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    CSJMU का 'रूरल कैंप':अब छात्र नक्शे पर उतार रहे गांव का विकास, मैपिंग तकनीक से समझीं समस्याएं

    4 hours ago

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    क्लासरूम की चारदीवारी से निकलकर अब छात्र सीधे गांव की पगडंडियों पर उतर रहे हैं। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के समाज कार्य विभाग ने एक अनूठी पहल करते हुए एमएसडब्ल्यू के छात्रों के लिए ग्रामीण शिविर (रूरल कैंप) का आयोजन किया। इस दौरान छात्रों ने बिठूर के बरहट बंगर गांव पहुंचकर न केवल वहां की जमीनी हकीकत को जाना, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए ‘पार्टिसिपेटरी रूरल अप्रैजल’ (PRA) जैसी तकनीक का भी बारीकी से अभ्यास किया। सर्वे को व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग ने छात्रों को 8-8 के समूहों में बांटा था। हर समूह को गांव की एक अलग दिशा—उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम—की जिम्मेदारी दी गई। संकाय सदस्यों की देखरेख में छात्रों ने गांव की सोशल और रिसोर्स मैपिंग की। इसमें उन्होंने गांव की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, वहां मौजूद संसाधनों और उनकी कमी को एक नक्शे पर उतारा। सीधी बातचीत से समझीं गांव की मुश्किलें इस दौरे का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारना था। छात्रों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सीधी बातचीत की। इस संवाद में गांव के सामने आ रही बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं, जिसे छात्रों ने अपनी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया। सीखने का बेहतर जरिया बना रूरल कैंप विश्वविद्यालय के एमएसडब्ल्यू कोर्स में यह ग्रामीण शिविर एक अनिवार्य हिस्सा है। यह कैंप छात्रों को किताबी थ्योरी और सामुदायिक विकास के बीच के अंतर को समझने का अवसर देता है। विभाग के शिक्षकों का मानना है कि जब छात्र खुद लोगों के बीच जाकर समस्याओं को देखते और समझते हैं, तभी वे बेहतर ‘कम्युनिटी वर्कर’ बन पाते हैं। इस दौरान स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की टीम ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। बरहट बंगर गांव में बिताए गए इस दिन ने छात्रों को कम्युनिटी इंटरवेंशन की बारीकियां सिखाईं। छात्रों के लिए यह अनुभव सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य में एक जिम्मेदार समाज सेवक बनने की दिशा में पहला ठोस कदम साबित हुआ। इस तरह के फील्ड विजिट से न केवल विश्वविद्यालय का ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ाव बढ़ता है, बल्कि छात्रों के भीतर सामाजिक संवेदनशीलता भी विकसित होती है। आने वाले समय में इस तरह के कैंप अन्य ग्रामीण इलाकों में भी आयोजित किए जाएंगे।
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