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    CO जियाउल हक के पिता बोले- अब न्याय नहीं मिलेगा:बेटे को खोया, बहू भी कोर्ट में घसीट रही; प्रतापगढ़ में अफसर की हुई थी हत्या

    11 hours ago

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    ‘हमें लंबे समय से न्याय की उम्मीद थी, जो अब टूट गई है। गरीबी में बेटे को पढ़ा-लिखाकर पुलिस अफसर बनाया था। कुंडा में खुलेआम उसकी हत्या कर दी गई। हमने अपना बेटा खो दिया, लेकिन उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा। कोर्ट के आदेश से बहुत दुख हुआ है। अब तो बहू से भी रिश्ते अच्छे नहीं रहे। बेटे की एलआईसी के पैसों को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है।’ यह कहना है प्रतापगढ़ के सीओ रहे जियाउल हक के पिता हाजी शमसुल हक का। सीओ के हत्याकांड से जुड़े मामले में लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट में दाखिल क्लोजर रिपोर्ट बीती 19 सितंबर को स्वीकार कर ली गई। इसके बाद कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया समेत 5 लोगों के खिलाफ अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। इस फैसले के बारे में जैसे ही देवरिया में जियाउल हक के परिवार को पता चला, तो मायूसी छा गई। दैनिक भास्कर की टीम देवरिया जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर थाना खुखुंदू थाना क्षेत्र के जुआफर गांव पहुंची। सीओ जियाउल हक के परिवार से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले जानिए पूरा मामला बात 2 मार्च, 2013 की है। प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद कुंडा के सीओ जियाउल हक मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद भीड़ ने जियाउल हक को घेर लिया और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मामला CBI को सौंपा गया। जांच के बाद मुकदमा चला। अक्टूबर, 2024 में CBI की विशेष अदालत ने 10 लोगों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। इनमें फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव भी शामिल थे। इसके बाद CBI ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। लेकिन, जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की शिकायत पर राजा भैया समेत 5 लोगों के खिलाफ फिर जांच हुई। बाद में इसकी भी CBI ने क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। यही क्लोजर रिपोर्ट 19 सितंबर, 2026 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट CBI प्रतिभा सिंह की अदालत ने स्वीकार कर ली। अब इन 5 लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे कोई अदालती कार्रवाई नहीं होगी। अब पढ़िए परिवार का दर्द पिता बोले- बेटा सीओ बना, तो लगा जिंदगी बदल जाएगी जुआफर गांव में हमारी मुलाकात जियाउल हक के पिता हाजी शमसुल हक से हुई। उनके परिवार में अब पत्नी हाजरा खातून और छोटा बेटा सोहराब हक ही बचे हैं। सोहराब भी दूसरे जिले में नौकरी करते हैं। शमशुल बताते हैं- हमारे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद जियाउल को गांव के स्कूल से पढ़ाया। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रयागराज भेजा। कड़ी मेहनत के बाद बेटा पुलिस अफसर बना। इसके बाद परिवार को उम्मीद थी कि अब जिंदगी बदल जाएगी। साल-2012 में जियाउल को कुंडा सर्किल का सीओ बनाया गया। लेकिन एक साल बाद ही उसकी हत्या हो गई। बेटे की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। अब बुढ़ापे में भी हम न्याय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बहू लखनऊ में रहती है, यहां बहुत कम आती है शमशुल बताते हैं- हमारी बहू डॉ. परवीन आजाद भी पुलिस विभाग में ओएसडी के पद पर तैनात है। वह लखनऊ में रहती है। उसका देवरिया आना-जाना कम होता है। समय के साथ बहू की हम लोगों से दूरी बढ़ती चली गई। एलआईसी के पैसे को लेकर मुकदमा हुआ था। अब चल-अचल संपत्ति को लेकर भी केस चल रहा है। इस मामले में 28 सितंबर को सुनवाई होनी है। बेटे को खोने के बाद परिवार के रिश्तों में आई दूरी ने हमारी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मां बोलीं- बेटे के हत्यारों को कड़ी सजा मिले जियाउल हक की मां हाजरा खातून बेटे की मौत के बाद से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं। कहती हैं- बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। बुढ़ापे में भी मुकदमों के सिलसिले में बार-बार जाना पड़ता है। बहू से बातचीत तक नहीं होती। वह सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमा लड़ने की बात कह चुकी है। बेटा खोने का दर्द तो जीवनभर रहेगा, लेकिन हम लोग न्याय की उम्मीद छोड़ना नहीं चाहते। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें आजम-अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार', अखिलेश के खिलाफ 10 शहरों में पोस्टर यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ लखनऊ, गाजीपुर, मुरादाबाद समेत 10 शहरों में पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें अखिलेश के साथ अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी और रमाकांत यादव की तस्वीरें छपी हैं। पोस्टर पर लिखा है- ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार।’ ‘माफिया राज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश।’ ‘माफिया के अखिलेश, अखिलेश के माफिया।’ हालांकि, पोस्टर किसने लगवाए हैं, इसका पता नहीं चल पाया है। पूरी खबर पढ़ें
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