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    'भरत तिवारी की पिस्टल पर पाकिस्तानी मोहर':पूर्व सांसद नागमणि का दावा-उसका जैश-ए-मोहम्मद से संबंध, घर में तहखाना; मां बोली-जांच हो नहीं तो फांसी मिले

    22 hours ago

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    बीजेपी के पूर्व सांसद नागमणि कुशवाहा ने भरत तिवारी की तुलना पाकिस्तान के आतंकवादी से की है। इतना ही नहीं, उन्होंने भरत तिवारी का समर्थन करने वालों को भी पाकिस्तानी एजेंट बता दिया। नागमणि कुशवाहा ने कहा, “मुझे सूचना मिली की भरत के पास से बरामद पिस्टल पर पाकिस्तान की मोहर लगी थी। उसका संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से था। भरत तिवारी के घर में तहखाना भी मिला है और जो लोग उसके समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं, वे पाकिस्तानी एजेंट बनकर तिवारी के मैटर को हाईलाइट कर रहे हैं।” वहीं, भरत तिवारी की मां ने कहा है, “पिस्तौल पाकिस्तानी नहीं है। हमें बदनाम किया जा रहा है। हमारे घर में कोई तहखाना नहीं है। अगर विश्वास नहीं है, तो आकर जांच कर लें। पिस्टल और तहखाने की की जांच कराई जाए। अगर कोई तहखाना नहीं मिला है तो उन्हें फांसी की सजा दी जाए। इसको लेकर मैं केस करूंगी। मेरा बेटा गरीबों का मसीहा था और वो समाज के लिए मर गया। 1400 करोड़ का घोटाला हुआ है। वो ही पाकिस्तान के होंगे। DSP को नौकरी मिली है, क्योंकि सब ने पैसा खाया है। मैं दिल्ली जाकर न्याय लूंगी। हाईकोर्ट में केस करुंगी। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री के पास जाऊंगी।” कुत्ते-बिल्ली से की थी भरत तिवारी की तुलना एक यूट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान जब भरत तिवारी एनकाउंटर पर नागमणि कुशवाहा से राय पूछी गई, तो उन्होंने कहा, "आप लोग भरत तिवारी जैसे कुत्तों और बिल्लियों का नाम क्यों लेते हैं? वह एक अपराधी था और पुलिस की कानूनी कार्रवाई के दौरान मारा गया। इस पर और बहस करने की कोई जरूरत नहीं है।" 14 बार पार्टी बदलने का रिकॉर्ड नागमणि कुशवाहा समाजवादी नेता और शोषितों की आवाज माने जाने वाले 'बिहार के लेनिन' शहीद जगदेव प्रसाद के बेटे हैं। नागमणि उन गिने चुने व्यक्तियों में हैं, जो चारों विधायी सदनों लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा, वह अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। नागमणि का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अब तक कुल 14 बार पार्टियां बदलीं हैं, वह RJD, JDU, कांग्रेस, RLSP और BJP सहित लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। अगस्त 2025 में वह अपनी पुरानी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में फिर से शामिल हो गए और फिलहाल बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के करीबी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
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