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    Dubai Port के पास Kuwaiti Oil Tanker बना निशाना, हमले के बाद भीषण आग, खाड़ी में हाई अलर्ट जारी

    3 hours from now

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    मध्य पूर्व में चल रहे तनाव ने एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है। दुबई के बंदरगाह के एंकरिंग क्षेत्र में मंगलवार को एक पूरी तरह तेल से भरे कुवैती टैंकर पर हमला हुआ, जिससे न सिर्फ जहाज को नुकसान पहुंचा बल्कि उसमें आग भी लग गई। बाद में दुबई प्रशासन ने आग पर काबू पाने की पुष्टि की, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते। जिस टैंकर को निशाना बनाया गया, उसका नाम “अल-सल्मी” बताया जा रहा है। हमले के बाद जहाज के ढांचे (हुल) को नुकसान पहुंचा और उसमें आग भड़क उठी। तुरंत राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग को बुझा लिया गया।हालांकि आग बुझा दी गई है, लेकिन कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने आसपास के समुद्री इलाके में तेल फैलने की आशंका जताई है। यह चिंता सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से भी बेहद गंभीर मानी जा रही है। KPC के मुताबिक, आपातकालीन और फायरफाइटिंग टीमें तुरंत सक्रिय कर दी गई थीं और वे संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर हालात को काबू में करने में जुटी रहीं। इसे भी पढ़ें: Isfahan Attack: Iran के परमाणु ठिकाने Isfahan पर अमेरिका का 'Bunker Buster' हमला, ज़मीन के नीचे सब कुछ तबाह!रिपोर्ट्स के अनुसार, “अल-सल्मी” ने फरवरी के आखिर में होरमुज जलडमरूमध्य पार किया था—ठीक उसी दौरान जब अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई ने इस पूरे क्षेत्र में तनाव को हवा दी थी। इसके बाद यह टैंकर सऊदी अरब के खफजी पोर्ट पहुंचा, फिर कुवैत के मीना अल-अहमदी से अतिरिक्त तेल लेकर पूरी तरह लोड हो गया और वहां से संयुक्त अरब अमीरात की ओर रवाना हुआ। दुबई पहुंचने के बाद यह एंकरिंग क्षेत्र में खड़ा था, जहां इस पर हमला हुआ।बताया जा रहा है कि यह टैंकर कुवैत के झंडे के तहत चल रहा था और इसका अंतिम गंतव्य चीन का क़िंगदाओ बंदरगाह था। दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि यात्रा के दौरान कभी-कभी इसे “चीनी कार्गो” के रूप में भी दर्शाया गया। दुबई मीडिया कार्यालय ने कहा है कि आग को काबू में कर लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञ टीमें अभी भी हालात का आकलन कर रही हैं। जहाज की स्थिति, संभावित तेल रिसाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप ने जिसे दी सरेआम गाली, उसने मिलाया मोदी को फोन, फिर ये हुआ...इस हमले को सिर्फ एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव के बड़े परिप्रेक्ष्य में समझा जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकर पर हमला, सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है—और यही वजह है कि दुनिया की नजर इस पर टिकी हुई है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे, खासकर फारस की खाड़ी में स्थित उसके अहम ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने साफ कहा था कि अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान की ऊर्जा क्षमताओं को पूरी तरह तबाह कर सकता है।दिलचस्प रूप से, सख्त बयानबाजी के बीच ट्रंप ने अपने सहयोगियों को यह भी संकेत दिया है कि वह सैन्य अभियान को रोकने के लिए तैयार हैं—भले ही होरमुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला न हो। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने की कोशिश युद्ध को लंबा खींच सकती है। ऐसे में फिलहाल फोकस ईरान पर दबाव बनाकर कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने पर हो सकता है। पूरी तस्वीर देखें तो मामला सिर्फ एक हमले तक सीमित नहीं है। यह उस बड़े संघर्ष का हिस्सा है, जहां हर नई घटना वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर रही है।
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