सेवा
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