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    CSJMU में एआई पर मंथन:क्या मशीनी लेखन में खो जाएगी आपकी मौलिकता? कॉपीराइट दिवस पर छात्रों ने ली शपथ

    2 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में गुरुवार को ‘विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस’ पर केवल रस्मी आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर मंथन हुआ। गणेश शंकर विद्यार्थी सेंट्रल लाइब्रेरी की अगुवाई में विश्वविद्यालय के सभी विभागों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने एक सुर में शैक्षणिक ईमानदारी और नवाचार को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। सेंट्रल लाइब्रेरी के ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में लाइब्रेरियन डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कॉपीराइट के ऐतिहासिक सफर को साझा किया। वहीं, डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. श्वेता पांडेय ने डिजिटल युग में कॉपीराइट कानूनों की पेचीदगियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने साफ किया कि प्रिंट युग से लेकर आज के डिजिटल माहौल में 'प्लेगरिज्म' यानी साहित्यिक चोरी किस तरह शोध और लेखन की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रही है और इससे बचने के तरीके क्या हैं। आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की संगोष्ठी में यह सवाल सबसे प्रमुखता से उठा। विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने छात्रों को एआई से मिलने वाली जानकारी के सही और नैतिक उपयोग का पाठ पढ़ाया। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक सुविधा के लिए है, न कि किसी की मौलिकता को खत्म करने के लिए। छात्रों ने भी अपने विचार साझा करते हुए माना कि एआई के उपयोग के दौरान कॉपीराइट सामग्री की मर्यादा बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती है। विश्वविद्यालय के अलग-अलग स्कूलों में दिनभर गतिविधियां जारी रहीं। स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में प्रो. सुधांशु पांड्या ने बौद्धिक संपदा को आज के दौर का सबसे बड़ा आर्थिक संसाधन बताया, तो वहीं स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज में जान्हवी शेट्टी ने पेटेंट और आईपीआर के महत्व को व्यावहारिक उदाहरणों से समझाया। इसी तरह स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने लेखकों के अधिकारों के सम्मान और लेखन में मौलिकता पर जोर दिया। वहीं लाइफ साइंसेज विभाग में डॉ. अनुराधा कालानी के नेतृत्व में शोध कार्य में नैतिकता और पारदर्शिता पर विस्तार से चर्चा हुई। कृषि विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, फाइन आर्ट्स और होटल मैनेजमेंट समेत विश्वविद्यालय के सभी विभागों ने इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। दिनभर चले इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य यही था कि छात्र केवल किताबें पढ़ने तक सीमित न रहें, बल्कि वे यह भी समझें कि किसी भी ज्ञान या कला का सृजन करने वाले के अधिकारों की रक्षा करना समाज की जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि कैंपस में एक ऐसा माहौल बने जहां छात्र नई खोज यानी नवाचार की तरफ बढ़ें, लेकिन अपनी मौलिकता और नैतिकता को साथ लेकर चलें।
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