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    भाजपा नेता को धक्का मारने वाले IAS का तबादला:रिंकू सिंह को उरई का SDM न्यायिक बनाया; ब्लॉक प्रमुख बोले-ट्रांसफर नहीं, FIR हो

    12 hours ago

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    जालौन के SDM रिंकू सिंह राही का मंगलवार दोपहर 1 बजे ट्रांसफर कर दिया गया। उन्हें उरई का एसडीएम न्यायिक बनाया गया है। उनकी जगह राकेश कुमार सोनी को जालौन का नया SDM नियुक्त किया गया है। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दोनों अफसरों को कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। आदेश IAS रिंकू सिंह राही और भाजपा ब्लॉक प्रमुख रामराज निरंजन के बीच हुए विवाद के 7 दिन बाद जारी किया गया। जालौन में 29 जून (सोमवार) की शाम 4 बजे रामराज निरंजन ने मीडिया से बात की थी। रिंकू सिंह का एक वीडियो दिखाया था। इसमें रिंकू सिंह धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे थे। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने ब्लॉक प्रमुख के मोबाइल पर हाथ मारकर जमीन पर गिरा दिया था। इसके बाद दोनों हाथों से जोरदार धक्का मारकर पीछे धकेल दिया था। पूरा घटनाक्रम 23 जून का था। ब्लॉक प्रमुख ने डीएम से शिकायत की थी। डीएम ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर जांच के आदेश दिए थे। भाजपा विधायक ने भी की थी शिकायत IAS रिंकू सिंह शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक-बैठक कर चर्चा में आए थे। तब उन्हें शासन ने राजस्व परिषद मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। करीब 13 महीने बाद उन्हें जालौन में फील्ड की पोस्टिंग मिली। एक महीने पहले जालौन में भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा ने भी रिंकू सिंह का विरोध किया था। ब्लॉक प्रमुख ने कहा- IAS पर मुकदमा होना चाहिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही के स्थानांतरण पर भाजपा के जालौन ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने जिला प्रशासन का धन्यवाद किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक पूरा न्याय नहीं मिला है। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए, तभी उन्हें न्याय मिलेगा। रिंकू सिंह का कद हल्का किया गया SDM प्रशासन के मुकाबले SDM न्यायिक का पद काफी हल्का होता है। SDM प्रशासन जिले में कानून व्यवस्था, भूमि विवाद, और राजस्व संबंधी कार्यों को देखने वाले प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। वहीं, SDM न्यायिक का मुख्य काम राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना और उनका तेजी से निपटारा करना होता है। वे प्रशासनिक काम और कानून-व्यवस्था के बजाय पूरी तरह से न्यायिक मामलों (जैसे भूमि विवाद और राजस्व संबंधी मुकदमों) की सुनवाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं। फील्ड में पोस्टिंग न मिलने पर दिया था इस्तीफा 44 साल के रिंकू को 9 महीने पहले शाहजहांपुर से हटाकर राजस्व परिषद भेजा गया था। तब से उन्हें फील्ड में कोई पोस्टिंग नहीं मिली थी। 26 मार्च को राष्ट्रपति को कंडीशनल इस्तीफा भेजा था। उन्होंने कहा था- मुझे वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का अवसर नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी यानी PCS में वापस भेजे जाने की भी अपील की थी। रिंकू 2021 बैच के IAS अफसर हैं। अभी उनकी 16 साल की नौकरी बची है। जानिए कौन हैं रिंकू सिंह राही… हाथरस के रहने वाले, पहले PCS फिर IAS बने रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई, 1982 को हाथरस में एक दलित परिवार में हुआ था। वह थाना सासनी के गांव ऊसवा के रहने वाले हैं। दो भाइयों में बड़े रिंकू के पिता सौदान सिंह राही आटा चक्की चलाकर परिवार का पालन करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। इसकी मदद से उन्होंने जमशेदपुर के टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक किया था। 2004 में रिंकू सिंह ने पीसीएस परीक्षा पास की थी। नौकरी के दौरान उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। 2021 में उन्हें 683वीं रैंक मिली और वे आईएएस बने थे। परिवार में पत्नी सुलेखा योगा टीचर रही हैं। 10 साल का एक बेटा ध्रुव राही है। ताऊ रघुवीर सिंह राही बसपा शासनकाल में जिलाध्यक्ष रहे हैं। भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर 7 गोलियां मारी गई थीं पीसीएस बनने के बाद 2008 में रिंकू सिंह की पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन में हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। रिंकू ने दैनिक भास्कर को बताया था- जांच में मुझे पता चला था कि 100 करोड़ रुपए गबन हुआ। इसके पीछे राजनीतिक पार्टी के अलावा पूरा गैंग था। उस समय बसपा सरकार थी। 26 मार्च, 2009 को रिंकू एक सहकर्मी के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी उन पर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। इसमें रिंकू राही को सात गोलियां लगी थी। इनमें से दो उनके चेहरे पर लगी थीं। उनका जबड़ा तक बाहर आ गया और चेहरा बिगड़ गया था। साथ ही एक कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी। एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे, धरना दिया था इस हमले के बाद रिंकू को हायर सेंटर मेरठ ले जाया गया था। करीब एक महीने मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे थे। ऑपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे थे। इसके बाद घोटाला के खुलासे के लिए रिंकू ने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं। लेकिन, एक साल बाद भी उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इसके बाद 26 मार्च, 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया था। पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हॉस्पिटल लखनऊ भेज दिया था। ----------------------- यह खबर भी पढ़ें- उठक-बैठक करने वाले IAS ने भाजपा ब्लॉक-प्रमुख को धक्का मारा, मोबाइल पर हाथ मारा; ढाई मिनट में कागजात नहीं मिलने पर भड़के जालौन के बेतवा में भाजपा से ब्लाक प्रमुख रामराजा निरंजन का कोल्ड स्टोरेज है। वह 8 सालों से ये कोल्ड स्टोर चला रहे हैं। इसी का निरीक्षण करने के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह पहुंचे थे। ब्लॉक प्रमुख ने सोमवार को आरोप लगाया- 23 जून को मेरे कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण करने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही आये थे। उन्होंने सभी सुरक्षा मानकों की जांच करने की बात कही। मेरे मैनेजर उसमें पूरा सहयोग कर रहे थे। यहां पढ़ें पूरी खबर
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